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16-17 जनवरी 2012 का वह दिन जब कांग्रेस के ‘आला कमान’ के सीने में घबराहट और कार्यालय में भगदड़ मची हुई थी!

16-17 जनवरी 2012 इस दिन के बारे में अगर कांग्रेस को याद दिलाया जाये तो वह सपने में भी थर-थर कांपेगी। कांग्रेस की आला कमान के पसीने छुड़ा देनेवाले इस दिन को इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाना चाहिए था। सॊच कर ही हंसी आती है कि कैसा रहा होगा कांग्रेस कार्यालय का वह मंजर जब कांग्रेस के पिट्ठू तितर बितर भाग रहे होंगे। आखिर उस दिन क्या हुआ था?

उस दिन भारतीय सेना के दो दस्तें जिसमें एक इनफेन्ट्री बटालियन था और दूसरा था पाराट्रूपर ब्रिगेड बिना रक्षा मंत्री से अनुमति लिये दिल्ली की तरफ कूच किया था। भारतीय सेना के इस अप्रत्याशित कार्यवाही से दिल्ली में बैठे कांग्रेस की आला कमान का दिल दहल जाता है। उन्हें सेना के इस अप्रत्याशित कार्यवाही में तख्ता पलट की बू आने लगती है। कांग्रेस कार्यालय में भगदड़ मच जाती है। हालांकि कांग्रेस इस बात का दावा करती है कि उसे सेना के इस कार्यवाही से बिल्कुल भी डर नहीं लगा था, यह सरा सर झूठ है।

वर्ष 2012 में अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्‍सप्रेस ने यह दावा किया था कि 16 और 17 जनवरी की रात भारतीय सेना की दो टुकड़ियां केंद्र की यूपीए सरकार को बिना बताये दिल्‍ली की तरफ बढ़ रहीं थी और राजधानी के बेहद करीब तक आ चुकीं थी। अखबार की मानें तो इनमें एक टुकड़ी 33वीं आर्मर्ड डिविजन की मेकेनाइज्‍ड इनफैन्‍ट्री थी जो हिसार से दिल्‍ली की तरफ बड़ रही थी और उसी समय आगरा से 50 पैरा ब्रिगेड की एक टुकड़ी भी दिल्‍ली की तरफ़ बड़ रही थी।

 

दिल्ली की राज गद्दी हिल ने लगी थी। इस बात को कांग्रेस ने मानने से इनकार कर दिया कि सेना ने बिना बताये दिल्ली कूच कर दिया था और यह कहकर उस पर परदा डाल दिया कि यह तो सेना का रूटीन अभ्‍यास था। उस वक्त सेना के अध्यक्ष जनरल वी. कॆ. सिंह थे और उनको शक के दायरे में घेर लिया गया। उनकी नीयत पर सवाल उठाये गये। उनको जबरन इस्तीफा देने के लिए विवश किया गया। वी.के.सिंह ने कांग्रेस पर आरॊप भी लगाया था की यूपीए सरकार देश के जवानों को प्रयाप्त मात्रा में हथियार उपलब्ध नही करवाती है और उन्होंने आरॊप लगाया था कि कांग्रेस ने उनको घटिया हथियार खरीद ने की दलाली करने के लिए तीन मिलियन डॉलार की रिश्वत की भी ‘आफर’ दी थी।

धन्य है कि हमारे भारतीय सेना के जवान बिकाऊ नहीं है इसलिए आज भी हम सही सलामत जिंदा हैं। वी. के .सिंह के ऊपर आरॊप लगाया गया की वे रिश्वत देकर जम्मू और कश्मीर का तख्ता पलट ने की भी कॊशिश कर रहे थे। उन के ऊपर यह भी आरॊप लगाया की वे खूफिया टुकड़ी बनाकर सेना और राजनेता की चाल चलन पर नज़र रखते थे। अगर उन्होंने ऐसा किया है तो देश उनका बहुत आभारी है। गद्दार कांग्रेस की हर चाल पर नज़र रखना जरूरी है। कांग्रेस के डीएनए में गद्दारी है और वह कब दुश्मनों के साथ मिलकर भारत पर हमला करवादे कहा नहीं जा सकता। वी.के. सिंह मई 2012 को निवृत्त हो गये थे।

