Sunday , November 29 2020
Breaking News

अफजल की फांसी को ‘हत्या’ बताने वालों को जजों का जवाब

अफजल की फांसी को ‘न्यायिक हत्या’ कहना सीमा लांघना

Afzal-Guruनई दिल्ली। अफजल गुरु को मौत का फैसला सुनाने वाली दो सदस्यीय बेंच के प्रमुख और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज पीवी रेड्डी ने कहा है कि अफजल की मौत को ‘न्यायिक हत्या’ कहना सीमा लांघने जैसा है। हालांकि, जज ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की सकारात्मक आलोचना का स्वागत है।

जज रेड्डी की बेंच ने 2005 में अफजल को संसद पर हमले के एक मामले में दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी। रेड्डी और पीपी नावलेकर ने अफजल की मौत के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था। हालांकि, बेंच ने शौकत हुसैन गुरु की मौत की सजा को 10 साल की कैद में बदल दिया था और एसएआर गिलानी और अफसान गुरु उर्फ नवजोत संधू को दोषमुक्त कर दिया था।
ट्रायल जज एसएन ढींगरा ने अफजल, शौकत और गीलानी को मौत की सजा सुनाई थी। वह बाद में हाई कोर्ट के जज बने थे। हाल ही में जेएनयू के कुछ स्टूडेंट्स ने यूपीए के शासनकाल में हुई अफजल गुरु की फांसी को ‘न्यायिक हत्या’ करार दिया था और कहा था कि अफजल की उचित सुनवाई नहीं हुई थी। इसके बाद यूपीए के शासनकाल में गृह और वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम ने भी संसद पर हमले में अफजल का हाथ होने पर ‘गंभीर शक’ जाहिर किया था।

Loading...

जस्टिस रेड्डी ने कहा, ‘फैसला खुद बोल रहा है। जो लोग अफजल की शहादत दिवस मना रहे हैं, उन्हें आलोचना या टिप्पणी करने से पहले पूरा फैसला पढ़ना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की सकारात्मक आचोलना करना हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पहचान है, जो बोलने की स्वतंत्रता की भी रक्षा करती है। लेकिन इसे न्यायिक फांसी करार देना सीमा पार करना है। आलोचना सभ्य और जनहित में होनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं है तो यह लोकतंत्र की जड़ों पर हमला हो सकती है, जिसका एक पिलर सुप्रीम कोर्ट भी है।’

Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *