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दंगों की जांच रिपोर्ट से चढ़ा सियासी पारा !

pd logलखनऊ। जस्टिस विष्णु सहाय की मुजफ्फरनगर दंगों को लेकर तैयार रिपोर्ट सार्वजनिक होते ही यूपी का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। सदन में रिपोर्ट पेश होते ही विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि जानबूझकर ऐसी रिपोर्ट तैयार की गई, जिससे सपा की छवि मुस्लिमों की हितैषी की बने। यह रिपोर्ट पूरी तरह से यूपी की सियासत में आगामी विधानसभा चुनावों में ध्रुवीकरण की तैयारी है। विपक्ष के इन तेवरों को देखकर तय है कि मंगलवार को विधानसभा में इस रिपोर्ट पर हंगामा हो सकता है।

मुजफ्फरनगर दंगों के बाद लोकसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद सरकार ने अपनी छवि बदलने की कोशिश की थी। पर हाल ही में हुए उपचुनावों में सपा को सहारनपुर के देवबंद में बड़ा झटका मिला। मुस्लिम बहुल आबादी में समाजवादी पार्टी 6000 वोटों से हार गई। यह सीट पहले समाजवादी पार्टी के पास थी। यही हाल मुजफ्फरनगर में हुआ।

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मुजफ्फरनगर में बीजेपी को यह सीट मिली और समाजवादी पार्टी दूसरे नंबर पर आकर यह सीट भी गंवा बैठी। इससे अब समाजवादी पार्टी को अपनी छवि बदलने की चिंता है। 2017 के विधानसभा चुनावों से पहले सपा मुसलमानों को बीएसपी या कांग्रेस के पाले में नहीं जाने देना चाहती। यह रिपोर्ट के सार्वजनिक होने से सपा मुसलमानों के बीच जाकर यह दावा कर सकती है कि वही उनकी असल हितैषी है।

रिपोर्ट में मुसलमानों की मदद के आरोप

जस्टिस सहाय की रिपोर्ट बताती है कि कवाल में दो हिंदू युवकों की हत्या में नामजद आठ लोगों को छोड़ दिया गया। इससे जाटों में आक्रोश पनपा और संदेश गया कि सरकार और प्रशासन मुस्लिमों की पक्षधर हैं और उनके प्रभाव में काम कर रही है। दंगा होने के बाद डीएम सुरेंद्र सिंह और एसएसपी मंजिल सैनी का ट्रांसफर कर दिया गया। इन अफसरों ने ही आठ संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेने के आदेश दिए थे। इससे हिंदू समाज (जाट समुदाय) में सरकार के खिलाफ आक्रोश व्याप्त हो गया।

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कवाल गांव में शहनवाज नामक युवक की हत्या के बाद ही सचिन-गौरव की हत्या हुई थी। प्रशासन ने सचिन और गौरव के पूरे परिवार को एफआईआर में नामजद कर दिया, जबकि उनका परिवार मौके पर था ही नहीं।

डीएम और एसएसपी ने बीएसपी के पूर्व सांसद कादिर राणा का चौक पर जाकर ज्ञापन लिया। इससे हिंदुओं में आक्रोश व्याप्त हो गया।

लेकिन बीजेपी से करीबी का क्या?

कभी मुसलमानों के मसीहा माने जाने वाले सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के पिछले कई बयान उनकी बीजेपी से करीबी की ओर इशारा कर रहे हैं। मुलायम लगातार बीजेपी की तारीफ कर रहे हैं। कांग्रेस पिछली बार जब सदन नहीं चलने दे रही थी, उस वक्त मुलायम सिंह कांग्रेस के साथ होने के बावजूद सदन चलाने के लिए बीजेपी के पक्ष में आ गए थे। इसके बाद उन्होंने यह कहकर भी चौंका दिया कि अगर बीजेपी मुसलमानों और कश्मीर पर अपना नजरिया बदल दे तो दोनों की दोस्ती हो सकती है।

बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के भी उन्होंने गुणगान किए। एक सभा में तो मुलायम ने यहां तक कह दिया कि अयोध्या में कार सेवकों पर गोली चलवाने का उन्हें बेहद अफसोस है। इन बयानों के अलावा सरकार खुद को हिंदुओं की हितैषी बताने के लिए श्रवण यात्रा के तहत बुजुर्गों को तिरुपति, रामेश्वरम जैसी जगह तीर्थ यात्रा पर भेज रही है।

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