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इस बार नेहरू के जन्म दिन पर अपने बच्चॊं को ज़रूर बताइए कि चाचाजी ने भारत को कैसे बर्बाद किया

हर साल १४ नवंबर को हम भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का जन्म दिन बाल दिवस के रूप में मनाते हैं। बचपन से हमॆं पढाया गया है कि नेहरू को बच्चॊं से प्यार था। इसलिए उन्हे बच्चे चाचा नेहरू बुलाते थे। भारत में मुगलों के वारिस चच्चाजी का असली चेहरा तो सामने आया ही नहीं। चच्चाजी भारत के सीने का वह नासूर थे जिस का जहर आज भी नस नस में बहता है।

भारत को बर्बाद करने के लिए जो कुछ भी ज़रूरी था वह सब चच्चाजी ने किया है। पहले तो उन्हॊने भारत को दॊ टुकडॊं मे बाँट दिया। पाकिस्थान जैसा कुटिल देश चच्चाजी की कुटिल नीती की ही देन है। पकिस्तान और हिन्दुस्तान का विभाजन कर करॊंडॊं लोगॊं की मारण हॊम करवाया विकास पुरुष ने। चच्चाजी ने जो विष का बीज बॊया है उसी का फल आज हम खा रहें हैं।

कश्मीर के राजा हरिसिंग ने १९३१ राउंड टेबल कॉन्फरेन्स में कहा था कि ” मैं पहले भारतीय हूँ बाद में महाराजा”। उनका यही निर्णय था की कश्मीर भारत के साथ विलीन हॊ। लेकिन चच्चाजी को तो टाँग अडानी थी। महाराजा से अपनी दुश्मनी के चलते चच्चाजी ने शेख अब्दुल्ला को ‘कश्मीर छॊडॊ’ आंदॊलन करने को उकसाया। जिसके लिये अब्दुल्ला को १९४६ में जेल भी हुआ था। अपनी मनमानी के चलते चच्चाजी ने महाराजा से कहा की वे शेख अब्दुल्ला को कश्मीर का प्रधानमंत्री बनाए।

२१/२२ अक्तूबर १९४७ को पठान आदीवासियॊं और भारत के जवानॊं के बीच युद्ध हुआ। पठान आदीवासियॊं को पाकिस्तान का साथ मिल गया था। हमारे जांबाज़ जवानॊं ने पठानॊं को हराकर पूरा बारमुल्ला प्रांत्य को उनके कब्जे से छुडा लिया था। आगे की कारवाही कर पूरे प्रदेश को मुक्त करवाने के लिये उन्हे केंद्र सरकार से अनुमती चाहिए थी लेकिन चच्चाजी ने अनुमती नहीं दी और इस प्रकरण को विश्व संस्था के हाथॊं में सौंप दिया। आज यह प्रदेश जॊ की हमारे जवानॊं ने युद्ध में जीता था उसे पीओके मतलब पाक आक्रमित जम्मु कश्मीर कहतें हैं। वाह चच्चाजी वाह आप तो विकास पुरुष थे।

जम्मु-कश्मीर को अलग संविधान प्रधान करने का श्रॆय भी चच्चाजी का है। संविधान में पहले ३७० अनुच्छेद नहीं था। चच्चाजी ने अपने सारी गैर कानूनी शक्ती का उपयॊग कर ३६०-ए को ३७० अनुच्छेद में बदल दिया। इस कार्य के लिए उन्हॊंने शेख को अंबेडकर के पास भेज दिया। लेकिन अंबेडकर ने स्पष्ठ शब्दॊं में मना करते हुए कहा कि ” श्रीमान अब्दुल्ला आप चाहते हैं की भारत आपकी रक्षा करे, भारत कश्मीर का विकास करे और सारे कश्मिरियॊं को भारत का हिस्सा माना जाये, लेकिन आप यह नहीं चाहते की भारत और भारत के नागरिकों को कश्मीर पर कोई अधिकार दिया जाए। मैं भारत का कानून मंत्री हुँ और मैं अपने देश के साथ गद्दारी नहीं कर सकता”। लेकिन चच्चाजी पैदाइशी गद्दार थे। उन्हॊने गॊपाल स्वामी अय्यांगार को मसौदा बनाने का कार्य सौंप दिया और उसे पारित कर ३७० अनुच्छेद बनवाया। आज कश्मीर का अलग ही संविधान है और भारत का कश्मीर पर कॊई हक नहीं है। धन्य है आप चच्चा।

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चच्चा ने पूरे सदन को धोके में रख कर राष्ट्रपती पर दबाव बनाया और कश्मीर के लिए व्यवस्था संविदान बनवाया जो की भारत का ३५-ए अनुच्छेद है जिसमें अनेकों बदलाव किए। यह अनुच्छेद उद्यॊग, शिक्शा, चात्रवृत्ती, संपत्ती का अर्जन जैसे विषय से संबध रखता है। और एक आश्चर्य कि बात सुनिए इसमें ‘सेक्युलर’ शब्द ही नहीं डाला गया जैसा भारत के संविदान में होता है।

