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PAK: नाबालिग थे दो आतंकी, हमले के बाद सामने आईं यूनिवर्सिटी हॉस्टल की PHOTOS

आतंकियों ने सबसे ज्यादा नुकसान बॉयज हॉस्टल में पहुंचाया। यहीं कई स्टूडेंट्स के सिर में गोली मारी।
आतंकियों ने सबसे ज्यादा नुकसान बॉयज हॉस्टल में पहुंचाया। यहीं कई स्टूडेंट्स के सिर में गोली मारी।

पेशावर। पाकिस्तान के चरसद्दा में बाचा खान यूनिवर्सिटी पर हमला करने आए आतंकियों की पहचान हो गई है। उनके फोन कॉल ट्रेस हो गए हैं। दो मोबाइल कैम्पस से मिले हैं। हमले के बाद की फोटोज भी सामने आई हैं। आतंकी स्टूडेंट्स को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाना चाहते थे। बॉयज हॉस्टल में कमरों से लेकर सीढ़ियों तक खून फैला हुआ है।

क्या अफगानिस्तान बॉर्डर से आए थे आतंकी…
– पाकिस्तान के इंटर सर्विस पब्लिक रिलेशन डायरेक्टर अासिम बाजवा ने बताया, “जब आर्मी कैम्पस में पहुंची, तब चारों हमलावर जिंदा थे। चार हमलावरों में से दो 18 साल से भी कम उम्र के थे। वे हॉस्टल में तबाही में मचाना चाहते थे।”
– “हमलावरों की पहचान हो गई है। उनकी कॉल ट्रेस कर ली गई हैं और एनालिसिस किया जा रहा है। फिंगर प्रिंट की जांच की जा रही है।”
– बाजवा ने बताया, “ये हमला किसने किया। किसने आतंकियों को भेजा? क्यों कराया गया? इन सबके बारे में शुरुआती इन्फॉर्मेशन मिल चुकी है।”
– ”हमने आतंकियों के पनाहगाहों का सफाया किया था। इसके बाद कुछ लोग अफगानिस्तान की बॉर्डर से आए और पाकिस्तान के अंदर एक्टिव हो गए। हम इसी एंगल की जांच कर रहे हैं।”
कहां और कब हुआ हमला?
– हमला नॉर्थ-वेस्ट पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वां प्रॉविन्स में बाचा खान यूनिवर्सिटी पर बुधवार सुबह 9 बजकर 13 मिनट पर हुआ।
– यह यूनिवर्सिटी पेशावर से 50 किमी दूर चरसद्दा में है।
– हमले में यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर सैयद हामिद हुसैन सहित 21 लोगों की मौत हो गई। 50 से ज्यादा घायल हैं।
– प्रोफेसर हुसैन ने मरने से पहले इस अपनी पिस्टल से आतंकियों का सामना किया और कई जानें बचाईं।
– हमला करने वाले चारों आतंकी भी मारे गए।
हॉस्टल में कैसे घुसे आतंकी?
– हमले के वक्त घना कोहरा था। इसी का फायदा उठाते हुए चारो आतंकी पीछे की दीवार लांघकर ब्वॉयज हॉस्टल के पास पहुंचे।
– उन्होंने पहला निशाना हॉस्टल को ही बनाया। इसके बाद क्लास रूम और मुशायरे वाली जगह पर पहुंच गए।
– एके-47 से फायरिंग शुरू कर दी और एक के बाद एक कई ब्लास्ट किए।
किसके नाम पर है यूनिवर्सिटी?
– यूनिवर्सिटी ‘सीमांत गांधी’ के नाम से मशहूर खां अब्दुल गफ्फार खां के नाम पर है। उन्हें बाचा खान भी कहा जाता था।
– खां ऐसे इकलौते पाकिस्तानी थे, जिन्हें भारत रत्न से नवाजा गया था।
– खां की बरसी के मौके पर यूनिवर्सिटी के अंदर पश्तो मुशायरा हो रहा था।
हमले के पीछे है 132 बच्चों की जान लेने वाला बदनाम चाइल्ड किलर
– रॉयटर्स के मुताबिक, तहरीक-ए-तालिबान के गीदर ग्रुप ने ही इस हमले को अंजाम दिया है। मास्टरमाइंड ग्रुप का कमांडर उमर मंसूर है।
– मंसूर दिसंबर 2014 में पेशावर में आर्मी पब्लिक स्कूल पर हमले का मास्टरमाइंड था। इसमें 132 बच्चों की जान गई थी।
– वह टीटीपी के सरगना हकीमुल्ला मसूद का करीबी रहा है और पेशावर के पास दर्रा आदम खेल का रहने वाला है।
– 37 साल का मंसूर कभी वॉलीबॉल प्लेयर था। उसके दो बेटे और एक बेटी हैं। इसके बाद भी वह बच्चों को टारगेट करता है।
– पेशावर हमले के बाद से वह ‘चाइल्ड किलर’ के तौर पर बदनाम है।
– मंसूर इतना खतरनाक है कि तालिबान के जो आतंकी फौजियों या बच्चों पर जरा-सा भी रहम दिखाते हैं, वह उन्हें भी मार डालता है।
– वह अकसर अफगानिस्तान-पाकिस्तान बॉर्डर को पार करता है और अफगानिस्तान से हथियार लेकर आता है।
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