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क्या आपको याद है पहले ‘वर्ल्ड कप का हीरो’, जिसका करियर खत्म हो गया जीत के बाद…

joginder-sharmaनई दिल्ली। टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों का रोमांच इस वक्त चरम पर पहुंचने को है, और सभी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या टीम इंडिया दोबारा उस प्रतिष्ठित कप को अपने नाम कर पाएगी, जो उसने वर्ष 2007 में खेले गए पहले ही वर्ल्ड कप के फाइनल मैच में चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को हराकर जीता था। उसके बाद खेले गए चार संस्करणों में भारतीय टीम सिर्फ एक बार वर्ष 2014 में फाइनल तक पहुंची, लेकिन जीत नहीं पाई… सो, इस बार ‘बेहद संतुलित’ कही जा रही टीम इंडिया से काफी उम्मीदें भारतीय प्रशंसकों को हैं।

लेकिन आज हम मौजूदा टीम के बारे में नहीं, एक ऐसे खिलाड़ी के बारे में बात करने आए हैं, जो हमारे हाथ आए इकलौते कप का निमित्त बना था, और 2007 के बेहद रोमांचक फाइनल मैच के आखिरी ओवर में विपक्षी कप्तान मिसबाह-उल-हक को आउट कर भारतीयों को ऐसी जीत दिलाई थी, जो आज तक यादगार है।

जी हां, हम बात कर रहे हैं जोगिंदर शर्मा की, जिन्होंने वर्ष 2007 के टी-20 वर्ल्ड कप से पहले कोई टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला था, और इससे भी दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान के खिलाफ जीते उस फाइनल मैच के बाद भी उन्हें कभी टीम में जगह नहीं मिल पाई।

दर्शकों को गलत लगा था जोगिंदर को आखिरी ओवर देने का फैसला
मज़े की बात यह भी है कि फाइनल मैच के दौरान जोगिंदर शर्मा को जब कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने जब 20वां ओवर थमाया था, अधिकतर दर्शकों को वह फैसला गलत लगा था, क्योंकि उस खास ओवर की कमान लगभग ‘नातजुर्बेकार’ गेंदबाज को थमाया जाना सही कैसे मान लेते भारतीय प्रशंसक, जिनकी सांसें मिसबाह-उल-हक के क्रीज़ पर होने की वजह से अटकी हुई थीं, और जीत हाथों से निकल जाने के आसार नज़र आ रहे थे।
खैर, उस फाइनल मैच में पाकिस्तान को जीतने के लिए आखिरी ओवर में 13 रन चाहिए थे, और जोगिंदर ने पहली गेंद वाइड फेंकी। दूसरी गेंद, जो वाइड के बदले फेंकी गई, वह शॉर्टलेंथ थी, और मिसबाह-उल-हक से मिस हो गई। तनाव बढ़ रहा था, और लगा कि जोगिंदर संभाल लेगा। लेकिन आउटसाइड ऑफ पर फेंकी गई अगली ही गेंद फुलटॉस थी, जिस पर मिसबाह-उल-हक ने शानदार छक्का जड़कर पाकिस्तानी उम्मीदों को फिर जगा दिया।

तुरुप का इक्का साबित हुआ जोगिंदर शर्मा
इधर, भारतीय प्रशंसक एक बार फिर उसी मूड में आ गए, जिसमें वे ओवर शुरू होते वक्त थे, और वही सवाल करने लगे कि जोगिंदर को गेंदबाजी क्यों दी। खैर, भारतीयों को यह तनाव ज़्यादा देर नहीं झेलना पड़ा, और अगली गेंद पर स्कूप शॉट खेलते हुए मिसबाह-उल-हक ने उसे शॉर्ट फाइन-लेग की तरफ उछाल दिया, जिसे एस. श्रीसंत ने लपक लिया, और भारत ने पहला टी-20 वर्ल्ड कप पांच रन से जीत लिया।

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बेहद छोटा रहा जोगिंदर का इंटरनेशनल करियर
अब आपको बताते हैं, जोगिंदर शर्मा के बेहद छोटे करियर के बारे में। जोगिंदर ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में कुल मिलाकर आठ मैच खेले हैं, जिनमें से चार वन-डे इंटरनेशनल हैं, और चार ही टी-20 अंतरराष्ट्रीय। जोगिंदर ने सबसे पहले वर्ष 2004 में अपने करियर का पहला एक-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच चटगांव में बांग्लादेश के खिलाफ खेला था, और उसके बाद मेजबान टीम के खिलाफ दो मैच और ढाका में खेले। इन तीन मैचों में उन्होंने कुल एक विकेट हासिल किया, और तीन साल तक टीम में वापसी नहीं कर पाए। (पूरा चार्ट देखें समाचार के अंत में…)

अपने करियर का चौथा वन-डे इंटरनेशनल मैच खेलने का मौका जोगिंदर को तब मिला, जब उन्हें वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ कटक मैच के लिए अंतिम एकादश में लिया गया, लेकिन इस मैच में भी जोगिंदर किसी विपक्षी खिलाड़ी को पैवेलियन नहीं लौटा पाए, और उसके बाद वह भारतीय टीम का हिस्सा कभी नहीं बन पाए।

वर्ल्ड कप से शुरू, वर्ल्ड कप पर खत्म
उधर, जोगिंदर का टी-20 अंतरराष्ट्रीय करियर 2007 के वर्ल्ड कप में ही शुरू हुआ, और उन्होंने पहले तीनों मैच डरबन के मैदान में क्रमशः इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले। जोगिंदर को गेंदबाजी में कामयाबी सिर्फ कंगारुओं के खिलाफ मिली, जहां उन्होंने दो विकेट चटकाए। इसके बाद फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ वह ‘फेवरेट’ न होते हुए भी ‘हीरो’ कैसे बन गए, यह हमने आपको ऊपर बताया ही है। लेकिन, इस फाइनल के बावजूद जोगिंदर का अंतरराष्ट्रीय करियर इसी वर्ल्ड कप से शुरू होकर इसी पर खत्म भी हो गया।

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