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बीजेपी सांसद सत्यपाल सिंह नियम तोड़ कर नहीं दे रहे फाइन

satyapalमुंबई। बीजेपी सांसद और मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर सत्यपाल सिंह ने सस्ते में मिली सरकारी जमीन पर बने फ्लैैट को किराए पर देने के मामले में कलेक्टर कार्यालय का 48,420 रुपये का दंड नहीं चुकाया है। सस्ती दरों पर दी गई सरकारी जमीन पर बने फ्लैट किराए पर देने से पहले कलेक्टर से इजाजत लेनी पड़ती है।

सत्यपाल सिंह का एक फ्लैट सरकारी अफसरों की ‘पाटलीपुत्र सहकारी सोसायटी’ में है। वास्तव में, सत्यपाल सिंह ने 28 दिसंबर 2013 को पत्र लिखकर अनुमति मांगी। इस पत्र के साथ लगे दस्तावेजों से उजागर हुआ कि वे पहले ही वर्ष से फ्लैट किराए पर दिए हुए हैं। कलेक्टर ने उन पर 52 हजार रुपये का दंड लगा दिया। हालांकि, 2 साल बीतने पर भी उन्होंने दंड की यह रकम नहीं चुकाई है।

सरकारी अफसरों की सोसायटियों के फ्लैटों का कागजात की पड़ताल के लिए आरटीआई एक्सपर्ट अनिल गलगली ने याचिका दायर की थी। पाटलीपुत्र, साईंप्रसाद, संगम जैसी सोसायटियों की दस फाइलें उनके निरीक्षण के लिए पेश की गईं। इसी में यह बात उजागर हुई कि सरकार से मिले आवासों में रह रहे अफसरों ने किफायती मूल्य पर मिले खुद के फ्लैट किराए पर उठा रखे हैं।

मौजूदा नियमों के तहत कलेक्टर से अनुमति लेकर ऐसा किया जा सकता है। कुछ हजार रुपये वसूलकर कलेक्टर कार्यालय अनुमति दे देता है। महाराष्ट्र के मुख्य सचिव स्वाधीन क्षत्रिय, सूचना आयुक्त अजित कुमार जैन, टॉप पुलिस अफसर हिमांशु रॉय, पूर्व बीएमसी कमिश्नर डॉ जयराज फाटक, भगवान सहाय, मीरा बोरवणकर, राजीव गायकवाड, वी एन देशमुख जैसे अफसरों ने इस तरह से अनुमति ली है।

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सत्यपाल सिंह ने 2013 में फ्लैट ‘लीव ऐंड लाइसेंस’ के तहत देने के लिए आवेदन किया था। इसके साथ 5,380 रुपये का चेक भी संलग्न था। डेप्युटी कलेक्टर ने कागजात की पड़ताल में पाया कि फ्लैट लगभग 10 साल से किराए पर उठा हुआ है। उन्होंने लगभग 52 हजार रुपये का बकाया आंका और 28 जनवरी 2015 को इसे भरने की नोटिस डॉ सिंह को भेज दिया। बचे हुए 48,420 रुपये चुकाए बिना वे फ्लैट ‘लीव ऐंड लाइसेंस’ पर नहीं दे सकेंगे, यह चेतावनी भी दी है। उपलब्ध कागजात में ये पैसे भरे जाने का उल्लेख नहीं है।

गलगली ने पद पर रहते हुए सरकारी आवास का लाभ उठाते हुए सरकारी रियायत पर बने दूसरे फ्लैट का किराया खाने पर आपत्ति दर्ज की है। उन्होंने मांग की है कि इस तरह की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। अनधिकृत तरीके से फ्लैट किराए पर उठाने वाले अफसरों पर कार्रवाई की मांग उन्होंने की है। उनका कहना है कि मुंबई में जिनके पास फ्लैट हैं, खास तौर पर सरकारी सहूलियत पर मिले फ्लैट, तो ऐसे लोगों को सरकारी मकान अलॉट नहीं करने चाहिए। दूसरे अधिकारियों को मकान मिल सकेंगे।

महाराष्ट्र के टॉप 50 आईएएस और आईएफएस अफसरों को 9 जुलाई 1999 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण राणे ने जमीन दी थी। बताते हैं कि अंधेरी-पश्चिम के चार बंगला चौराहे पर 5,666.27 मीटर जमीन अलॉट करने वाली फाइल बिजली की गति से दौड़ी थी। बिल्डिंग की निचली दो मंजिलें अफसरों ने मेगा-मॉल को किराए पर दे दी थीं। मौजूदा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में इसके खिलाफ आवाज उठाई थी, तब वे विपक्ष में थे। सत्तारूढ़ और विपक्षी विधायक इस मुद्दे पर इकट्ठा हो गए थे और मॉल को बंद करना पड़ा था।

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