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वाह, इसे कहते हैं योगी राज ! आईएएस अफसरों के जलसे में नहीं परोसा गया मांसाहार

लखनऊ। लोगों के खानपान को भी तीखी बहस का मुद्दा बनाकर ध्रुवीकरण करके वोट ले लेने वाली बीजेपी के मांसाहार पर दो चेहरे दिखते हैं. गोवा में सरकार चला रही बीजेपी सदन में कहती है राज्य में बीफ यानि गो मांस की कमी नहीं है, जबकि उत्तर प्रदेश में इसी पार्टी की सरकार जब आईएएस सप्ताह समारोह का आयोजन करती है तो लंच और डिनर की प्लेट से मीट, मुर्गा और मछली भी गायब मिलते हैं

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गुरुवार को सालाना आईएएस सप्ताह की शुरुआत हुई. मौज मस्ती. नाच गाने, मिलने-मिलाने के बीच लंच और डिनर के वक्त अफसरों के चेहरे लटक गए जब उन्हें पता चला कि मेन्यू में शाही पनीर, कोफ्ता , दाल मखनी शाही  कोफ्ता , दाल  मखनी , पनीर  टिक्का , फ्राइड  राइस , हांड़ी  पनीर , गुलाब  जामुन, गाजर  का  हलवा तो है लेकिन मटन, चिकेन और मछली सिरे से गायब है.

समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक पता चला ऐसा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पसंद- नापसंद का ख्याल रखते हुए किया गया है.

मायावती के 2007  से 2012 के शासन काल को छोड़ कर यह सालाना आयोजन प्रदेश के आईएएस अधिकारियों और  सरकार के बीच अनौपचारिक किस्म की मेल मुलाकात का एक मौका रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समय तो खाने में लज़ीज़ अवधी मांसाहारी चीज़ें शामिल रहती थी.

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अखिलेश यादव आईएएस अफसरों के साथ क्रिकेट भी खेला करते थे और कबाब – बिरयानी की  दावतों का लुत्फ़ भी उठाते थे. योगी आदित्य नाथ के शासन में शुरुआत फलाहार से हुई और अब कम से कम सरकारी दावतों में तो मांसाहार न परोसने का सिलसिला चल निकला है.

उधर गोवा में जब कांग्रेस के एक विधायक फ्रांसिस्को सिल्वेरा ने विधानसभा में मनोहर पर्रिकर के नेतृत्व वाली सरकार से पूछा कि सरकार क्या यह सुनिश्चित करेगेगी की राज्य में बीफ की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी, तब राज्य के  पशु पालन मंत्री मॉविन गोडिन्हो ने शुक्रवार को अपने जवाब में उन्हें आश्वस्त किया कि राज्य में गोमांस की कोई कमी नहीं है.

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