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GST पर नहीं चलेगी मुनाफाखोरी, ग्राहकों के लिए ये है सरकार का अगला प्लान

नई दिल्ली। जीएसटी में 200 से भी ज्यादा उत्पादों के रेट घटाने के बाद अब  जीएसटी परिषद मुनाफाखोरों पर श‍िकंजा कसने की तैयारी कर रही है. इसके लिए अगले महीने तक नई व्यवस्था की गाइडलाइन जारी हो सकती हैं.

जीएसटी परिषद मुनाफाखोरों पर लगाम कसने के लिए ‘एंटी-प्रॉफिटियरिंग (मुनाफाखोरी रोधी) नियम बनाने की तैयारी  कर रही  है. इसके जरिय उन कारोबारियों के ख‍िलाफ कार्यवाही की जाएगी, जो इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा ग्राहकों को तक नहीं पहुंचाते हैं. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर महीने के पहले हफ्ते में मुनाफाखोरी को लेकर गाइडलाइन जारी की जा सकती है.

क्या है इनपुट टैक्स क्रेडिट

जिन भी कारोबारियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलता है, उन्हें इसका फायदा अपने ग्राहकों को भी देना होता है. जब कोई कारोबारी कच्चा माल व अन्य सामग्री खरीदता है, तो उसे टैक्स भरना पड़ता है. यह इनपुट टैक्स होता है. जीएसटी के तहत इस सामग्री से कोई उत्पाद जब तैयार हो जाता है, तो कारोबारी को इनपुट टैक्स भरने की वजह से टैक्स भरते समय छूट मिलती है. यही इनपुट टैक्स क्रेडिट होता है.

जारी होगी गाइडलाइन

रिपोर्ट की मानें तो अगले महीने तक सरकार मुनाफाखोरी रोकने के लिए विस्तार से गाइडलाइन जारी कर सकती है. इस गाइडलाइन के जरिये जीएसटी परिषद की कोश‍िश यह रहेगी कि मुनाफाखोरी करने वाली कारोबारियों के ख‍िलाफ कड़ी कार्यवाही हो. इसके साथ ही कारोबारी आम ग्राहकों तक इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा पहुंचे.

लेक‍िन खड़े हैं कई सवाल

हालांकि मुनाफाखोरी को लेकर बन रही इस गाइडलाइन को लेकर विशेषज्ञों के मन में कई सवाल हैं. उनका कहना है कि क्या इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा हर ब्रांड पर आम लोगों तक पहुंचाना संभव भी है या नहीं. नई गाइडलाइन में परिषद इन्हीं शंकाओं का समाधान कर सकती है और मुनाफाखोरी रोकने के लिए मजबूत तंत्र तैयार कर सकती है.

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रेट कम करने के बाद ये है लक्ष्य

जीएसटी परिषद ने पिछले हफ्ते 200 से भी ज्यादा उत्पादों का टैक्स रेट कम कर दिया गया है. अब परिषद जीएसटी में नये बदलावों की तैयारी कर रही है. इन बदलाव से आम आदमी को और भी राहत मिल सकती है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संकेत दिए हैं कि जीएसटी टैक्स स्लैब की संख्या घटाई जा सकती है.

घट सकते हैं टैक्स स्लैब

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की उस मांग को खारिज किया, जिसमें उन्होंने जीएसटी में एक ही टैक्स स्लैब में रखने की मांग की थी. हालांकि उन्होंने संकेत दिए कि जीएसटी के मौजूदा टैक्स स्लैब की संख्या घटाई जा सकती है.

नियमों में होगा बदलाव

रियल इस्टेट और पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के तहत लाने पर विचार करने के अलावा जीएसटी परिषद टैक्स स्लैब कम करने पर भी विचार कर सकती है. इसके अलावा वह जीएसटी कानून और नियमों में भी बदलाव करने पर विचार करेगी. दरअसल इस पूरी कवायद का मकसद कारोबारियों की सहूलियत को बढ़ाना है.

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