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कांग्रेस के लिए आस्तीन का साँप साबित होगा जिग्नेश, दलितों पर अत्याचार का अंजाम भुगतेगी

गुजरात की राजनीति में मोदी और अमित शाह को उखाड़ फेकने की रणनीति में गुजरात के युवाओ को लेने से  कितना लाभ पार्टी को मिला, उसकी कितनी हानि हुई या होने वाली है- इस पर कांग्रेस को आत्ममंथन  करना होगा। जहां तक जिग्नेश मेवाणी का प्रश्न है वे दलित समुदाय से आते है और चुनाव जीतने के बाद जिस प्रकार दलितों के प्रति किये गए अत्याचार का बदला लेने की बात कर रहे है, निश्चित रूप से कांग्रेस के लिए घातक सिद्ध होने वाला है। आज़ादी के बाद से कांग्रेस द्वारा किये गए उत्पीड़न के घाव जब कुरेदें जाएंगे तो  कांग्रेस की असलियत सामने आते ही जिग्नेश और उसके साथ युवा दलितों का आकर्मण सीधे कांग्रेस पर ही होंगे। नेहरू गांधी परिवार के कारण डॉ भीमराव अंबेडकर को चुनाव हराना हो, जगजीवनराम को प्रधान मंत्री न बनाया जाना, सीताराम केसरी को अपमानित करना या किसी अन्य दलितों को किसी सम्मानजनक पद न बैठाना आदि बाते जिगनेश व उनकी युवा ब्रिग्रेड को  आक्रोशित करने वाली ही होंगी।

जिग्नेश की यह बातें कि गुजरात में मैंने भाजपा का घमंड तोड़ा, मेरा प्रोफाइल लगातार बढ़ रहा है और अब 2019 में मेरे से भाजपा को खतरा है इसीलिए वो मुझे टागरेट कर रहे हैं। यह डायलाग भाजपा या उसके वोट बैंक पर कोई असर नही डालने वाले है अलबत्ता कांग्रेस का वोट बैंक जरूर खसक कर अब दूसरी पार्टियों में या देश हित मे भाजपा की और खिसकेगा। जातीयता की राजनीति को जन्म देने वाली कांग्रेस अपने ही जाल में फंसती चली जा रही है।

जिग्नेश मेवाणी  अभी त्ती उत्साहित है। हो भी क्यो ना, प्रदेश की राजनीति के पहले पायदान पर कांग्रेस की बदौलत कदम रखा है। जिग्नेश का समाज जिस वर्ग से घृणा और नफरत फैलाने का प्रयास कर रहे है राहुल गांधी उसी वर्ग का लाभ पाने के लिए अब मुस्लिम को छोड़कर जनेऊधारी ब्राह्मण बन गए है। इसका प्रयाश्चित कराने जा काम भी जिग्नेश ही करायेंगे।

महाराष्ट्र में नए साल से ही जातीयता और देश विरिधि लोगो के साथ देश तोड़ने की जो कवायत जिग्नेश ने शुरू की है युवा होने का जिश कहे या उनकी मानसिकता। आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति का इतना उत्साहित होना उसी के समाज लिए घातक हो सकता है। महाराष्ट्र कांड पर जिग्नेश का मत है कि सरकार का रुख  ठीक नहीं है। जिस तरह से दलितों को टारगेट किया जा रहा है उससे मामला बिगड़ सकता है। जिग्नेश ने कहा कि मैं अपील करूंगा कि भले ही मुझे निशाना बनाया जा रहा है लेकिन कोई मेरे लिए कोई सड़कों पर ना उतरे, इससे कानून व्यवस्था की समस्या हो सकती है। साथ ही जिग्नेश ने मांग की कि भीमागांव में दलितों पर हमला करने वाले और हिंसा करने वालों पर भी सरकार कार्रवाई करे। जिग्नेश ने पीएम मोदी से सीधे कहा कि गुजरात और महाराष्ट में दलितों टारगेट किया जाना नहीं रुका तो 2019 में आपको मजा चखाएंगे।

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जहां तक महाराष्ट्र सरकर का वहां हुए कांड को लेकर कार्यवाही का प्रश्न है फर्नावडीज़ सरकार के कार्य की सभी द्वारा सराहना की जा रही है। सरकार और पुलिस दोनों ने सी संयम से काम न लिया होता  तो  स्थिति और बेकाबू हो जाती और तब मजबूरन सरकार को कोई कड़ा कदम उठाना पड़ता। निष्पक्ष जांच के लिए उच्च न्यायालय के पीठासीन अधिकारी से जांच कराने का निर्णय की भी, उपद्रवियों को छोड़कर अन्य सभी द्वारा उसे उचित माना जा रहा है।

जिग्नेश ने 9 जनवरी को दिल्ली में युवा हुंकार रैली का आयोजन किया है। उनके अनुसार ये सामाजिक न्याय के लिए होगी। उन्होंने कहा कि इस रैली के बाद मैं मनुस्मृति और संविधान लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय जाऊंगा और उनसे पूछूंगा कि देश किससे चलेगा। आपको बता दे कि भीमा कोरेगांव हिंसा में विधायक जिग्नेश मेवाणी पर सेक्शन 153(A), 505, 117 के तहत पुणे में एफआईआर दर्ज हुई है और उसके बाद से उन्हें फरार बतायबजा रहा है। अब देखना है कि हुंकार रैली में राहुल गांधी की भूमिका क्या रहती है, क्योकि काँग्रेसबका बहुत कुछ भविष्य अब जिग्नेश द्वारा किये जाने वाले कार्यो पर ही निर्भर रहेगा। राहुल गांधी ने जनेऊधारी बन कर सॉफ्ट हिंदुत्व का खेल खेला जो जिगनेश ने दलितों को संगठित करना शुरू किया।

इसमें एक कदम आगे बढ़ाकर बिहार के पूर्व मुख्य मंत्री एवं राजद प्रमुख ने जेल से ही चिठी लिख कर ,अपने ऊपर लगे भ्रस्टाचारो की आड़ में पिछड़े वर्गों को संगठित करने का काम शुरू कर दिया है। आपको बता दे कि भ्रस्टाचार की जांच में आरोप प्रमाणित होने पर लालू प्रसाद को साढ़े तीन साल की सज़ा और पांच लाख का जुर्माना लगाया गया है।

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