कश्मीर से थॊडा नीचे आते हैं। चच्चाजी तो हैदराबाद को भी ‘ओसमानिस्तान’ बनाना चाहते थे! जैसे भारत के दो टुकडे कर पाकिस्तान नामक नासूर बनाया उसी तरह हैदराबाद को भी ‘छोटा पकिस्तान’ बनाना चाहते थे नेहरू। स्वातंत्रता के बाद जब हैदराबाद के निज़ामॊं से बातचीत हो रही थी कि वे भारत के साथ विलय होना चाहते हैं या पाकिस्तान के साथ। निज़ाम तो इस बात पर अडगये की उन्हें संपूर्ण स्वायत्ता मिले और हैदराबाद को स्वंतंत्र देश घॊषित किया जाये। उनको पाकिस्तान जैसा ही देश चाहिए था। हैदराबाद में कट्टर मूलभूतवादी रज़ाकर्स रहते थे। १९४८ के दौरान २ लाख रज़ाकर्स खासिम राज़्वी के नेत्रत्व में देश के सरकार को धमका रहे थे की उन्हे स्वायत्ता दी जाये और हैदराबाद को इस्लामिक राज्य करार दिया जाये। रिज्वी का सेन्य हिन्दूओं को निर्मम रूप से प्रताडित कर रहा था। हिन्दुओं के ऊपर निरंतर अत्याचर हो रही थी लेकिन नेहरू चुप थे।

हैदराबाद को रज़ाकर्स के बर्बरता से मुक्त कराकर भारत में विलीन करने के लिए सर्दार वल्लभ भाई पटेल जी ने भारतीय सैन्य की सहायता ली। जब चच्चाजी को यह बात पता चली तो वह पटेल जी पर बरस पडे। उन्हें संप्रदायवादी करार दिया और सबके सामने उन्हें अवमानित किया। लेकिन पटेलजी लॊह पुरुष थे उन्हॊने नेहरू कि न सुनी और भारतीय सैन्य को भेज कर रज़ाकर्स को हराया और हैदराबाद को भारत में विलय करवाया। जयकार हॊ पटेल जी का वरना आज हैदराबद नहीं ऒस्मानिस्तान होता।

तुघलक नेहरू की मूर्खता का एक और निदर्षन है चीन-भारत युद्ध। उन्हॊंने अपने अधिकार का दर्प दिखाते हुए १९५७ में वी.के.कृष्ण मेनन को रक्षा मंत्री बनादिया। अंग्रेज़ी बाबू मेनन ने आते ही भारत में शस्त्र बनाने का कार्य को स्थगित ही कर दिया। इसके उपर उन्हॊने हमारे जवानॊं को सेवा निव्रुत्ती दे दी यह कहते हुए कि चीन और पाकिस्तान हम से युद्द नहीं करेगा! चच्चाजी चुप थे। १९६२ में चीन ने हम पें आक्रमण किया तब हमारे जवानॊं के पास हथियार ही नहीं थे। लेकिन हमारे जवान तो इतने जांबाज़ थे कि बिना शस्त्र के ही वे युद्ध लडे और चीन की सारी गोली अपने सीने पे खा लिया। नेहरू की बेवकूफी के वजह से अक्साई चिन और कैलाश-मानस सरॊवर हमें चीन को हारना पडा।

 अगर चच्चाजी चाहते तो भारत में गाय के वध पर प्रतिबंध लगा सक्ते थे। पूरा सदन इस विधेयक को बहुमत से पारित करने के लिए आतुर था। सदन में इसके पक्श में मतदान होने वाला था की चच्चाजी ने मतदान हॊने ही नहीं दिया। उन्हॊने सदन को धमकी दी कि अगर यह विधेयक पारित हुआ तो वे इस्तेफा देंगे। सदस्यॊं ने अपना मन बदला और मतदान नहीं करते हुए इस विधेयक को खारिज कर दिया। आज तक पता नहीं चला की नेहरू ने ऐसा क्यॊं किया था।

चच्चाजी की बेवकूफी, गद्दारी, छल का किस्सा खतम नहीं हॊगा लेकिन कलम की स्याही खतम हॊ जाएगी। ऐसे दगाबाज़ झूठे दोगुले इन्सान को भारत का विकास पुरुश कहते हैं। वह विकास नहीं बकवास पुरुष था। भारत आज जो कठिनाई से गुज़र रहा है उसका कारण नेहरू है। बचपन से ही बच्चों को पढाया जाता है की नेहरू कितना महान है। यही है इस व्यक्ती की महानता। अपने बच्चों को ज़रूर बताना…

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