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राज्यसभा के लिए कौन हैं केजरीवाल की पसंद, किसको टिकट मिला और किसका पत्ता कटा?

नवीन गुप्ता और सुशील गुप्ता

नई दिल्ली। दिल्ली की तीन राज्यसभा सीटों पर आम आदमी पार्टी की ओर से उम्मीदवारों का नाम अब लगभग तय माना जा रहा है. जो तीन चेहरे आम आदमी पार्टी की ओर से पहली बार राज्यसभा का रास्ता देखेंगे उनके नामों की औपचारिक घोषणा कल पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर होने वाली पार्टी की सर्वोच्च इकाई पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी यानी पीएसी की बैठक में होगी. आम आदमी पार्टी की ओर से राज्यसभा भेजे जाने के लिए कई चेहरों पर चर्चा हो रही थी. पार्टी के भीतर और बाहर से विशेषज्ञों के नाम पर मंथन चलता रहा. इस मंथन पर ‘आज तक’ की नजर लगातार बनी हुई थी. आइए यह जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर दिल्ली की इन तीन राज्यसभा सीटों पर कौन है केजरीवाल की पसंद? नजर डालते हैं कि आखिर किसको मिलेगा संसद का टिकट और किसका टिकट मिलते-मिलते कट गया.

1. आम आदमी पार्टी की ओर से 3 राज्य सभा उम्मीदवारों की सूची में पहला नाम पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह का है. सुल्तानपुर के रहने वाले संजय सिंह 16 साल से बतौर सामाजिक कार्यकर्ता एक्टिव रहे. आरटीआई से लेकर स्वराज और फिर अन्ना आंदोलन तक केजरीवाल का साया बने रहे. 2013 में दिल्ली विधानसभा, 2014 में लोकसभा, 2015 में दिल्ली की दोबारा विधानसभा और 2017 में पंजाब के विधानसभा चुनाव में संजय सिंह ने अहम भूमिका निभाई. पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान तो संजय सिंह ने लगभग पूरे 1 साल के लिए पंजाब में ही बोरा बिस्तरा डाल लिया था. केजरीवाल ने संजय सिंह को उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी और हाल ही के निगम चुनाव में संजय सिंह ने लगभग 50 सीटें जीतकर उत्तर प्रदेश में पार्टी का राजनीतिक खाता खोल दिया. हालांकि संजय सिंह पर पैसे लेकर टिकट बांटने का भी आरोप लगा, लेकिन केजरीवाल तक इन आरोपों के सबूत नहीं पहुंचे. संजय सिंह की उम्मीदवारी पर पार्टी के निचले कार्यकर्ताओं से ऊपरी स्तर के नेताओं तक में सहमति है. संजय सिंह का पार्टी में लगातार सक्रिय रहना की एक बड़ी वजह है, जिसके चलते उन्हें राज्यसभा का टिकट मिलने वाला है.

2. आम आदमी पार्टी की ओर से राज्यसभा जाने वाले दूसरे चेहरे का नाम नवीन गुप्ता है. यह नाम पार्टी में इसके पहले कभी किसी ने नहीं सुना. नवीन गुप्ता पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट है और इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया के वाइस चेयरमैन हैं. पार्टी के सूत्रों का कहना है कि पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट नवीन गुप्ता को अर्थशास्त्र की बेहतर समझ है, जिससे वे राज्य सभा में केंद्र सरकार को आर्थिक नीतियों पर घेर सकते हैं. इतना ही नहीं नवीन गुप्ता आम आदमी पार्टी के लिए दूसरे राज्यों के विधानसभा चुनाव के दौरान फंडिंग में भी एक अहम भूमिका निभा सकते हैं. दरसल पार्टी के सूत्रों का दावा था कि केजरीवाल राज्यसभा में आर्थिक जगत से किसी जानकार को भेजना चाहते हैं और जिसके लिए पार्टी की सबसे पहली पसंद पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन थे. रघुराम राजन समेत कई नामी-गिरामी लोगों ने केजरीवाल का प्रस्ताव ठुकरा दिया था और इसके बाद पार्टी ने जमीन पर काम कर रहे विशेषज्ञों को तलाशना शुरू कर दिया.

3. राज्यसभा की उम्मीदवारी में तीसरा मशहूर नाम कारोबारी सुशील गुप्ता का है. किसी जमाने में कांग्रेस की विचारधारा से जुड़े रहे सुशील गुप्ता स्कूल कॉलेज और अस्पताल चलाने के साथ समाज सेवा भी करते हैं. सुशील गुप्ता केजरीवाल के समर्थक रहे हैं और समाज में एक साफ छवि रखते हैं. हालांकि पार्टी सूत्रों के मुताबिक सुशील गुप्ता के नाम पर चर्चा भले ही सबसे ज्यादा हो, लेकिन अभी तक पार्टी के सभी नेताओं के बीच सहमति नहीं बन पाई है. ऐसे में पूरी संभावना है कि जब 3 तारीख को केजरीवाल के घर पर पीएसी की बैठक होगी तो विरोध के चलते ही सुशील गुप्ता का टिकट कट जाए.

