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ट्रिपल तलाक बिल पर कांग्रेस पार्टी का असली चेहरा आया देश के सामने

नई दिल्ली। बुधवार को राज्‍यसभा में ट्रिपल तलाक के खिलाफ बिल पेश किया गया। भारतीय जनता पार्टी और मोदी सरकार को उम्‍मीद थी कि कांग्रेस पार्टी के समर्थन से मुस्लिम महिलाओं को उनका हक दिलाने वाला ये बिल पास हो जाएगा। लेकिन, कांग्रेस पार्टी समेत पूरे के पूरे विपक्ष ने इस पर पेंच फंसा दिया है। इसके साथ ही कांग्रेस पार्टी ने इस बिल पर अपना असली चेहरा भी दिखा है। बुधवार को राज्‍यसभा के भीतर ट्रिपल तलाक बिल के खिलाफ जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस पार्टी ने इस बिल को सिलेक्‍ट कमेटी के पास भेजने की मांग की। अरुण जेटली ने इस मौके पर कहा कि देश की जनता सबकुछ देख रही है। वो ये भी देख रही है कि किस तरह से ये बिल लोकसभा में आसानी से पास हो गया। लेकिन, राज्‍यसभा में इसे फंसाने की कोशिश की जा रही है।

अभी पिछले हफ्ते ही ट्रिपल तलाक को अपराधिक बताने वाले बिल को लोकसभा से पास किया गया था। दरसअल, लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बहुमत है। उसे किसी भी बिल को पास कराने के लिए विपक्ष का मुंह नहीं ताकना होता है। जबकि राज्‍यसभा में बीजपेी के पास बहुमत नहीं हैं। यहां पर उसे किसी भी बिल को पास कराने के लिए विपक्ष का समर्थन चाहिए ही होता है। लेकिन, कांग्रेस पार्टी ने अब ट्रिपल तलाक के खिलाफ डबल गेम खेलना शुरु कर दिया है। एक ओर वो ये दिखाने की कोशिश करती है वो इस बिल के समर्थन में है। लेकिन, दूसरी ओर वो इसका विरोध करने में जुटी हुई है। जाहिर है कांग्रेस पार्टी को ट्रिपल तलाक का ये विरोध आने वाले दिनों में बहुत भारी पड़ेगा।

हो सकता है कि ट्रिपल तलाक का विरोध करने पर उसे मुस्लिम पुरुषों का वोट मिल सके। लेकिन, कांग्रेस पार्टी को मुस्लिम महिलाओं का विरोध जरुर झेलना होगा। ये विरोध दूसरे दलो को भी झेलना होगा। दूसरी ओर ट्रिपल तलाक बिल को लेकर CPI, CPIM, DMK, AIADMK, BJD और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने राज्‍ससभा के सभाप‍ति से मुलाकात की। कांग्रेस पार्टी की तरह इन दलों ने भी बिल को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की। उधर, बीजेपी के नेता और केंद्रीय मंत्री मुख्‍तार अब्‍बास नकवी का कहना है कि कांग्रेस  पार्टी ट्रिपल तलाक को लेकर घनघोर कंफ्यूजन में है। इसीलिए वो इस पर मसले पर अपने किसी भी स्‍टैंड पर कायम नहीं है। पार्टी कहती कुछ है और करती कुछ है।

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वहीं राज्‍यसभा में ट्रिपल तलाक के खिलाफ बिल पेश होने के बाद केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने ट्रिपल तलाक के खिलाफ अपना फैसला सुनाया था। फैसला 3:2 के रेसियो से सुनाया गया था। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने ट्रिपल तलाक के खिलाफ केंद्र सरकार को छह महीने के भीतर कानून बनाने को कहा था। अरुण जेटली का कहना है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही ये बिल लेकर आई है। वहीं कांग्रेस पार्टी चाहती है कि इस बिल को स्‍क्रूटनी के लिए सिलेक्‍ट कमेटी या फिर स्‍टैंडिंग कमेटी के पास भेजा जाए। कांग्रेस नेता आनंद शर्मा का कहना है संसद में सिलेक्ट कमेटी और स्‍टैंडिंग कमेटी की व्यवस्था है, लिहाजा विधायिका की ये जिम्मेदारी है कि वो ट्रिपल तलाक के खिलाफ इस बिल को स्क्रूटिनी के लिए भेजे।

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