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गुमनामी बाबा के सामान कर रहे हैं नेताजी होने का इशारा!

pd logफैजाबाद। गुमनामी बाबा को नेताजी सुभाष चंद्र बोस कहने वाली अफवाहें और मजबूत होती जा रही हैं। गुरुवार को गुमनामी बाबा का म्यूजियम बनाने के सिलसिले में उनके सामान की जांच के दौरान अधिकारियों को आजाद हिंद फौज के खुफिया विभाग में वरिष्ठ अधिकारी डॉक्टर पबित्र मोहन रॉय द्वारा लिखे गए पत्र और टेलिग्राम मिले हैं। आजाद हिंद फौज के ही वरिष्ठ अधिकारी निजामुद्दीन ने इस मामले को एक नया मोड़ दिया है। आजमगढ़ में रहने वाले निजामुद्दीन ने कहा कि फैजाबाद के गुमनामी बाबा के सामान से जो जर्मन दूरबीन मिली है, वह वही दूरबीन है जिसका इस्तेमाल खुद नेताजी और आजाद हिंद फौज के बाकी सदस्य किया करते थे।
गुरुवार को जस्टिस मुखर्जी आयोग द्वारा गुमनामी बाबा के सामान में शामिल 197 चीजों को देखा और सूचीबद्ध किया गया। गुमनामी बाबा ने अपने अंतिम दिन जिस राम भवन में गुजारे थे, उसके मालिक शक्ति सिंह ने बताया, ‘उनके सामान में कम से कम अंतर्देशीय पत्र, मनीऑर्डर की पावती के रसीद और टेलिग्राम मिले। बांग्लादेश का एक हाथ से बनाया गया मानचित्र भी मिला। इस मानचित्र में पद्मा नदी और कुछ अन्य नदियों को दर्शाया गया था।’

31 मार्च 1985 को आजाद हिंद फौज के वरिष्ठ अधिकारी डॉक्टर पीएम रॉय द्वारा भेजे गए टेलिग्राम की ओर इशारा करते हुए शक्ति सिंह बताते हैं, ‘बसंती दुर्गा पूजा के मौके पर हमारा प्रणाम स्वीकार कीजिए।’

उधर निजामुद्दीन के बेटे अकरम ने बताया, ‘जब मेरे पिता ने समाचार चैनलों पर गुमनामी बाबा के सामान में मिला जर्मन दूरबीन देखा, तो वह चौंक गए। उन्होंने मुझसे कहा कि नेताजी और आजाद हिंद फौज के बाकी सदस्य उसी दूरबीन का इस्तेमाल किया करते थे। उन्होंने कहा कि जापानी दूरबीनों के मुकाबले इन दूरबीनों की गुणवत्ता अच्छी होती थी।’ अकरम ने बताया कि आजाद हिंद फौज के सदस्य जर्मन और जापानी, दोनों देशों में बने हथियारों का इस्तेमाल करते थे।

गुमनामी बाबा के सामान में एक और अहम चीज मिली। 19 अगस्त 1977 को प्रधानमंत्री दफ्तर में भेजी गई एक चिट्ठी में आग्रह किया गया है कि खोसला आयोग और शाहनवाज आयोग के पास जमा सबूतों की फिर से जांच की जाए। इस पत्र पर डॉक्टर आर.सी. मजूमदार, कोलकाता यूनिवर्सिटी के तत्कालीन उपकुलपति एस.के. मुखर्जी, आनंद बाजार पत्रिका के मुख्य संपादक अशोक कुमार सरकार, एन.डी. मजूमदार, आजाद हिंद फौज के पूर्व सचिव प्रफुल्ल चंद्र सेन और पूर्व एडवोकेट जनरल अनिल कुमार दत्ता के हस्ताक्षर हैं।

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आजाद हिंद फौज की वर्दी मिलने की संभावना पर जवाब देते हुए शक्ति सिंह ने बताया, ‘मैंने अभी तक वर्दी नहीं देखी है, लेकिन सामान की सूची में एक ओवरकोट का जिक्र है। जहां तक रॉलेक्स घड़ी की बात है, तो इसके बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है।’ शक्ति सिंह ने बताया कि हिमालयन ब्लंडर नाम की एक किताब की प्रति भी सामान में मिली। इसमें कई पंक्तियों को रेखांकित किया गया था। हर 2 पन्ने के अंतराल पर कई नोटिंग्स भी लिखी गई हैं। कुछ हिस्सों को ‘महत्वपूर्ण’ और कुछ को ‘बेहद महत्वपूर्ण’ चिह्नित किया गया है।

16 सितंबर 1972 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख एम.एस. गोलवलकर द्वारा लिखी गई एक चिट्ठी भी गुमनामी बाबा के सामान में से मिली है। इस पत्र में गोलवलकर ने लिखा है, ‘मुझे 25 अगस्त से 2 सितंबर तक लिखे गए आपके पत्र 6 सितंबर 1972 को मिले। अगर आप पत्र में लिखी गई तीन जगहों में से एक जगह को नाम लेते हैं, तो मेरा काम निश्चित तौर पर आसान हो जाएगा।’

इस पत्र में गोलवलकर ने आगे लिखा है, ‘मैं 18 सितंबर से 12 अक्टूबर तक प्रवास पर रहूंगा। इस बीच में तीन दिन के लिए नागपुर में भी मौजूद रहूंगा।’ इस पत्र में गोलवलकर ने गुमनामी बाबा उर्फ भगवान जी को ‘पूज्यपाद श्रीमान स्वामी विजयानंदजी महाराज’ कहकर संबोधित किया है।

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