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मुलायम के चहेते सपा सरकार में मंत्री रहे गायत्री के कब्जे वाली सरकारी जमीन पर चला बुलडोजर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति द्वारा कब्जा की गयी करीब 2 बीघा सरकारी जमीन पर आज बुलडोजर चल गया. जिलाधिकारी योगेश कुमार के निर्देश पर गायत्री प्रजापति द्वारा सरकारी जमीन पर किये गये कब्जे पर सरकारी बुलडोजर चलने के बाद अखिलेश सरकार में मुलायम के चहेते रहे इस गायत्री पर अब शिकंजा और कस गया है. हालांकि गायत्री प्रजापति के समर्थकों ने इस कारर्वाई का ठीकरा अमेठी की विधायक के पुत्र के सिर पर फोड़ते हुए इसे एक साजिश करार दिया है।

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मीडिया में आ रही ख़बरों के अनुसार आज जब गायत्री के इस अवैध कब्जे वाली जगह से कब्ज़ा हटाने के लिए भारी पुलिस फोर्स के साथ प्रशासनिक अफसरों का अमला लगा था. पूरी तैयारी के साथ पहुंचे दस्ते ने सरकारी जमीन को गायत्री के कब्जे से मुक्त करा लिया.   ज्ञात हो जेल में बंद सपा सरकार के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति की अमेठी के आवास विकास क्षेत्र में करोड़ों की कोठी खड़ी है तो वहीं लाखों रुपए का आफिस भी मौजूद है। आरोप है कि आफिस के एरिये से सटी क़रीब 2 बीघे सरकारी तालाब की ज़मीन को सत्ता की हनक दिखा कर गायत्री ने कब्जा कर रखा था। इस बात की शिकायत पूर्व में भी हुई लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बीती मार्च में योगी सरकार आने के बाद शिकायत फिर हुई तो 2 से 3 बार प्रशासनिक अधिकारी मौके पर गये। नोटिस जारी हुई लेकिन कब्जा नहीं हटा। नतीजतन गुरुवार को डीएम के निर्देश पर एसडीएम अमेठी और सीओ अमेठी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और बुलडोजर से तालाब की जमीन पर बनाई बाउंड्री को प्रशासन ने गिरवा दिया।कारर्वाई से शासन द्वारा कसे गये इस शिकंजे के बाद गायत्री समर्थकों में खासी नाराजगी है। इस संदर्भ में गायत्री के प्रतिनिधि विजय पाल उपाध्याय ने प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई को सत्ता के दबाव में उठाया गया कदम बताया है। उन्होंने कहा कि दरअसल प्रशासन अमेठी विधायक गरिमा सिंह के पुत्र (प्रतिनिधि) अनंत विक्रम सिंह की शह पर ये सब कुछ कर रहा है, ये उन्हीं की चाल है।  जबकि इस पूरे मामले पर अमेठी के जिलाधिकारी योगेश कुमार का कहना है कि दो-तीन बार हमारे अधिकारी मौके पर गये तो बताया कि ये बैनामे की ज़मीन है लेकिन कागजी परीक्षण में ये दावा झूठा निकला तो उन्हें लिखित नोटिस जारी हुई। निर्धारित समय अवधि पूरा होने के बाद भी कब्जा न हटाने की दशा में प्रशासन को यह क़दम उठाना पड़ा।

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