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सीरिया में पुतिन ने खेला माइंड गेम, हैरत में पड़ी दुनिया

Putin-Pickedमॉस्को। सिविल वॉर से जूझ रहे सीरिया से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने सैनिकों की वापसी का आदेश मंगलवार को अचानक दिया था। इस आदेश से पूरी दुनिया हैरान रह गई। पुतिन के आदेश के घंटे भर बाद रूसी सेना सीरिया से लौटने भी लगी। पुतिन ने कहा था कि उनका जो सीरिया में सैनिक भेजने का मकसद था वह लगभग पूरा हो गया।

पुतिन की अचानक इस घोषणा से साफ संकेत है कि सीरिया का सिविल वॉर किसी और करवट शिफ्ट होने जा रहा है। मंगलवार को सीरिया के सिविल वॉर का खूनी खेल पांचवे साल में प्रवेश कर गया। पुतिन ने जिस वक्त सीरिया से अपने सैनिकों की वापसी की घोषणा की वह सच में हैरान करने वाला है। विश्लेषकों का कहना है कि रूस का सीरिया से बाहर होने की रणनीति में कुछ भी गोपनीय नहीं है।

रूस सीरिया में 6 महीने पहले गया था। रूस ने कहा था कि वह आईएसआईएस को खत्म करना चाहता है। पश्चिमी अधिकारियों ने कहा कि रूस ने ऐसा कदम सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद की सत्ता बचाने के लिए उठाया था। यूके बेस्ड थिंक टैंक चैटम हाउस में रूसी प्रोग्राम के हेड जेम्स निक्सी ने एनबीसी न्यूज से कहा, ‘रूस एक अविश्वसनीय सहयोगी है। उसकी राजनीति और इंटरनैशनल संबंध बिल्कुल साफ हैं। वह अपने हितों के मद्देनजर सब कुछ करता है।’

उन्होंने कहा, ‘रूस का वास्तिवक लक्ष्य मिडल-ईस्ट में अपना निशान छोड़ना था। वह यूक्रेन को लेकर इंटरनैशनल अलगाव को झेल रहा था। इस अलगाव को कम करने के लिए उसने सीरिया में खुलकर हस्तक्षेप किया।’ रूस का सीरिया में हस्तक्षेप एक रणनीति के तहत था। उसने वहां सैनिकों को वापस लाने की घोषणा तब कि जब दुनिया में यह धारणा मजबूत बन गई कि रूस ने ऐसा आईएस को खत्म करने के लिए नहीं बल्कि असद को बचाने के लिए किया था।

निक्सी ने कहा, ‘पुतिन की घोषणा वाकई प्रेजिडेंट असद के लिए बुरी खबर है लेकिन रूसी राष्ट्रपति ने स्मार्ट चाल चली। मिडल-ईस्ट में रूसी प्रभाव बढ़ाने के लिए असद तो मात्र एक उपकरण की तरह थे और सीरिया बैटल ग्राउंड बना। पुतिन को जो उनके हक में लगा उन्होंने वह किया।’

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रूस ने अभी ऐसा क्यों किया?
मॉस्को ने जिस वक्त यह फैसला लिया वह अपने आप में बेहद अहम है। रॉयल यूनाइटेड सर्विस इंस्टिट्यूट में रूसी रिसर्चर शेरा लेन का मानना है कि पुतिन ने जिस वक्त को चुना वह बेहद अहम है। लेन ने कहा कि सीरिया में रूसी सेना का रहना अब उसके हक में नहीं था। आर्थिक रूप से उसके लिए ठीक नहीं था और साथ ही वह अपनी सेना का पूरा फोकस यूक्रेन में रखना चाहता है। वह अपनी विदेश नीति में यूक्रेन से फिलहाल कोई समझौता नहीं करना चाहता। लेन ने कहा कि सेना वापसी की घोषणा बिल्कुल तार्किक है लेकिन किसी को इसकी उम्मीद नहीं थी।

विश्लेषकों का मानना है कि सीरिया से रूसी सेना के आने का मतलब यह नहीं लगना चाहिए कि वह असद का समर्थन करना बंद कर देगा। लेन का मानना है कि रूसी सेना की वापसी से निश्चित तौर पर असद की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। सीरिया में फिलहाल युद्धविराम पर सहमति बनी है और जिनेवा में इस हफ्ते इसे लेकर बैठक होने वाली है। रूस इस मामले में किसी मौके के इंतजार में है।

रूस के इस फैसले का क्या होगा असर?
विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि रूस की यह घोषणा जमीन पर किस हद तक व्यावहारिक है इसके देखने की जरूरत है। यदि यह केवल दिखाने के लिए है तो रूसी रणनीति कुछ और है। जिनेवा शांति वार्ता से पहले एक विद्रोही ग्रुप ने इसे खारिज कर दिया है कि रूस ऐसा कर रहा है। कुछ का मानना है कि रूस शांति वार्ता से पहले दिखाना चाहता है कि वह सीरिया में रचनात्मक भूमिका अदा करना चाह रहा है। विद्रोहियों का कहना है कि सीरिया में जमीन पर रूस ऐसा कुछ भी नहीं कर रहा है। सीरियाई विपक्ष का कहना है कि पुतिन के दिमाग को समझना इतना आसान नहीं है लेकिन सीरिया में रूस की मौजूदगी किसी भी लिहाज से हमारे देश के हक में नहीं है।

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