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बड़े बिजनेस घराने को बचाने के लिए पीएमओ से गायब हो गई घोटाले की फाइल, BJP सांसद का हाथ

नई दिल्ली। घोटाले का दाग अगर देश के बड़े बिजनेस ग्रुप बिरला की हिंडाल्को कंपनी पर लगे तो फाइल पीएमओ से भी गायब हो सकती है। जी हां ऐसा ही मामला सामने आया है।  यह घोटाला बिरला ग्रुप (BIRLA GROUP) की हिंडाल्को (HINDALCO) समेत कुछ कंपनियों से संबंधित है।  जिस अधिकारी ने इस घोटाले की जांच कर पीएमओ को रिपोर्ट भेजी थी, उसी अफसर की आरटीआई से खुलासा हुआ है कि घोटाले की जांच से जुड़े दस्तावेज अब पीएमओ में नहीं है।

देखिए वीडियो-

इस अफसर ने खोला घोटाला तो कर दिया ट्रांसफर

जेएनयू के स्टूडेंट पवन कुमार बतौर लेबर इन्फोर्समेंट अफसर 2006 में श्रम विभाग में तैनात हुए। 2015 में रांची पोस्टिंग के दौरान पीएमओ के कहने पर उन्होंने न्यूनतम मजदूरी और रिटायर्ड इम्प्लाॅई के ग्रेच्युटी में धांधली की जांच की। इसकी रिपोर्ट उन्होंने पीएमओ को सौंपी। रिपोर्ट में यह लिखा था कि धनबाद में बॉक्साइट माइन करने वाली बिरला ग्रुप से जुड़ी हिंडाल्को इंडस्ट्री समेत कुछ कंपनियां मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी नहीं दे रही। कुल मिलाकर 6 करोड़ की सीधी गड़बड़ी थी। अक्टूबर में पवन ये पीएमओ को रिपोर्ट दी, उसके बाद दिसंबर में पीएओ को पत्र लिख कर इस मामले की हाई लेवल जांच की गुजारिश की थी।

दैनिक भाष्कर की रिपोर्ट के मुताबिक लेबर इन्फोर्समेंट अफसर पवन कुमार ने रांची में अपनी पदस्थापना के दौरान बिरला ग्रुप की हिंडाल्को समेत कुछ कंपनियों में 6 करोड़ के ग्रेच्युटी स्कैंडल को उजागर किया था। इस मामले की रिपोर्ट बदलने के लिए अफसर पर जानलेवा हमला हुआ। पहले तो उसके खिलाफ एक फर्जी मुकदमा दर्ज कराया गया और अब उसकी ड्यूटी चेन्नई में बिजली पानी के बिल जमा करने के लिए लगा दी गई है। अफसर के मुताबिक रांची के बीजपी सांसद राम टहल चौधरी, कांग्रेस के दाे राज्यसभा सांसद, प्रदीप बालमुचु और धीरज साहू ने तत्कालीन श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय को उनके तबादले करने के लिए पत्र लिख दिया। 15 जनवरी 16 को पवन का तबादला चेन्नई कर दिया। 

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चौंकाने वाली दूसरी बात यह भी है कि 28 दिसम्बर 2017 की सुबह इस मामले का खुलासा हुआ और रात 10:40 बजे तक पीएमओ की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। पत्र सूचना कार्यालय भारत सरकार द्वारा बताया गया है कि आज पीएमओ की तरफ से कोई रिलीज जारी नहीं किया गया। उसके बाद उसका ट्रांसफर करा दिया गया। तबादले के इस खेल में भाजपा और कांग्रेस दोनों शामिल हैं। इस सब के बीच ना तो उस स्कैंडल पर कोई एक्शन लिया गया जिसकी रिपोर्ट उसने पीएमओ को सौंपी थी, और ना ही उस शिकायत पर जिसमें उसने पीएमओ से ही लेबर के इंटरनल करप्शन के जांच की मांग की थी।

आरटीआई में जब पूछा तो पता चला कि जो डॉक्यूमेंट उन्होंने पीएमओ को सबमिट किए थे, वह कहीं गुम हो गए हैं। इसलिए, ढाई साल पुराना यह मामला पिछले महीने ही बंद कर दिया। अब उसे कोर्ट से इंसाफ की उम्मीद है।

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