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कांग्रेस राज आते ही पंजाब में धर्मांतरण का धंधा शुरू

धर्मांतरण की बायीं तस्वीर हमें सोशल मीडिया के जरिए मिली है। दाहिनी तरफ ऊपर की तस्वीर अमृतसर में पिछले ही महीने खुले एक चर्च की है। इस इलाके में एक भी ईसाई नहीं रहता। जबकि दायीं तरफ नीचे अमृतसर में ईसाई धर्म प्रचार कार्यक्रम के पोस्टर की तस्वीर है। इसे आयोजित करने वाले पादरी का नाम अंकुर नरूला है, ताकि कोई समझ न सके कि असली मकसद कुछ और ही है।

लखनऊ। पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनने के छह महीने के अंदर ईसाई धर्मांतरण का खुला खेल शुरू हो गया है। अकाली दल-बीजेपी के दौर में जो काम चोरी-छिपे चल रहा था वो अब खुलेआम हो रहा है। पिछले कुछ महीनों में बड़े शहरों से लेकर दूर-दराज के गांवों तक में चंगाई सभा जैसे आयोजनों की भरमार हो गई है। पंजाब में ईसाई धर्मांतरण का शिकार सिखों और हिंदुओं को बनाया जा रहा है। हैरानी की बात है कि मलेरकोटला जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में ईसाई संगठनों की गतिविधियां न के बराबर हैं। पिछले कुछ महीनों में ढेरों नए चर्च खुल गए हैं और जगह-जगह बाइबिल और ईसाई धर्मांतरण साहित्य बांटते लोगों को देखा जा सकता है। कुछ चर्च तो ऐसी जगहों पर खुले हैं जहां 5-5 किलोमीटर के दायरे में एक भी ईसाई नहीं रहता। जिस तरह से ईसाई मिशनरियों की सक्रियता बढ़ी है उसे देखते हुए यही लगता है कि इन्हें विदेशों से बड़ी रकम मिल रही है। कई लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए इस मुद्दे को जोरशोर से उठाया है।

सिख, हिंदू नामों वाले ईसाई प्रचारक

ईसाई धर्मांतरण कार्यक्रमों में प्रचार के लिए आने वालों के नाम देखेंगे तो लगेगा ही नहीं कि मामला क्या है। कई ईसाई धर्म प्रचारक तो बाकायदा सिखों की तरह पगड़ी भी बांधते हैं। सिखों और पंजाबियों की तरह के नाम वाले ये प्रचारक भोले-भाले लोगों को बेवकूफ बनाने में जुटे हैं। अनपढ़ और गांवों के लोगों के बीच जाकर ईसाई मिशनरी वाले लोगों को बताते हैं कि उनकी सारी मुसीबतों के पीछे असली कारण उनकी धार्मिक परंपराएं, त्यौहार और देवी-देवता हैं। इसके लिए लोगों को तरह-तरह के लालच भी दिए जाते हैं। ज्यादातर लोगों को यह एहसास भी नहीं होने दिया जाता कि उन्हें धर्मांतरण की तरफ ले जाया जा रहा है। कभी बीमारी के इलाज के नाम पर तो कभी नौकरी-रोजगार के नाम पर लोगों को ईसाई मिशनरियों से जोड़ने का काम जोरशोर से चल रहा है।

लालच देकर हो रहा है धर्म का प्रचार

ईसाई मिशनरियों की गतिविधियों को लेकर सोशल मीडिया पर लिखने वालों की पोस्ट पर नज़र डालें तो पंजाब में धर्मांतरण के सारे खेल के पीछे लालच का भी बड़ा हाथ है। कई लोगों ने बताया है कि गरीब लोगों को मुफ्त इलाज, नौकरी और पैसे का लालच देकर ईसाई एजेंसियां अपने चंगुल में फंसा रही हैं। कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जब मां-बाप तो सिख बने रहे, लेकिन उनका कोई एक लड़का लालच में पड़कर ईसाई बन गया। इससे ढेरों परिवारों के टूटने का संकट खड़ा हो गया है। ईसाई मिशनरियां नौकरी की तलाश कर रहे बेरोजगार नौजवानों को विदेश भेजने का झांसा देकर उन्हें ईसाई बना रही हैं। नीचे देखिए पूरे पंजाब में चल रहे धर्मांतरण के खेल पर कुछ सोशल मीडिया पोस्ट।

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