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विपक्ष ने यूपीकोका को ही बता डाला मुस्लिम विरोधी

लखनऊ। खुद को धर्मनिरपेक्ष बताने वाले ज्‍यादातर संगठन और राजनैतिक पार्टियों सिर्फ मुसलमानों के नाम पर ही राजनीति करती हैं। उन्‍हें लगता है कि ऐसा करके वो धर्म निरपेक्ष साबित हो जाएंगे। जबकि ये सबसे बड़ा सांप्रदायिक खेल है। यूपी में एक बार फिर बीजेपी विरोधी दलों की ओर से सांप्रदायिकता का कार्ड खेला गया है। सांप्रदायिक राजनीति की चक्‍कर में यूपी के सियासी दल देश की सुरक्षा को भी दांव पर लगाने से गुरेज नहीं कर रहे हैं। उत्‍तर प्रदेश में योगी आदित्‍यनाथ की सरकार मकोका की तर्ज पर यूपीकोका कानून लागू करना चाहती है। ताकि आतंकी गतिविधियों और दूसरे संगीन अपराधों में शामिल अपराधियों को कड़ी सजा मिल सके। लेकिन, विपक्षी दलों को यूपीकोका कानून मुस्लिम विरोधी नजर आ रहा है।

उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश में संगठित अपराध पर नकेल कसना चाहते हैं। इसीलिए उन्‍होंने राज्य में यूपीकोका जैसे सख्त कानून को लाने का फैसला किया है। यूपीकोका के प्रस्‍तावित कानून के अंडरवर्ल्‍ड से जुड़ी गतिविधियों के अलावा, जबरन वसूली, जमीनों पर कब्‍जे, तस्‍करी, अपहरण, धमकी, फिरौती और वेश्यावृत्ति जैसे संगीन अपराधों को शामिल किया जाएगा। यूपी के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभी बुधवार को ही विधानसभा में यूपीकोका यानी उत्तर प्रदेश कंट्रोल ऑफ आर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट को बिल पेश किया। यूपी देश का दूसरा ऐसा राज्‍य है जहां पर ये सख्‍त कानून लागू होने जा रहा है। इससे पहले महाराष्‍ट्र में ये कानून मकोका के नाम से अपराधियों पर लगाम लगा रहा है।

ऐसा  नहीं है कि योगी आदित्‍यनाथ ने ही इस कानून को लाने की पहल की हो। इससे पहले बीएसपी सुप्रीमो भी यूपीकोका को लाने की कोशिश कर चुकी हैं। लेकिन, उस वक्‍त भी विपक्ष के विरोध के चलते इस बिल को पास नहीं होने दिया गया। अब योगी आदित्‍यनाथ की सरकार में यूपीकोका को विपक्ष मुस्लिम विरोधी बताने में जुट गया है। समाजवादी पार्टी समेत दूसरे विरोधी दलों ने यूपीकोका का विरोध करते हुए यूपी सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। मुस्लिम संगठन भी इस कानून के विरोध में हैं। योगी आदित्‍यनाथ की सरकार पर ये आरोप लगाया जा रहा है कि इस बिल को खास समुदाय को टारगेट कर बनाया गया है। अब ये सोचने वाली बात है कि क्‍या अंडरवर्ल्‍ड में हिंदू-मुस्लिम हो सकता है। क्‍या अपहरण और फिरौती मांगने वाले किसी बदमाश की खास जाति होती है।

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ऐसा हरगिज नहीं है। लेकिन, यूपी में डर्टी पॉलिटिक्‍स के आदी विपक्ष ने इस पर हंगामा शुरु कर दिया है। सरकार का स्‍पष्‍ट तौर पर कहना है कि वो यूपीकोका यानी उत्तर प्रदेश कंट्रोल ऑफ आर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट के तहत संगठित अपराध पर लगाम लगाना चाहता है। जिसमें इस कानून के तहत गिरफ़्तार बदमाश को 6 महीने से पहले ज़मानत नहीं मिले सकेगी। इतना ही नहीं आरोपी को इस कानून के तहत तीस दिनों की रिमांड पर रखा जा सकता है। जबकि दूसरे मामलों में आरोपी की रिमांड सिर्फ 14 दिन ही हो सकती है। इस अपराध में दोषी पाए गए व्‍यक्ति को पांच साल कैद की सजा के साथ साथ अधिकतम फांसी की सजा तक सुनाई जा सकती है। लेकिन, विपक्ष अभी से अपराधियों को बचाने में जुट गया है। जो निहायत की शर्मनाक है।

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