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यूपी के दो अफसरों ने की थी सीबीआई के जज से लालू यादव की पैरवी ? जांच के आदेश

लखनऊ। चारा घोटाले में लालू यादव को साढ़े तीन साल कैद की सजा सुनाई जा चुकी है। इसके साथ ही उन पर पांच लाख रुपए का जुर्माना भी ठोंका गया है। लेकिन, जिस वक्‍त लालू यादव को सीबीआई की विशेष अदालत ने चारा घोटाले का दोषी ठहराया था उसी वक्‍त से उनके कुछ चाहने वाले रसूखदार लोग सक्रिय हो गए थे। कुछ लोगों ने तो रांची में सीबीआई की विशेष अदालत के जज शिवपाल सिंह को फोन तक कर दिया था। इस बात का खुलासा खुद सीबीआई की विशेष अदालत के जज ने ही किया था। अब पता चला है कि चारा घोटाले में जिन लोगों ने जज से लालू यादव के लिए पैरवी की थी उसमें यूपी के दो अफसर भी शामिल थे। इस मामले का खुलासा होने के बाद उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि यूपी के अफसरों ने वाकई फोन किए थे या फिर सिर्फ उनके नामों का इस्‍तेमाल किया गया।

दरअसल, लालू की पैरवी को लेकर जज के पास फोन आने से जस्टिस शिवपाल सिंह काफी खफा हो गए थे। उन्‍होंने भरी अदालत में लालू से कहा था कि कुछ लोग उनके लिए पैरवी वाले फोन कर रहे हैं। इस पर लालू का कहना था कि उन्‍हें इन सब के बारे में कुछ नहीं पता है। उन्‍होंने किसी को फोन करने को नहीं कहा था। लेकिन, अब इस मामले में काफी तूल पकड़ लिया है। लालू यादव पर अभी चारा घोटाले में कुछ और मुकदमें चल रहे हैं। जिसमें चाईबासा और दुमका ट्रेजरी के मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है। माना जा रहा है कि इस दोनों ही केस में सीबीआई की विशेष अदालत जनवरी के अंत या फिर फरवरी के शुरुआत में अपना फैसला सुना देगी। लेकिन, इस बीच लालू को लेकर जज को किए गए पैरवी वाले फोन से हड़कंप मचा हुआ है। खबरों के मुताबिक यूपी के एक कलेक्‍टर और एक एसडीएम ने सीबीआई की विशेष अदालत के जज शिवपाल सिंह से लालू की पैरवी की थी।

बताया जा रहा है कि इन दोनों ही अफसरों ने सीबीआई के जज शिवपाल सिंह से कहा था कि वो लालू यादव के पक्ष में अपना फैसला सुनाए। हालांकि यूपी के जिन दो अफसरों पर ये आरोप लगे हैं उन्‍होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। कलेक्‍टर का कहना है कि मैंने कभी भी अपने निजी नंबर या फिर आफिसियल नंबर से किसी भी जज को फोन नहीं किया। हालांकि वो ये जरुर मानते हैं कि एक जमीन के सिलसिले में उनकी सीबीआई के जज शिवपाल सिंह से मुलाकात जरुर हुई थी। लेकिन, वो मुलाकात सिर्फ जमीन विवाद तक ही सीमित थी। उसका लालू यादव के केस से कोई लेना देना नहीं है। इस बीच इस मामले में यूपी के दो अफसरों का नाम सामने आने के बाद उत्‍तर प्रदेश में योगी आदित्‍यनाथ की सरकार भी हरकत में आई गई है। योगी आदित्‍यनाथ ने इस पूरे मामले में जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

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जानकारी के मुताबिक इस हाईप्रोफाइल पैरवी की जांच का जिम्‍मा यूपी सरकार ने झांसी मंडल के कमिश्‍नर अमित गुप्‍ता को सौंपी है। बताया जा रहा है कि रांची में सीबीआई की विशेष अदालत के जज शिवपाल सिंह मूल रुप से उत्‍तर प्रदेश के जालौन के ही रहने वाले हैं। बहरहाल अब यूपी सरकार की जांच के बाद ही ये साफ हो सकेगा कि उत्‍तर प्रदेश के दो वरिष्‍ठ अफसरों ने लालू यादव के लिए जज को फोन किया था या नहीं। या फिर सिर्फ उनके नामों का इस्‍तेमाल हुआ। झांसी मंडल के कमिश्‍नर अमित गुप्‍ता इस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेंगे। जिसमें उन नंबरों की छानबीन की जाएगी जिस नंबर से सीबीआई की विशेष अदालत के जज शिवपाल सिंह को लालू यादव की पैरवी के लिए फोन किए गए थे। मामला सही पाए जाने पर यूपी के दोनों अफसरों पर गाज भी गिर सकती है।

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