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लाल बत्ती वाले नेताजी चले गांव की ओर

lal24मुंबई। भयानक सूखे की मार झेल रहे किसानों के दुखों पर मरहम लगाने के लिए लाल बत्ती वाली एसी गाड़ियों में महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री गांवों में जाएंगे। बीड, उस्मानाबाद और लातूर जिले के किसानों से मुलाकात कर उन्हें मिल रही सरकारी मदद के बारे में जानकारी लेंगे। मदद का रास्ता निकालेंगे। दौरे की समय सारणी कृषि मंत्री एकनाथ खडसे, शिक्षा मंत्री विनोद तावडे, स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर दीपक सावंत और ग्राम विकास मंत्री पंकजा मुंडे मिलकर तय करेंगे। माना जा रहा है कि मार्च के पहले सप्ताह में दौरा शुरू होगा और दौरा खत्म करने के बाद एक रिपोर्ट मुख्यमंत्री को देंगे।

महाराष्ट्र लगातार चार साल से सूखे का सामना कर रहा है। विपक्ष लगातार फडणवीस सरकार पर मदद में कोताही का आरोप लगा रहा है। मार्च के दूसरे सप्ताह से राज्य का बजट सत्र शुरू होने वाला है। सत्र में विपक्ष के आक्रामकता की धार कम करने के लिए फडणवीस सरकार ने दौरे का फॉर्म्युला निकाला है। दरअसल, कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री फडणवीस ने मराठवाडा के बीड, उस्मानाबाद और लातूर जैसे सूखाग्रस्त जिले की भयावह स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि किसानों के मदद कार्य में सरकार पर उदासीनता का आरोप लगाया जा रहा है इसलिए मंत्रियों को जाकर खुद देखना चाहिए कि किसानों को दी जा रही सरकारी मदद मिल रही है कि नहीं?

मुख्यमंत्री की पहल के बाद तय किया गया कि कैबिनेट मंत्री सूखा प्रभावित तहसील और गांवों में जाकर किसान, मजदूर, आम जनता और मदद देने वाले अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। खेत खलिहान और जानवरों के लिए बनाई गईं चारा छावनी में जाएंगे। वहां की पानी समस्या की समीक्षा करेंगे। दौरे की पूरी समीक्षा रिपोर्ट तैयार करेंगे और वह मुख्यमंत्री को सौपेंगे।

कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री की पहल के बाद कुछ मंत्रियों ने शिकायत की कि सूखा निवारण विभाग के कई सारे अधिकारी सहयोग नहीं देते। इस पर मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि ऐसी स्थिति में उन अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई करने के अलावा कोई चारा नहीं है।

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इससे पहले सरकार में शामिल शिवसेना पार्टी के विधायक और मंत्री भी इसी सूखाग्रस्त गांवों का दौरा कर रिपोर्ट बनाकर पार्टी चीफ उद्धव ठाकरे को सौंप चुके हैं। पर उससे किसानों का कोई भला नहीं हुआ। अब तो गांवों में यह स्थिति है कि गांव वाले नेताओं को देखते ही बिदक रहे हैं।

बजट सत्र से ऐन पहले दौरे पर जाने पर विपक्ष ने सरकार की खिल्ली उड़ाते हुए कहा कि इस सरकार को देर से समझ आती है। किसान परेशान है, मजदूर गांवों से पलायन कर रहा है। कर्ज और खेती के नुकसान के कारण किसान आत्महत्या कर रहा है। परंतु सरकार उनकी मदद नहीं कर पा रही है। अब जब बजट सत्र सिर पर आ गया है और विपक्ष उनसे जवाब मांगने वाला है तब इन्हें किसानों के सुख-दुख की चिंता सता रही है।

विधान परिषद में विरोधी पक्ष नेता व सरकार को हमेशा कटघरे में खड़ा करने वाले धनंजय मुंडे कहते हैं कि यही दौरा तीन महीने पहले किया होता तो निश्चित ही किसानों को फायदा हुआ होता। विधान सभा में विरोधी पक्ष नेता राधाकृष्ण विखे-पाटील कहते हैं, किसानों की समस्याओं को लेकर हम लोग सरकार का ध्यान लगातार खींच रहे हैं, फिर वे कुछ करने के लिए तैयार नहीं है। धनपतियों की सरकार के कान पर जू तक नहीं रेंगती। अब जब बजट सत्र में उनसे जवाब मांगा जाएगा तो उन्हें किसानों की सुध आई है।

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