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EPF: PM के निर्देश के बाद FM संशोधन को तैयार, मंगलवार को हो सकती है घोषणा-सूत्र

relookनई दिल्ली। ईपीएफ टैक्स के मुद्दे पर बढ़ते विवाद के बाद अब सरकार ने प्रस्तावित प्रावधानों में संशोधन करने का मन बना लिया है। माना जा रहा है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली मंगलवार को इसकी घोषणा कर सकते हैं। बजट में ईपीएफ विदड्रॉल के 60 फीसदी कॉरपस पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगाने की बात कही गई थी। हालांकि 31 मार्च 2016 से पहले जमा राशि को प्रस्ताव में इस प्रावधान से छूट प्रदान की गई है।

इससे पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को बीजेपी संसदीय दल की बैठक को संबोधित करते हुए कहा था कि वह टैक्स प्रस्ताव में बदलाव तभी कर सकते हैं जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनसे ऐसा करने के लिए कहेंगे। मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टैक्स प्रस्ताव में बदलाव पर विचार करने के लिए कहा है, जिसके बाद संशोधन लगभग तय माना जा रहा है।

वहीं ईटी को मिली जानकारी के मुताबिक श्रम मंत्रालय ने भी इसमें बदलाव के लिए जोर दिया था। मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक इस मुद्दे पर गुरुवार को लंबी बैठक हुई, जिसमें टैक्स प्रस्ताव के विरोध में मत सामने आए।

रिटायरमेंट सेविंग पर टैक्स लगाने पर तमाम विशेषज्ञों, ट्रेड यूनियनों और राजनीतिज्ञों ने विरोध दर्ज कराया था। यहां तक कि आरएसएस से जुड़े ट्रेड यूनियन भारतीय मजदूर संघ ने भी इसका कड़ा विरोध किया था और इसे मजदूरों के साथ नाइंसाफी बताई है। तमाम मजदूर संगठनों ने इसके विरोध में 10 मार्च को देशव्यापी हड़ताल पर भी जाने का फैसला किया था।

लोकसभा सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक वित्त मंत्री अरुण जेटली ने स्पीकर सुमित्रा महाजन से प्रस्ताव को संशोधित किए जाने संबन्धी बयान को सदन में शुक्रवार को रखने के लिए अनुमति मांगी थी, लेकिन पूर्व स्पीकर पीए संगमा के निधन के चलते सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया। उम्मीद की जा रही है कि वित्त मंत्री मंगलवार को सदन की कार्यवाही दोबारा शुरु होते ही इससे जुड़ी कुछ अहम घोषणाएं कर सकते हैं।

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सरकार इस मसले पर कई और रास्ते तलाश रही है, जिसके तहत अप्रैल 2016 से इकट्ठा कॉरपस पर मिलने वाले ब्याज पर ही टैक्स लगाने का विचार भी शामिल है। इसमें मूल धन को टैक्स के दायरे से बाहर रखा गया है। इसके अलावा एक अन्य विकल्प के तहत अप्रैल 2016 के बाद खोले गए खातों पर ही टैक्स लगाने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है।

हालांकि वित्त मंत्रालय का दावा है कि प्रस्तावित टैक्स प्रावधान के दायरे में ईपीएफ के कुल 3.70 करोड़ सदस्यों में से केवल 70 लाख लोग ही आएंगे, लेकिन इस मसले पर मिडल क्लास के भारी विरोध के चलते उसे संशोधन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

वहीं सूत्रों की मानें तो टैक्स प्रस्ताव में बदलाव की यह घोषणा आचार संहिता का उल्लंघन नहीं मानी जाएगी जो कि पाचं राज्यों में विधानसभा चुनावों तारीखों की शुक्रवार को हुई घोषणा के साथ ही लागू हो गया है।

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