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नसीमुद्दीन सिद्दीकी के ख़िलाफ़ विधान परिषद में मायावती की याचिका ख़ारिज

लखनऊ। बसपा से निष्कासित मुस्लिम नेता नसीमु्द्दीन सिद्दीकी ने मायावती के खिलाफ एक और जंग जीत ली है। नसीमुद्दीन सिद्दीकी के ख़िलाफ़ विधान परिषद में बहुजन समाज पार्टी की याचिका ख़ारिज हो गई है। मायावती ने सिद्दीक़ी को एमएलसी पद से हटाए जाने की मांग की थी, लेकिन विधान परिषद के सभापति ने नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी के पक्ष में फैसला सुनाया। अब सिद्दीकी MLC बने रहेंगे।

बसपा से निष्कासित होने के बाद नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी और बसपा सुप्रीमो मायावती के बीच की जंग जग जाहिर है। दोनों ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाए। वहीं नसीमुद्दीन ने तो मायावती की पोल खोलने के लिए कई ऑडियो क्लिप वायरल किए थे, जिनमें मायावती टिकट के लिए पैसों के लेन-देन की बात करती सुनाई दे रही थी।

वहीं बसपा ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी को एमएलसी पद से हटाने के लिए भी पूरी कोशिश की। लेकिन विधान परिषद में दायर पार्टी की याचिका को आखिरकार खारिज कर दिया और नसीमुद्दीन की विजय हुई। विधान परिषद का फैसला आने के बाद नसीमुद्दीन ने कहा कि यह सच्चाई की जीत है और झूठ की हार है।

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पिछले माह भी नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने मायावती पर जमकर हमला बोला था। नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि बसपा पार्टी तो ठीक है लेकिन उसकी मुखिया मायावती भ्रष्ट हैं। वह सिर्फ पैसे की राजनीति करती हैं। मायावती की पैसे की लालच से बसपा अब कहीं भी नहीं है। सभी प्रमुख नेताओं ने इस पार्टी से किनारा कर लिया। बताया कि लगातार 33 साल तक बसपा की सेवा करने के बाद भी मायावती ने टिकट के लिए उनसे पैसे मांगे।

बसपा छोड़ने के बाद ऐसी अटकलें थी कि नसीमुद्दीन अपने समर्थकों के साथ अखिलेश यादव की पार्टी समाजवादी पार्टी का दामन थाम सकते हैं। लेकिन यह बातें महज अफवाह ही साबित हुई। बल्कि नसीमुद्दीन ने अपनी नई पार्टी ‘राष्ट्रीय बहुजन मोर्चा’ का ऐलान कर दिया।

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