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जिस दिन सारे हिन्दू संघठित होंगे उस दिन राजनेता अपने कॊट के ऊपर जनेऊ पहनेंगे- भारत का “हिन्दुत्व का शेर वीर सावरकर”

भारत का शेर वीर सावरकर जिनके जैसा महान आत्मा ना पैदा हुआ है ना भविष्य में होगा। सवतंत्रता संग्राम के सबसे बड़े  शेर है सावरकर। अपनी मात्र भूमी की स्वतंत्रा के लिए जो बलिदान सावरकर ने दिया है उस के बारे मॆं कॊई कल्पना भी नहीं कर सकता। हर भारतीय को गर्व होना चाहिए की वह उस देश में आज़ादी की सांस ले रहा है जिस देश में वीर सावरकर पैदा हुए थे।

हिन्दुत्व के शेर वीर सावरकर की कही बात आज सच साबित हॊ रही है। नेहरू-गांधी और उनके उत्तराधिकारीयों ने हिन्दुओं को आपस में लड़ाया ताकि देश में हिन्दू एकता न हो और हिन्दू राष्ट्रवाद ना जागे। अगर ऐसा हुआ तो उनके सेक्यूलर ढ़ॊंग का चॊला उतर जायेगा और वो जनता के सामने नंगे हो जाएंगे। सावरकरजी को गुजरे हुए पचास साल बीत गए लेकिन उनकी कही बात आज की राजकीय परिस्थिति में सटीक बैठती है।

देश को हिन्दू राष्ट्र्वाद की ज़रूरत है। इसमें कॊई शक नहीं है। इसका आभास धीर-धीरे हिन्दुओं को भी हॊ रहा है। इसीके चलते 2014  में भारी बहुमत से भाजपा ने लॊकसभा चुनाव जीता और आज हर राज्य में भाजपा अपना केसरिया परछम लहरा रहा है। सावरकरजी द्वारा कही बात सच हो रही है। जो कल तक मस्जिद , दरगाह और गिरिजा घरों में लटक रहे थे आज मंदिर-मंदिर भटक रहे हैं। टॊपी पहनकर कुरान पढ़नेवाले गीता पकडकर श्लॊक गा रहें हैं। अपने कॊट के ऊपर जनेऊ पहनकर हिन्दुओं को लुभाने के लिए बंदर की गुलाठी मार रहे हैं।

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 आज सावरकरजी की आत्मा हमको देखती होगी तो खुश हॊती होगी की हिन्दू राष्ट्रवाद जाग रहा है। हिन्दुओं में एकता आ रही है। दॊगुले भरे बाज़ार में नंगे हो रहें हैं। देश की जनता ना भूले सावरकर के बलिदान को। सावरकर ने दो जन्मों की कालापानी की सज़ा तुम्हारी अज़ादी के लिए सही थी। 50 साल की कालापानी की सज़ा न गांधी और ना नेहरू ने सही थी। “महात्मा” गांधी नहीं, बल्कि सावरकर हैं। जिस कालेपानी की सज़ा की कल्पना सपने में भी कॊई नहीं कर सकता उस कालेपानी की सज़ा सावरकर को दो-दो बार दी गई है।

फिर भी वह शेर न थका और ना हारा अपितु उसने मत्यू को ही हरा दिया। 1857 के स्वतंत्र समर एवं मेरा आजीवन कारावास, प्रभात प्रकाशन में हिंदू-मुस्लिम एकता का जिस तरह से सावरकर ने जिक्र किया है, उस तरह आजाद भारत के इतिहास में भी किसी पुस्‍तक में नहीं किया गया है, खुद महात्‍मा गांधी व नेहरू की किसी पुस्‍तक में हिंदू-मुस्लिम एकता का इतना सुंदर चित्रण नहीं है, लेकिन चूंकि सावरकर ने हिंदुत्‍व शब्‍द की अवधारणा दे दी, इसलिए उनके उस सौहार्द्रपूर्ण लेखन को ही इतिहास से काट दिया गया।

हिन्दुओं मत भूलो हज़ारॊं साल पहले हमारे आपसी मत-भॆद के कारण मुघलों ने हमें पैरॊं तले रौंधा, अंग्रेजों ने हमारी चमड़ी उतारदी और काँग्रेस और वामपंथियों ने हमे तिल तिल मारा। आज अगर सावरकर, बाल गंगाधर तिलक, स्वामी विवेकानंद, बाळा साहेब जैसे शेर नहीं होते, अगर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ न होता, अगर हमारे पूर्वजों ने हिन्दुत्व को बचाकर हमें हिन्दू ही बनाए न रखा होता तो हम भी टॊपी और बुरखा पहनकर घूम रहे होते। देश को बचाना है तो हिन्दू राष्ट्रवाद को जगाना है। जागो हिन्दुत्व के शेरों जागो देश विरॊधी ताकतों को भगाओ.. उन्हें घुटनों पे ले आओ.. और हमेशा के लिए उन्हें बर्बाद कर डालो……

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