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16-17 जनवरी की रात कांग्रेस की राजमाता एक दम बौखलाई हुई थी यह इसी बात से पता चलता है कि उसी दिन भारतीय सेना की दोनों टुकड़ियों को तुरंत वापस लौटने का आदेश दे दिया गया। रक्षा मंत्री ए.के.अंटॊनी ने इस कार्यवाही को सेना की कवायत बताया लेकिन उनकी हडबडाहट यह ज़रूर बता रही थी कि कांग्रेस की जड़ें हिल गयी थी। रक्षा सचिव शशिकांत शर्मा को विदेशी दौरे से वापस बुलाया गया और उन्होंने तुरंत (DGMO) लेफ्तिनेंट जनरल चौधरी को आधी रात में बुलावा भेजा और कहा कि ” मैं अभी अभी अधिकार के “उच्चतम सीट” से मिलकर आया हूं और वे बेहद चिंतित हैं”। यह “उच्चतम सीट” जो बेहद घबाराया था कौन है आप तो समझ ही गये होंगे।

वास्तव में सेना कि इस कार्यवाही के बारे में जनरल चौधरी को एक दिन पहले ही ज्ञात हुआ था। शर्मा ने चौधरी को आगया दी थी  कि “अभी के अभी टुकड़ियों  को वापस बराक भेज दो”। सेना को तुरंत वापस भेज दिया गया लेकिन दिल्ली की आला कमान इतनी बौखलाई हुई थी की उनको विश्वास ही नहीं था की सेना वापस गयी है या नहीं। इसलिए दो घंटे बाद सरकार ने इंटलिजेन्स एजन्सी को निर्देश दिया कि वे हेलिकोप्टर भेजे और निरीक्षण करे की सेना अपनी बेस में वापस गयी की नहीं। वाह भाई मानना पड़ेगा  जनरल वी.के.सिंह को जो उन्होंने एक दिन के लिए ही सही दिल्ली के कमान के हॊश उड़ा दिये, उनके पसीने छुड़ा दिये।

जनरल वी.के. सिंह के देशप्रेम पर कॊई उंगली भी नहीं उठा सकता क्यों की आज हम अपने आँखों से देख रहे हैं की वे किस तरह विदेश में फंसे हमारे नागरिकों को बिना एक खरोंच के सही सलामत वापस ले आते हैं। कमांडो की ट्रेनिंग लेने वाले पहले आर्मी चीफ हैं वी.के.सिंह। 19 साल की उम्र में वी.के.सिंह राजपूत रेजिमेंट में शामिल होकर फौज में भर्ती हुए थे। सेना में आते ही 1971 में बांग्लादेश के युद्ध में जनरल सिंह ने अपनी दमदार पारी खेली थी। तीन पीढीयों से वी.के.सिंह का परिवार भारत माँ की सेवा में लगा हुआ है। वी.के.सिंह की ईमान्दारी और देश प्रेम पर कॊई सवाल उठा नहीं सकता।

काउंटर इन्सर्जन्सी ऑपरेशन और ऊंचाई पर दुश्मनों पर धावा बोलने की विद्या में महारत हासिल जनरल सिंह की प्रतिभा और ईमानदारी को मॊदी जी ने पहचाना और भाजपा सरकार में उन्हें सम्मिलित किया। हम सौभाग्यशाली है की आज जनरल वी.के.सिंह जैसे ईमानदार अफ़सर हमारे सरकार में देश की सेवा में अपना यॊगदान दे रहे हैं। ईमानदार और सच्चे लोगों के साथ कांग्रेस जैसे गद्दार पार्टियों का नहीं जमता इसीलिए उसने वी.के.सिंह को बदनाम करने की पूरी कॊशिश की लेकिन सच्चाई आपके सामने है।

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