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कार्यक्रम में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे पर बोले श्री श्री रविशंकर

ravishankarनई दिल्ली। एओएल (आर्ट ऑफ लिविंग) के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने शनिवार को कहा कि पार्टियों को उन कार्यक्रमों का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए, जिसका असर भारत की प्रतिष्ठा पर पड़े। शुक्रवार को कार्यक्रम में एक पाकिस्तानी विद्वान का भाषण खत्म होने के बाद ‘जय हिंद और पाकिस्तान जिंदाबाद साथ-साथ चलना चाहिए’ संबंधी उनके कथित बयान के बारे में पूछे जाने पर रविशंकर ने कहा, ‘उन्होंने कहा कि गुरुजी ने कुछ कहा है। ऐसी बात नहीं है। इमाम हमेशा पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे के साथ अपनी बात समाप्त करते हैं। मैंने कहा कि आप यह कह सकते हैं और मैं कहूंगा जय हिंद। इसलिए मैंने जय हिंद कहा और उन्होंने पाकिस्तान जिंदाबाद।’

उन्होंने संकेत दिया कि यमुना खादर में विश्व सांस्कृतिक महोत्सव की आलोचना करने में मीडिया कठोर रहा है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि उनके फाउन्डेशन को पहले ही ऑस्ट्रेलिया, मेक्सिको और अन्य देशों से कार्यक्रम का अगला संस्करण आयोजित करने का न्योता मिल चुका है।

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रविशंकर ने कहा, ‘हमें थोड़ी परिपक्वता की आवश्यकता है। मैं इसकी परवाह नहीं करता लेकिन मैं सभी राजनैतिक दलों से अनुरोध करता हूं। जब भी इतना भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा हो तो दलगत राजनीति को दरकिनार रखना चाहिए।’

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पाकिस्तान जिंदाबाद वाले नारे पर उठे विवाद पर उन्होंने कहा, ‘मैंने कहा कि यह दोनों देशों के लिए जीत वाली स्थिति हो सकती है। कहीं न कहीं हमें जुड़ने की आवश्यकता है। हमें साथ आने की आवश्यकता है और वही हो रहा है।’

यमुना खादर में महोत्सव के आयोजन का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि वह नदी में नई जान फूंकने के लिए काम करेंगे।

एनजीटी द्वारा लगाए गए 5 करोड़ रुपये के जुर्माने का भुगतान नहीं करने के बारे में उनके बयान से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि एनजीटी ने साफ कर दिया है कि यह जुर्माना नहीं था, बल्कि उस इलाके को नया जीवन प्रदान करने के लिए मुआवजा है। एओएल संस्थापक ने कहा कि उनका संगठन यमुना नदी के संरक्षण के लिए ठोस योजना के साथ आएगा।

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