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कांग्रेस पार्टी हमेशा से हिंदू विरोध की नीति पर चली है और आज भी वो इसी नीति पर मजबूती के साथ कायम है

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील और कांग्रेस के नेता कपिल सिब्बल ने दलील दी है जिस तरह से राम हिंदुओं के लिए आस्था का सवाल हैं उसी तरह तीन तलाक मुसलमानों की आस्था का मसला है। भगवान राम की तुलना तीन तलाक और हलाला जैसी घटिया परंपराओं से करना लोगों को बहुत चुभ रहा है। माना जा रहा है कि कपिल सिब्बल ने सोच-समझकर हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की नीयत से ये बयान दिया है। लेकिन कपिल सिब्बल का बयान इस लंबे सिलसिले की एक कड़ी भर है। हम आपको बताते हैं उन 10 बयानों और घटनाओं के बारे में जो इस बात का सबूत हैं कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से हिंदू विरोध की नीति पर चली है और आज भी वो इसी नीति पर मजबूती के साथ कायम है।

1. वंदेमातरम से थी दिक्कत: आजादी के बाद यह तय था कि वंदे मातरम राष्ट्रगान होगा। लेकिन जवाहरलाल नेहरू ने इसका विरोध किया और कहा कि वंदे मातरम से मुसलमानों के दिल को ठेस पहुंचेगी। जबकि इससे पहले तक तमाम मुस्लिम नेता वंदे मातरम गाते थे। नेहरू ने ये रुख लेकर मुस्लिम कट्टरपंथियों को शह दे दी। जिसका नतीजा देश आज भी भुगत रहा है। आज तो स्थिति यह है कि वंदेमातरम को जगह-जगह अपमानित करने की कोशिश होती है। जहां भी इसका गायन होता है कट्टरपंथी मुसलमान बड़ी शान से बायकॉट करते हैं।

2. सोमनाथ मंदिर का विरोध: गांधी और नेहरू ने हिंदुओं के सबसे अहम मंदिरों में से एक सोमनाथ मंदिर को दोबारा बनाने का विरोध किया था। गांधी ने तो बाकायदा एतराज जताते हुए कहा था कि सरकारी खजाने का पैसा मंदिर निर्माण में नहीं लगना चाहिए, जबकि इस समय तक हिंदू मंदिरों में दान की बड़ी रकम सरकारी खजाने में जमा होनी शुरू हो चुकी थी। जबकि सोमनाथ मंदिर के वक्त ही अगर बाबरी, काशी विश्वनाथ और मथुरा कृष्ण जन्मभूमि के विवादों को भी हल किया जा सकता था। लेकिन कांग्रेस ने ऐसा नहीं होने दिया।

3. बीएचयू में हिंदू शब्द से एतराज: नेहरू और गांधी को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में हिंदू शब्द पर आपत्ति थी। दोनों चाहते थे कि इसे हटा दिया जाए। इसके लिए उन्होंने महामना मदनमोहन मालवीय पर दबाव भी बनाया था। जबकि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के नाम से दोनों को ही कोई एतराज नहीं था।

4. हज के लिए सब्सिडी शुरू की: ये कांग्रेस सरकार ही थी जिसने हज पर जाने वाले मुसलमानों को सब्सिडी देने की शुरुआत की। दुनिया के किसी दूसरे देश में ऐसी सब्सिडी नहीं दी जाती। जबकि कांग्रेस सरकार ने अमरनाथ यात्रा पर खास तौर पर टैक्स लगाया। इसके अलावा हिंदुओं की दूसरी धार्मिक यात्राओं के लिए भी बुनियादी ढांचा कभी विकसित नहीं होने दिया गया। अब मोदी सरकार के आने के बाद उत्तराखंड के चारों धाम को जोड़ने का काम शुरू हुआ है।
5. 26/11 के पीछे हिंदुओं का हाथ: मुंबई हमले के बाद कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने इसके पीछे हिंदू संगठनों की साजिश का दावा किया था। दिग्विजय के इस बयान का पाकिस्तान ने खूब इस्तेमाल किया और आज भी जब इस हमले का जिक्र होता है तो पाकिस्तानी सरकार दिग्विजय के हवाले से यही साबित करती है कि हमले के पीछे आरएएस का हाथ है। दिग्विजय के इस बयान पर उनके खिलाफ कांग्रेस ने कभी कोई कार्रवाई या खंडन तक नहीं किया।

