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हरीश रावत सरकार का खतरा लगभग टला, कांग्रेस के 9 बागी विधायक अयोग्य घोषित किए गए

vijay-bahugunaनई दिल्ली /उत्तराखंड। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ बगावत करने वाले 9 कांग्रेस विधायकों को विधानसभा स्पीकर ने शनिवार देर रात अयोग्य घोषित कर दिया। उत्तराखंड विधानसभा के स्पीकर ने यह फैसला तब लिया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मसले पर कैबिनेट की इमर्जेंसी मीटिंग बुलाई थी। कांग्रेस के बागी 9 बागी विधायकों को उत्तराखंड विधानसभा के स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल ने अयोग्य घोषित किया है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने स्पीकर के घर पर जाकर मुलाकात की थी।

प्रधानमंत्री के निर्देश पर बुलाई गई कैबिनेट की इमर्जेंसी मीटिंग के दौरान ही विधायकों को अयोग्य घोषित करने का नाटकीय फैसला आया। कांग्रेस का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार को बेदखल करने के बाद बीजेपी की लिस्ट में उत्तराखंड दूसरे नंबर पर था। कांग्रेस नेता अंबिका सोनी ने कहा कि केंद्र सरकार देश के लोकतांत्रिक तेवर को नुकसान पहुंचा रही है। स्पीकर के इस कदम से अब उत्तराखंड के 70 सदस्यीय विधानसभा में मुख्यमंत्री हरीश रावत को बहुमत के लिए अब 32 के आंकड़े की जरूरत रह गई है, जो उनकी पहुंच में माना जा रहा है।

कैबिनेट की आपात बैठक में मोदी ने की उत्तराखंड पर चर्चा उत्तराखंड में जारी सियासी संकट और फिर स्टिंग विवाद पर चर्चा के लिए शनिवार रात केंद्रीय कैबिनेट की आनन-फानन में आपात बैठक बुलाई गई। पीएम नरेंद्र मोदी अपना असम दौरा बीच में छोड़कर दिल्ली पहुंचे और इसके बाद उनके घर पर यह बैठक शुरू हुई। बैठक में वित्त मंत्री अरुण जेटली, गृह मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई बड़े नेता मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक बैठक में फिलहाल उत्तराखंड के राजनीतिक हालात पर ‘वेट ऐंड वॉच’ की नीति अपनाने का फैसला किया गया। राज्य के राजनैतिक घटनाक्रम पर गृह मंत्रालय ने शनिवार को राज्यपाल से रिपोर्ट तलब की थी। इसको लेकर राज्य में एक बार फिर कयास लगने लगे हैं कि केंद्र सरकार राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए कोई बहाना ढूंढ रही है।

उधर, कांग्रेस कथित स्टिंग ऑपरेशन से मुश्किल में घिरे मुख्यमंत्री हरीश रावत के बचाव में खुलकर आ गई है। कांग्रेस ने स्टिंग को फर्जी बताते हुए इसे हरीश रावत सरकार को गिराने की बीजेपी की साजिश करार दिया है। दिल्ली में जिस समय उत्तराखंड के हालात पर कैबिनेट की आपात बैठक चल रही थी, ठीक उसी समय कांग्रेस ने आनन-फानन में प्रेस कॉफ्रेंस कर मोदी सरकार पर हमला बोला।

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड प्रभारी अंबिका सोनी ने कैबिनेट की आपात मीटिंग पर सवाल उठाते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की आशंका जाहिर की।

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इससे पहले देहरादून में उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने भी स्टिंग प्रकरण पर हरीश रावत को बचाव किया। उन्होंने कहा, ‘कथित स्टिंग प्रकरण में मुख्यमंत्री जी ने अपनी बात मीडिया के माध्यम से सबके सामने रख दी है तथा कांग्रेस पार्टी उनके इस संबंध में दिए गए वक्तव्य का समर्थन करती है और उनके साथ खड़ी है।’

उन्होंने इस स्टिंग प्रकरण को प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की साजिश बताया और दावा किया कि बीजेपी के इस हरकत के दूरगामी परिणाम होंगे तथा उसे प्रदेश में ही नहीं बल्कि देश की राजनीति में भी इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

उपाध्याय ने बीजेपी नेताओं की मुख्यमंत्री रावत से इस्तीफा मांगने के संबंध में कहा कि कुछ समय पहले गुजरात में एक महिला का स्टिंग ऑपरेशन सामने आया था, जिसके लिए उन्हें पहले अपने प्रधानमंत्री से इस्तीफा मांगना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उस स्टिंग के समय प्रधानमंत्री मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने अपने पद से त्यागपत्र नहीं दिया था। उपाध्याय ने कहा, ‘मैं उत्तराखंड के कांग्रेसजनों की ओर से उनके इस्तीफे की मांग करता हूं। साथ ही बीजेपी के राष्ट्रीय एवं प्रदेश नेतृत्व को विनम्रता पूर्वक सलाह देना चाहता हूं कि वे अपने अध्यक्ष अमित शाह का भी त्यागपत्र लें क्योंकि उस समय वह मोदी जी के गृह मंत्री थे।’

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