4. राज्यसभा के लिए सामने आए इन 3 नामों के अलावा पार्टी में राज्यसभा जाने के लिए जो बड़े दावेदार थे, उनमें से एक नाम पार्टी के नेता और पूर्व पत्रकार आशुतोष का है. 2014 में लोकसभा चुनाव के ठीक पहले पार्टी से जुड़ने वाले आशुतोष, अरविंद केजरीवाल के बेहद करीबी हैं और गोवा विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी की कमान संभाल चुके हैं. आशुतोष फिलहाल संजय सिंह के साथ दूसरे राज्यों में संगठन की जिम्मेदारी देख रहे हैं. आशुतोष को राज्यसभा टिकट ना मिलने के पीछे एक बड़ा कारण कुमार विश्वास हैं. संजय सिंह के अलावा अगर केजरीवाल अपने करीबी आशुतोष को भी राज्यसभा भेजते तो ऐसे में उन पर तीसरे बड़े नेता कुमार विश्वास को भी टिकट देने का दबाव बढ़ जाता और इसीलिए पार्टी ने अब भीतर से एक नेता और बाहर से 2 लोगों को टिकट देने का मन बनाया.

5. राज्यसभा के इस द्वंद्व में सबसे ज्यादा नुकसान जिसका हुआ है, वह पार्टी के तीसरे बड़े नेता और फिलहाल किनारे चल रहे कवि कुमार विश्वास हैं. केजरीवाल के अविश्वास ने कुमार के राज्यसभा जाने के मंसूबे पर पानी फेर दिया. पार्टी का आला नेतृत्व मानता है कि अमानत उल्लाह खान और कपिल मिश्रा एपिसोड के दौरान कुमार विश्वास ने पार्टी में तख्तापलट करने की ना सिर्फ कोशिश की, बल्कि साजिश भी रची. इतना ही नहीं कुमार विश्वास अक्सर अलग-अलग मंचों से हाल के दिनों में पार्टी के नेतृत्व और कार्य करने की शैली पर ना सिर्फ सवाल उठाते रहे हैं बल्कि कड़ी शब्दों में आलोचना भी करते रहे हैं. जिस अरविंद केजरीवाल के चेहरे पर आम आदमी पार्टी टिकी है, कुमार विश्वास पार्टी अब उसी चेहरे से दूर होकर बैक टू बेसिक जैसे जुमलों पर जाने की नसीहत देते रहे हैं. इस तरह कुमार पर अविश्वास के चलते संसद के ऊपरी सदन में जाने की उनकी मंशा के साथ उनका टिकट भी पानी में चला गया.

रघुराम राजन थे केजरीवाल की पहली पसंद

अब बात उन चेहरों की जो इस बीच राज्यसभा में भेजे जाने के लिए आम आदमी पार्टी नेताओं के बीच चर्चा में बने रहे. सबसे पहला नाम पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन का आया. केजरीवाल चाहते थे कि राजन राज्यसभा में जाएं और जब वहां आर्थिक मुद्दों पर सरकार को मुंह तोड़ जवाब दें. लेकिन रघुराम राजन ने केजरीवाल के प्रस्ताव को ठुकरा दिया.

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पूर्व चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर से भी की गई बात

आम आदमी पार्टी की ओर से दूसरा बड़ा नाम चर्चा में आया पूर्व मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर का. सूत्र बताते हैं कि खुद केजरीवाल ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर से मिलकर उन्हें राज्यसभा जाने के लिए निवेदन किया. जस्टिस टीएस ठाकुर बतौर मुख्य न्यायाधीश केंद्र सरकार के खिलाफ काफी आलोचनात्मक टिप्पणियां कर चुके हैं. टीएस ठाकुर ने भी केजरीवाल की ओर से दिए गए राजनीतिक एंट्री के प्रस्ताव को ठुकरा दिया.

यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी पर चर्चा

इसके अलावा आम आदमी पार्टी जिन दो चेहरों पर विचार कर रही थी, उनमें पूर्व वित्त मंत्री और बीजेपी के बागी नेता यशवंत सिन्हा के साथ पूर्व पत्रकार अरुण शौरी का नाम भी सामने आया. जब बड़े चेहरों पर बात नहीं बनी तो केजरीवाल ने पार्टी के भीतर के नेताओं पर चर्चा शुरू की और साथ ही पार्टी के बाहर जमीनी स्तर पर काम कर रहे विशेषज्ञों पर चर्चा होने लगी.

पार्टी पर दबाव बना रहे विश्वास के समर्थक

यह कयास भले ही अपने आखिरी चरण में हो, लेकिन औपचारिक ऐलान केजरीवाल के घर पर होने वाली पीएसी की बैठक में ही होगा. दिलचस्प यह होगा कि पार्टी से किनारे चल रहे या यूं कहें कि केजरीवाल से भी लगभग खफा चल रहे कुमार विश्वास और उनके समर्थक क्या करेंगे जब औपचारिक घोषणा में भी विश्वास का टिकट कट जाएगा. सोशल मीडिया पर पिछले दो-तीन दिनों से कुमार विश्वास के समर्थक पार्टी के नेतृत्व पर उन्हें राज्यसभा भेजे जाने का दबाव बना रहे हैं. महत्वकांक्षा की लड़ाई अब अपने चरम पर है.

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