6. मंदिर जाने वाले छेड़खानी करते हैं: राहुल गांधी ने कहा था कि जो लोग मंदिर जाते हैं वो लड़कियां छेड़ते हैं। यह बयान भी कांग्रेस और उसके शीर्ष नेतृत्व की हिंदू विरोधी सोच की निशानी थी। यह अलग बात कि 2014 के लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद खुद राहुल गांधी कई मंदिरों के चक्कर काट चुके हैं। हालांकि उनकी मां सोनिया अब भी ऐसा कुछ नहीं करती हैं जिससे यह मैसेज जाए कि उनका हिंदू धर्म से कोई नाता है।
7. राम सेतु पर हलफनामा: 2007 में कांग्रेस सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि चूंकि राम, सीता, हनुमान और वाल्मिकी वगैरह काल्पनिक किरदार हैं इसलिए रामसेतु का कोई धार्मिक महत्व नहीं माना जा सकता है। जब बीजेपी ने इस मामले को जोरशोर से उठाया तब जाकर मनमोहन सरकार को पैर वापस खींचने पड़े। हालांकि बाद के दौर में भी कांग्रेस रामसेतु को तोड़ने के पक्ष में दिखती रही है।

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8. हिंदू आतंकवाद शब्द गढ़ा: इससे पहले हिंदू के साथ आतंकवाद शब्द कभी इस्तेमाल नहीं होता था। मालेगांव और समझौता ट्रेन धमाकों के बाद कांग्रेस सरकारों ने बहुत गहरी साजिश के तहत हिंदू संगठनों को इस धमाके में लपेटा और यह जताया कि देश में हिंदू आतंकवाद का खतरा मंडरा रहा है। जबकि ऐसा कुछ था ही नहीं। इस केस में जिन बेगुनाहों को गिरफ्तार किया गया वो इतने सालों तक जेल में रहने के बाद बेकसूर साबित हो रहे हैं।

9. राम की तुलना इस्लामी कुरीति से: तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने इसकी तुलना भगवान राम से की। यह तय है कि कपिल सिब्बल ने यह बात अनजाने में नहीं, बल्कि बहुत सोच-समझकर कही है। उनकी नीयत भगवान राम का मज़ाक उड़ाने की है। कोर्ट में ये दलील देकर कांग्रेस ने मुसलमानों को खुश करने की कोशिश की है।

10. सेना में फूट डालने की कोशिश: सोनिया गांधी के वक्त में भारतीय सेना को जाति और धर्म में बांटने की बड़ी कोशिश हुई थी। तब सच्चर कमेटी की सिफारिश के आधार पर सेना में मुसलमानों पर सर्वे की बात कही गई थी। बीजेपी के विरोध के बाद मामला दब गया, लेकिन इसे देश की सेनाओं को तोड़ने की गंभीर कोशिश के तौर पर आज भी देखा जाता है।

यह बात भी ऐतिहासिक तथ्य है कि राजनीति में सोनिया गांधी के बढ़ते असर के साथ देश में ईसाई मिशनरियों की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। पहले राजीव गांधी और बाद में मनमोहन सिंह के काल में ईसाई मिशनरियों को उन इलाकों में भी गतिविधियां चलाने की इजाज़त दी गई जो आदिवासी होने के कारण संरक्षित माने जाते हैं। नतीजा ये निकला कि बीते करीब 3 दशक में देश के तमाम आदिवासी इलाके ईसाई मिशनरियों के चंगुल में फंस चुके हैं। जबकि इसी दौरान हिंदू संगठनों के लिए इन इलाकों में काम करना लगभग नामुमकिन बना दिया गया।

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