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गुजरात में बीजेपी ने लगाया शतक, 99 के फेर से निकली पार्टी

अहमदाबाद। सोचिए कोई बल्लेबाज 99 रन पर आउट हो जाए और शतक से चूक जाए तो उसे कैसा लगता होगा, उसे हमेशा इस बात का अफसोस रहता होगा कि वो एक रन और बना लेता तो उसकी संचुरी पूरी हो जाती, आंकड़ों की नजर में सैकड़े का अलग ही महत्व है। गुजरात में बीजेपी भी इसी तरह से महसूस कर रही होगी, जहां पर उसे 99 सीटों पर जनता ने रोक दिया, शतक से चुकी भाजपा पर विरोधियों का हमला शुरू हो गया, कहा जाने लगा कि भाजपा को राज्य की जनता ने नकार दिया, ये कांग्रेस की नैतिक जीत है. सवाल इस बात का नहीं है कि सरकार भाजपा की बन रही है। सवाल ये है कि 99 सीटों पर आकर कारवां रुक गया। ये कसक पार्टी नेताओं को भी महसूस हो रही थी, लेकिन अब ये दर्द दूर हो गया है।

बीजेपी ने गुजरात में सीटों की सेंचुरी लगा ली है। जो नतीजे आए थे उनके मुताबिक 182 में से भाजपा को 99 सीटें मिली थी, लेकिन अब ये आंकड़ा 100 पर आ गया है. निर्दलीय विधायक रतन सिंह राठौड़ ने बीजेपी को समर्थन देने का फैसला कर लिया है। लुनावड़ा से विधायक रतन सिंह के समर्थन के बाद भाजपा ने सीटों का शतक पूरा कर लिया है। इसी के साथ विधानसभा में भाजपा की स्थिति और मजबूत हो गई है। रतन सिंह ने राज्यपाल ओपी कोहली को पत्र लिख कर भाजपा को समर्थन देने का एलान किया है। अब जाकर भाजपा नेताओं का दर्द दूर हुआ होगा, विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी फिर से 100 के आंकड़े पर आ गई है।

आपको थोड़ी जानकारी रतन सिंह राठौड़ के बारे में भी दे देते हैं, दरअसल इस बार कांग्रेस ने रतन सिंह को टिकट नहीं दियाी था। लुनावड़ा विधानसभा क्षेत्र ने रतन सिंह ने बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ा था, और वो विजय हुए थे। कांग्रेस ने रतन सिंह राठौड़ को छह साल के लिए पार्टी से सस्पेंड कर कर रखा है। लेकिन अब रतन सिंह ने भाजपा को समर्थन देने का फैसला करके कांग्रेस से अपना बदला ले लिया है। इस बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा को अब तक सबसे कम सीटें मिली हैं. पिछले 22 सालों से सत्ता चला रही भाजपा को 99 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं कांग्रेस और सहयोगी दलों को 80 सीटें मिली थी, 22 साल में ये पहला मौका था जब बीजेपी 100 के नीचे सिमट गई है।

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गुजरात में सीटों का शतक पूरा करने के बाद भाजपा के सामने मुख्यमंत्री के चयन को लेकर मुश्किल खड़ी हो रही है। बताया जा रहा है कि शुक्रवार को ही मुख्यमंत्री के नाम का एलान किया जा सकता है। माना जा रहा है कि विजय रुपाणी को फिर से सीएम पद की जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि ये भी कयास लगाए जा रहे हैं कि दिल्ली से इस बारे में फैसला किया जाएगा कि अगला सीएम कौन होगा। अब देखना है कि भाजपा किस को ये अहम जिम्मेदारी देती है. जिसे भी सीएम बनाया जाएगा उसके सामने कई तरह की चुनौतियां होगीं, सबसे पहली चुनौती तो ये होगी कि वो राज्य में पार्टी के खोए जनाधार को फिर से वापस हासिल करे।

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