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चिप्पा समुदाय में जीजू से 5 हजार से ज्यादा नहीं ले पाएंगी सालियां

saliअहमदाबाद। ‘दूल्हे की सालियों ओ हरे दुपट्टे वालियों, जूते दे दो, पैसे ले लो’ फिल्म हम दिल दे चुके सनम का यह गाना तो आपने सुना ही होगा। इससे पता चलता है कि देश के कई हिस्सों में सालियों द्वारा जीजा के जूते चुराने की रस्म कितनी लोकप्रिय है। लेकिन जमालपुर के चिप्पा समुदाय के लिए यही प्रथा मुसीबत बन गई जब एक साली ने जूते लौटाने के बदले 50 हजार रुपये मांगे। नतीजा यह हुआ कि यहां जूते चुराने के बदले दी जाने वाली रकम पांच हजार रुपये फिक्स कर दी गई।
चिप्पा समस्त जमात कमिटी के सदस्यों ने मिलकर यह फैसला लिया। अब जूते वापस देने के बदले पांच हजार रुपये से ज्यादा नहीं मांगा जा सकता है। कमिटी के खजांची यासिन पिपदवाला ने कहा कि नियम का उल्लंघन करने पर शादी कैंसल तक हो सकती है। दरअसल एक शादी में साली ने जूते लौटाने के एवज में 50 हजार रुपये की डिमांड कर दी। बहुत कोशिशों के बाद मामला 20 हजार पर तय हुआ। इसके बाद ही यह फैसला लिए जाने की जरूरत महसूस की गई। चिप्पा लोगों की आबादी तकरीबन 50 हजार है। ये आम तौर पर टेक्सटाइल का काम करते हैं। समुदाय ने शादियों से पहले होनी वाली नाइट पार्टी ‘रातीजोगा’ पर भी रोक लगा दी है। उनका कहना है कि इससे न सिर्फ डीजे के शोर-शराबा और झंझट से छुटाकारा मिलेगा बल्कि दावत पर उड़ाए जाने वाले पैसों की भी बचत होगी।

कमिटी ने नाइट पार्टी करने पर एक रुपये का प्रतीकात्मक जुर्माना तय किया है। जुर्माने की राशि भले मायने न रखती हो लेकिन इसके अलावा वे नियम तोड़ने वालों के यहां काजी को भी देर से भेजते हैं। इसलिए लोग अब नाइट पार्टी करने से बचने लगे हैं। समिति ने शादियों में चारों ओर इत्र छिड़कने और आतिशबाजी पर भी रोक लगा दी है। यासिन कहते हैं,’हम चाहते हैं कि शादियों पर फिजूलखर्ची के बजाय हम बच्चों की पढ़ाई पर पैसे खर्च करे। शिक्षा में हमारा समुदाय पीछे है।’ समिति ने शादी से जुड़े ज्यादातर कार्यक्रम रात के बजाय दिन में कराने के निर्देश दिए हैं।

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चिप्पा समुदाय के ही इमरान खेड़ावाल ने कहा कि हमने सगाई से जुड़ी सभी रस्में खत्म कर दी हैं। इससे दुल्हन के परिवार पर खर्च का बोझ कम होगा।

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