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हार्दिक-अल्पेश-जिग्नेश, कांग्रेस को इनसे थी पहले आसअब ये तीनो बनगए गले की फांस

नई दिल्ली।  गुजरात चुनाव में कांग्रेस अपनी नैया पार लगाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। विजयपताका लहराने के लिए कांग्रेस किसी भी तरह से हार्दिक पटेल को अपने साथ लाना चाहती है। इसके पहले अल्पेश ठाकोर को पार्टी में शामिल कर कांग्रेस ने स्थिति मजबूत की है। कांग्रेस हार्दिक के अलावा जिग्नेश मेवानी को भी अपने पाले में करना चाहती है। जिससे पाटीदारों, ओबीसी और दलित वोट बैंक को साध सके।

बीजेपी से पाटीदार समाज खफा है इसमें कोई दोराय नहीं है लेकिन हार्दिक और कांग्रेस के बीत चल रही बातचीत से भी पाटीदार समाज कांग्रेस से भी खुश नजर नहीं आ रहे हैं।

गुजरात विधानसभा चुनाव का विपुल बज चुका है।  इसी दौरान कांग्रेस के लिए एक मुसीबतें खड़ी हो गई है। कांग्रेस हार्दिक पटेल का समर्थन जुटाकर पाटीदारों का वोट अपने पाले में करना चाहती है। इसके साथ ही ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर और दलित नेता जिग्नेश मेवानी का भी समर्थन जुटाने की चाह के बीच फंसती नजर आ रही है।

हार्दिक पाटीदारों के लिए कांग्रेस से आरक्षण की मांग कर रहे हैं। जबकि ठाकोर ओबीसी कोटा के साथ कोई भी छेड़छाड़ की अनुमति नहीं देंगे।

जबकि गुजरात की 60 मिलियन आजादी में 40 प्रतिशत आरक्षण ओबीसी, 12 प्रतिशत पाटीदारों के बीच बंटा हुआ है। राज्य में ओबीसी को रोजगार और शिक्षा में 27% कोटा दिया जाता है। अनुसूचित जाति (अनुसूचित जातियों) में 7% और अनुसूचित जनजाति (एसटी) 15% हैं, जिसमें कुल 49% हैं। जबकि 50% आरक्षण सुप्रीम कोर्ट तय करता है।

जबसे हार्दिक और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बीच दोस्ती की खबरें आने लगी। तो खबर है कि बाकि के दो युवा नेता जिग्नेश, अल्पेश थोड़ा नाराज है। खास बात यह है कि अभी ज्यादा दिन नहीं बीतें जब हार्दिक ने कांग्रेस को चोर और बीजेपी को महाचोर कहा था। उन्होंने कहा था कि हम सत्ताधारी पार्टी को हराने के लिए काम करेंगे।

लेकिन फिर कुछ दिनों के बाद ही हार्दिक के कांग्रेस में शामिल होने की खबरें आने लगी। हार्दिक और राहुल गांधी की गुपचुप मुलाकात की खबरें भी आई। जिसके बाद हार्दिक ने कांग्रेस को अल्टीमेटम दिया कि 3 नवंबर तक पार्टी अपना आरक्षण के मुद्दे पर रुख साफ करे। नहीं तो वह राहुल गांधी की सूरत रैली में बाधा डालेंगे।

गुजरात की सत्ता को हासिल करने के लिए कांग्रेस हर तरह से प्रयास कर रही है। बैलेंस बनाएं रखने के लिए कांग्रेस ने रोजगार और शिक्षा में आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) को 20% आरक्षण की पेशकश की है। जिसमें ऊपरी जाति समुदायों जैसे प्रभावशाली पाटीदार शामिल हैं, जबकि एससी, एसटी और ओबीसी को मौजूदा 49% आरक्षण पहले  से ही मिला है।

क्या कांग्रेस हार्दिक के नखरे उठाएगी

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गुजरात कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अर्जुन मोधवाडिया ने कहा, उनकी भाषा और रवैया एक 24 साल के लड़के जैसा है। हम बीजेपी जैसे नहीं हो सकते कि अपने खिलाफ लोगों के लिए डंडे का इस्तेमाल करें। हम उनके साथ बातचीत करते हल निकालने की कोशिश करेंगे।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस को ईबीसी को कोटा देने के वादे को लागू करने में कानूनी बाधाएं का सामना करना पड़ेगा।

कैसे कांग्रेस पाटीदार की मांग पर बातचीत करेगी? राजनीतिक विशेषज्ञ विद्यायुहित जोशी ने कहा कि आरक्षण को आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर नहीं दिया जा सकता है और उस समय के लिए कांग्रेस केवल चुनावों पर केंद्रित है।

उन्होंने कहा कि “संविधान आर्थिक समानता को बढ़ावा नहीं देता है। कांग्रेस को पिछड़ेपन के लिए कुछ अन्य मापदंड तैयार करने चाहिए। यदि संसद इस बात की हामी भरती है, तो वे कर सकते हैं। “मुझे लगता है कि इस बार कांग्रेस चुनाव के लिए पाटीदारों को लुभाने की कोशिश कर रही है। संसद में क्या होगा यह देखा जाना बाकी है। ”

कांग्रेस ने उन्हें जल्द ही आरक्षण पर अपान रुख स्पष्ट करने का आश्वासन दिया है। जिसके बाद कांग्रेस ने पार्टी के वरिष्ठ नेता व वकील कपिल सिब्बल के साथ इस प्रकिया पर बातचीत कर हल निकालना शुरु कर दिया है।

दोनों पक्ष आरक्षण के तमिलनाडु और राजस्थान मॉडल पर भी चर्चा करेंगे। राजस्थान ने 26 अक्टूबर को गुर्जरों और चार अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण को 21% से 26% तक बढ़ाने का फैसला किया, जिससे राज्य में कुल कोटा 54% हो गया। 1 99 0 के मध्य में तत्कालीन तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जे जयललिता ने 69% कोटा योजना को विधायी समर्थन प्रदान किया था।

जबकि मई 2016 में आनंदिबेन पटेल सरकार ने अध्यादेश के माध्यम से ऊंची जातियों (वार्षिक आय के 6 लाख रुपये से कम के लिए) के लिए आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए 10% कोटा की घोषणा की। हालांकि, गुजरात उच्च न्यायालय ने अगस्त 2016 में इस कदम को रद्द कर दिया था।

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