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केंद्र सरकार ने पठानकोट में सैन्य ऑपरेशन का 6.35 करोड़ रुपये का बिल पंजाब को भेजा

ch7चंडीगढ़। क्या किसी राज्य सरकार को अपनी सीमा में केंद्रीय बलों की तैनाती में आने वाले खर्च का बिल भरना चाहिए और वह भी तब जबकि सुरक्षा बल पाकिस्तानी आतंकवादियों से लड़ने के लिए बुलाए गए हों। कम से कम पंजाब की सरकार को तो ऐसा नहीं सोचती। पंजाब सरकार ने जनवरी में पठानकोट पर हुए आंतकी हमलों के दौरान तैनात किए गए अर्द्धसैनिक बलों के भुगतान के लिए केंद्र द्वारा भेजे गए 6.35 करोड़ रुपये के बिल को चुकाने से इनकार कर दिया है।

20 जनवरी को लिखी गई एक चिट्ठी के अनुसार गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार से पंजाब को अर्द्धसैनिक बलों की 20 कंपनियों की तैनाती के लिए पंजाब को भुगतान करने को कहा है। ये अर्द्धसैनिक बल 2 जनवरी और 27 जनवरी के बीच पठानकोट और उसके आस-पास के इलाकों में तैनात किए गए थे।

चिट्ठी के मुताबिक हरेक कंपनी का रोज का खर्च 1,77,143 रुपया पड़ता है। इसके अलावा पंजाब सरकार को अर्द्धसैनिक बलों के आवागमन का खर्च भी भरने को कहा गया है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 11 कंपनियां और सीमा सुरक्षा बल की नौ कंपनियां आतंकी हमलों के दौरान पठानकोट के इर्दगिर्द सुरक्षा घेरे को मजबूत करने के लिए तैनात की गईं थीं।

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होम मिनिस्ट्री की चिट्ठी से चिढ़ी राज्य की अकाली दल सरकार ने जवाब में लिखा है कि अर्द्धसैनिक बलों की इन कंपनियों की तैनाती राष्ट्रीय हित में की गई थी और इसलिए इनके खर्च का भार राज्य सरकार पर नहीं दिया जाना चाहिए।

केंद्र के इस डिमांड पर पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘पंजाब में आतंकवाद के 15 सालों के दौरान सेना यहां थी। राज्य सरकार पर इसका खर्च लादा गया। यहां तक कि उन्होंने इसका ब्याज भी वसूला। अगर आप स्थानीय मुद्दों (जैसे हरियाणा का जाट आरक्षण) से निपटने के लिए सेना बुलाते हैं तो एक बात है लेकिन अगर यहां पाकिस्तान हमला करता है और आप हमसे इसका भुगतान करने के लिए कहते हैं तो मेरा पूरा बजट गड़बड़ हो जाता है।’

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