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उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासनः रात में ही हो गया था फैसला, जेटली गए थे प्रणव के पास!

uttarakhand3नई दिल्ली। सियासी तूफान से गुजर रहे उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने की पटकथा शनिवार रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की आपात बैठक में ही लिख ली गई थी। हालांकि इसकी भनक किसी को नहीं लग पाई।

करीब 50 मिनट तक चली इस बैठक में उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने का अंतिम फैसला लिया गया और फिर माना जाता है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रात में ही राष्ट्रपति को इस बारे में बताया। इसके बाद राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने रविवार सुबह संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत इस फैसले पर अपनी मुहर लगा दी।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रविवार शाम इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि कैबिनेट की बैठक में उत्तराखंड के हालात पर चर्चा के बाद राष्ट्रपति शासन लगाने का फैसला किया गया था।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शनिवार रात केंद्रीय कैबिनेट की यह आपात बैठक हुई थी। इस बैठक के लिए प्रधानमंत्री अपने असम दौरे को बीच में छोड़कर दिल्ली पहुंचे थे।

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कैबिनेट ने राज्यपाल के.के. पॉल से मिली कई रिपोर्टों पर विचार किया, जिसमें उन्होंने राजनीतिक स्थिति को अस्थिर बताया और राज्य विधानसभा में सोमवार को प्रस्तावित शक्ति परीक्षण में हंगामा होने की संभावना पर चिंता जताई थी।

मीडिया को इस बात की खबर तो थी कि बैठक उत्तराखंड के ताजा सियासी हालात पर हो रही है, लेकिन बैठक में राष्ट्रपति शासन लगाने पर अंतिम फैसला ले लिया गया है, इसकी भनक किसी को नहीं लग पाई।

हालांकि कांग्रेस को इसका कुछ-कुछ अंदेशा हो गया था। इसी के चलते कांग्रेस की उत्तराखंड की प्रभारी अंबिका सोनी ने ठीक कैबिनेट बैठक के वक्त आनन-फानन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह आशंका जाहिर कर मोदी सरकार पर हमला बोल दिया था।

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