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‘बेदाग’ राजा बोले, संचार क्रांति लाने का श्रेय देने की बजाए मुझे अपराधी बना दिया

नई दिल्ली। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में सारे आरोपी बेदाग निकल गए, जबकि 2010 में देश के महालेखाकार और नियंत्रक (सीएजी) ने अपनी एक रिपोर्ट में सरकारी खजाने को 1 लाख 76 हजार करोड़ रुपए का नुकसान का आकलन किया था, लेकिन मामला सामने आने के 7 साल बाद आए फैसले में सभी दागी बेदाग निकल गए.

घोटाले के सबसे बड़े आरोपी तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा भी दोषमुक्त करार दिए गए हैं. बेदाग करार दिए जाने के बाद उन्होंने जारी बयान में भारत की न्याय व्यवस्था का आभार जताया और कहा कि न्याय प्रणाली पर उनका विश्वास मजबूत हुआ है. उन्होंने खुद के बेदाग बताते हुए कहा कि अपने कार्यकाल में आम जनता की भलाई के लिए कई कार्य किए. वायरलेस व्यवस्था को सस्ता बनाने की कोशिश की.

उन्होंने दावा किया कि संचार क्रांति उनके कार्यकाल में आई, लेकिन इसे भुला दिया गया और उसे इसका श्रेय दिए जाने के बजाए एक अपराधी बना दिया गया. बतौर वकील और सार्वजनिक जीवन में उनका न्यायिक व्यवस्था पर गहरा विश्वास है और पूरी जांच के दौरान अपना सहयोग दिया. उन्होंने कहा, “सुनवाई के दौरान अपने स्तर पर कभी भी इसे स्थगित नहीं होने दिया. मैं हमेशा साहस के साथ लड़ा और सीबीआई की ओर से पूछे गए सवालों का जवाब पूरे सबूत के साथ दिया.”

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उन्होंने अपनी पार्टी डीएमके का धन्यवाद किया जिसने उन पर विश्वास बनाए रखा. साथ ही सुनवाई के दौरान 15 महीने तक जेल में रहने के दौरान अपने सभी शुभचिंतकों का धन्यवाद किया.

2जी स्पेक्ट्रम आवंटन पर 2010 में पहली बार सवाल तब उठा जब देश के महालेखाकार और नियंत्रक (सीएजी) ने अपनी एक रिपोर्ट में इस स्पेक्ट्रम आवंटन से केन्द्र सरकार के खजाने को नुकसान पहुंचने की बात कही. सीएजी रिपोर्ट में कहा गया कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में कंपनियों को नीलामी की बजाए पहले आओ और पहले पाओ की नीति पर स्पेक्ट्रम दिया गया जिसके चलते सरकारी खजाने को 1 लाख 76 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. हालांकि सीबीआई स्पेशल कोर्ट में अभियोजन पक्ष की तरफ से कहा गया कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन से केन्द्र सरकार को लगभग 31 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था.

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