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बीजेपी के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं पांच राज्यों के चुनाव

election4नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने केरल, तमिलनाडु, असम, पश्चिम बंगाल और पुद्दुचेरी में विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया है। इस साल का यह सबसे बड़ा राजनीतिक समर कहा जा रहा है। लेकिन खासतौर परकेंद्र की सत्ता पर काबिल बीजेपी के लिए यह चुनाव खासा महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। पीएम नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के ग्राफ में गिरावट और आर्थिक ग्रोथ को पूरी रफ्तार न दे पाने का दबाव झेल रही केंद्र सरकार के लिए यह चुनाव चुनौती साबित होने वाले हैं।
राज्यसभा में बहुमत हासिल करने को भी बीजेपी के लिए यह चुनाव महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं क्योंकि राज्यसभा सदस्यों को अप्रत्यक्ष तौर पर विधायकों द्वारा ही निर्वाचित किया जाता है। उच्च सदन में बीजेपी के पास बहुमत न होने के चलते ही जीएसटी जैसे विधेयक लंबित हैं। दक्षिण के राज्य तमिलनाडु, केरल और पुद्दुचेरी और पूर्वी राज्य पश्चिम बंगाल और असम के विधानसभा चुनावों में कुल 17 करोड़ लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इन सभी राज्यों में क्षेत्रीय दलों या देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस की सरकारें हैं।

बेंगलुरू की जैन यूनिवर्सिटी के पॉलिटिकल सायेंस के प्रफेसर संदीप शास्त्री ने कहा, ‘इन राज्यों में बीजेपी की परफॉर्मेंस को केंद्र सरकार के लिए जनमत संग्रह के तौर पर देखा जाएगा। इन राज्यों में खासतौर पर असम में बीजेपी का खराब प्रदर्शन एक सत्ताधारी दल के तौर पर उसकी छवि को प्रभावित करेगा।’ बांग्लादेशी घुसपैठ को मुद्दा बनाकर बीजेपी असम में बढ़त हासिल करने की उम्मीद में है, इसके अलावा अन्य चार राज्यों में भी उसे पहले से बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद है। तमिलनाडु में सत्ताधारी पार्टी एआईएडीएमके का कहना है कि वह एक बार फिर जोरदार जीत दर्ज करेगी।

इंडिया टुडे मैगजीन की ओर से पिछले महीने प्रकाशित एक पोल के आंकड़ों के मुताबिक मोदी की लोकप्रियता में गिरावट आ रही है। हालांकि उनका राष्ट्रवादी गठबंधन मौजूदा वक्त में आम चुनाव होने की स्थिति में पहले से कम सीटों पर ही सही, लेकिन बहुमत हासिल करने की स्थिति में है। पोल के मुताबिक कांग्रेस पार्टी 2014 के चुनावों में हासिल सीटों से दोगुनी पर जीत हासिल कर सकती है। हालांकि पांच राज्यों में होने वाले चुनावों को लेकर अब तक कोई सर्वे सामने नहीं आया है।

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पीएम नरेंद्र मोदी फिलहाल ग्रामीण इलाकों में अपना आधार मजबूत करने की कोशिशों में जुटे हैं, जहां लगातार दो सूखे के चलते किसान मुश्किल के दौर से गुजर रहे हैं। कर्ज में डूबे किसानों के आत्महत्या करने का सिलसिला जारी है। पिछले ही साल बीजेपी को बिहार में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है। पांच राज्यों में 4 अप्रैल से 16 मई तक चुनाव होगा, जबकि 19 मई को चुनाव परिणाम आएगा।

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