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विपक्ष को कड़ा जवाब दे रहीं बीजेपी की दो नेत्रियां

sushma-smritiनई दिल्ली। हाल ही में एचआरडी मिनिस्टर स्मृति ईरानी ने संसद में दिए अपने भाषण से पूरे देश का ध्यान खींचा है। विदेशी मंत्री सुषमा स्वराज भी संसद में अपने भाषणों के लिए जानी जाती हैं। एनडीए सरकार की ये दोनों महिला केंद्रीय मंत्री भले ही अलग-अलग बैकग्राउंड से राजनीति में आई हों, लेकिन अब सरकार की मजबूत हिस्सा बन चुकी हैं।
स्मृति ईरानी ने ज्योतिषी की बात झूठी साबित की
– कहा जाता है कि एक ज्योतिषी ने स्मृति ईरानी के बारे में कहा था कि उनका भविष्य अच्छा नहीं है।
– जवाब में स्मृति बड़े आत्मविश्वास से बोलीं थीं, आने वाले दस सालों में देखिए मैं कहां रहती हूं।
– जनता के बीच में चर्चित रहना और आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखना उनके व्यक्तित्व का अहम हिस्सा है।
– पहले उन्होंने एक ब्यूटी कॉन्टेस्ट से ध्यान खींचा, फिर टीवी सीरियल से अौर अब राजनीति से सुर्खियां बटोर रही हैं।
– स्मृति अच्छी और आक्रामक स्पीकर होने के साथ-साथ दूरदर्शी भी हैं। वे विरोध से भागती नहीं हैं। उसका सामना करती हैं और विरोधियों को करारा जवाब भी देती हैं।
– 2004 में चांदनी चौक से कपिल सिब्बल के खिलाफ हारने के बाद भी उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी।
– पार्टी ने उन्हें एक लोकप्रिय चेहरा जानकर ही चुनाव में उतारा था, लेकिन वे राजनीति छोड़कर नहीं भागीं और एक के बाद एक पद पाती गईं।
सुषमा 25 की उम्र में बनीं थीं मंत्री
– सुषमा स्वराज सिर्फ 25 साल की उम्र में किसी राज्य (हरियाणा) की कैबिनेट मंत्री बनने वाली पहली नेता हैं। उस समय उनके सचिव उनसे दोगुनी उम्र के थे।
– इस छोटी से उम्र में उन्होंने नौ विभाग संभाले थे। उनकी पहचान मुखर वक्ता और साफ छवि की नेत्री के रूप में है।
– कभी-कभी वे विवादों से घिरीं, लेकिन कुशलता से उनसे निकल भी गईं।
– सुषमा के करियर पर नजर डालने पर यही मालूम होता है कि उनके लिए राजनीति ही सबसे अच्छी जगह है।
– इमरजेंसी से लेकर सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे तक वे पूरे दम-खम से लड़ती दिखीं।
– भले ही उन्होंने किसी एक संसदीय क्षेत्र में मजबूत जनाधार तैयार न किया हो, लेकिन वे संसद में अपने क्षेत्र की बात रखना जानती हैं।
– हिन्दुत्व और समाजवाद उनकी विचारधारा के दो अहम पहलू हैं।
– सुषमा, जेपी नारायण के अांदोलन के समय में राजनीति में आईं, वाजपेयी के समय में सीखीं और अब मोदी के समय में उसका उपयोग कर रही हैं।
sushma-smriti2इन्ट्रेस्ट
सुषमा स्वराज :
सुषमा साहित्य से विशेष लगाव रखती हैं। बचपन में उन्होंने संस्कृत के नाटक और वीर रस के कवियों की कविताएं इतनी पढ़ीं कि आज भी वे अपने भाषणों में इनका जिक्र करती हैं। गोपालदास नीरज उनके प्रसंदीदा कवि हैं। इसके अलावा म्यूजिक और डांस में भी उनकी खास रुचि है।
स्मृति ईरानी :
उनकी रुचि पत्रकारिता में थी। उन्होंने जाॅब के लिए एक न्यूजपेपर में इंटरव्यू भी दिया, लेकिन वे रिजेक्ट हो गईं। इसके बाद उन्होंने ग्लैमर की दुनिया से जुड़ने का तय किया। जब 1997 में वे मिस इंडिया कॉन्टेस्ट की फाइनलिस्ट्स चुनी गईं, तब उन्होंने कहा था कि ये उनकी ‘फ्री ग्रूमिंग’ है।
पीआर
सुषमा स्वराज :
स्वराज अलग-अलग संसदीय क्षेत्रों से लड़ती रही हैं, जनता से उनका खास जुड़ाव नहीं बन पाया। हालांकि, वे सोशल मीडिया और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए लोगों के बीच बने रहने की कोशिश करती हैं। गौरतलब है कि टि्वटर पर उनके 44 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं।
स्मृति ईरानी :
स्मृति ईरानी ने कोई लोकसभा चुनाव नहीं जीता, लेकिन फिर भी वे पिछले एक दशक में चर्चा में बनी रही हैं। उन्हें कभी किसी के सामने अपना परिचय देने की जरूरत नहीं पड़ी। अभी भी टीवी की पहचान उन्हें लोगों से जोड़े है। टि्वटर पर उनके तीस लाख फॉलोअर्स हैं।
सुषमा स्वराज की खास बातें
– स्वराज ने लगातार तीन बार राज्य स्तरीय भाषण प्रतियोगिता जीती हैं। उन्होंने 23 साल की उम्र में दिल्ली के रामलीला मैदान में जेपी नारायण की रैली को संबोधित किया था।
– उनके पति स्वराज कौशल चाहते थे कि उनकी बेटी का नाम किसी वाद्य यंत्र पर हो और सुषमा चाहती थी ये कृष्ण की प्रिय चीज पर हो। इसलिए उन्होंने बेटी का नाम बांसुरी रखा।
स्मृति ईरानी की खास बातें
– उन्होंने अपने शुरुआती दिनों में रेस्त्रां में वेटर की नौकरी भी की है। वे मेहमानों की आवभगत करती थीं। ये वो समय था, जब वे टीवी सीरियल्स के लिए संघर्ष कर रही थीं।
– स्मृति ने अपने प्रोडक्शन हाउस ‘उग्रया एंटरटेनमेंट’ के बैनर तले ‘विरुद्ध’ और ‘थोड़ी सी जमीं थोड़ा सा आसमां’ जैसे टीवी शो प्रोड्यूस किए हैं।
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