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मंदिरों में महिलाओं के प्रवेश में कोई भेदभाव नहीं : महाराष्ट्र सरकार

bombay-high-courtमुंबई। महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के मामले में शुक्रवार को महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट से कहा कि मंदिरों में प्रवेश को लेकर कोई भेदभाव नहीं है। हर वह मंदिर जहां पुरुषों को प्रवेश की अनुमति है वहां महिलाएं भी जा सकती हैं। जहां किसी को प्रवेश करने की अनुमति नहीं वहां महिलाएं भी नहीं जा सकतीं।

शनि मंदिर में तेल चढ़ाने पर विवाद
पिछले साल शनि शिंगणापुर मंदिर में शनि की मूर्ति पर एक महिला द्वारा तेल चढ़ाने पर यह विवाद शुरू हुआ था। महिला के तेल चढ़ाने के बाद मंदिर का शुद्धिकरण किया गया था। इसके बाद भूमाता रणरागिनी ब्रिगेड की महिलाओं ने मंदिर में प्रवेश की कोशिश भी की, लेकिन पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें मंदिर पहुंचने से पहले ही रोक लिया। इसके बाद महिलाओं को शनि शिंगणापुर मंदिर में प्रवेश के अधिकार पर बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका भी दायर हुई। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा था। इस पर अपनी बात महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को रखी।

कानून को सही तरीके से लागू किया जाए
याचिकाकर्ता नीलिमा वर्तक ने कहा कि हिन्दू धार्मिक स्थलों पर स्त्री-पुरुष दोनों को पूजा करने का अधिकार देने का कानून 1956 से है। लेकिन कई जगहों पर इसे लागू नहीं किया गया, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। आज कोर्ट के निर्देश ने समानता से पूजा के अधिकार को मजबूती दी है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि कानून को सही तरीके से लागू किया जाए। इसके लिए सभी जिलों के एसपी और कलेक्टर को  सर्कुलर जारी करने के निर्देश भी सरकार को बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिए।

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महिलाओं के और भी कई मुद्दे : पंकजा मुंडे
महिला एवं बाल विकास मंत्री पंकजा मुंडे ने कहा, “मैं इसका स्वागत करती हूं। लेकिन महिलाओं के आगे और भी कई मुद्दे हैं जिन पर ध्यान देने की जरूरत है।” बॉम्बे हाई कोर्ट के इस निर्देश के बाद अन्य धार्मिक स्थलों में महिलाओं के प्रवेश की लड़ाई लड़ रहे लोगों का हौसला भी बुलंद हुआ है।

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