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JNU में बुरी तरह पीटे गए थे कारगिल के हीरो

JNU kargilलखनऊ। जेएनयू के छात्रों के समर्थन में आने वालों के लिए ये जानना बेहद जरूरी है कि इसी जेएनयू कैंपस में 29 अप्रैल 2000 में कारगिल के हीरो रहे आर्मी के दो मेजरों को बुरी तरह पीटा गया था। जेएनयू विवाद के बाद सोशल मीडिया पर ये मामला खूब शेयर किया जा रहा है। इस मामले को लोकसभा की कार्रवाई में भी उल्लेखित किया गया था।


घटना 29 अप्रैल 2000 की है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में उस वक्त भी एक सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ था। इस गंगा ढाबे के पास आयोजित इंडो-पाक मुशायरे में पाकिस्तान से भी शायर आए हुए थे। ओपन एंट्री होने के कारण दिल्ली के रहने वाले मेजर केके शर्मा, मेजर एलके शर्मा और डॉ. शरद भी मुशायरा सुनने पहुंचे थे। इसी मुशायरे में पाकिस्तानी शायर फहमिदा रियाज भी शामिल थीं। कार्यक्रम के आयोजक सीपीएम की छात्र विंग स्टूडेंट फेडेरेशन ऑफ इंडिया के कार्यकर्ता थे।


मुशायरे के दौरान पाकिस्तानी शायर फहमिदा रियाज ने भारत विरोधी कुछ बातें कहीं। इस पर हॉल में बैठे मेजर केके शर्मा और एलके शर्मा ने विरोध किया। यह देख वामपंथी छात्रों ने इन दोनों को घेर लिया और पूछा कौन हो तुम लोग… कहां से आये हो। दोनों से जवाब दिया कि हम दोनों आर्मी के मेजर हैं और कारगिल में पाकिस्तानियों से लड़कर छुट्टी बिताने दिल्ली आए हैं। दोनों ने अपने आई कार्ड निकाल कर छात्रों को दिखाए। वह बोले की हम भारत की बुराई नहीं सुन सकते हैं। इतने में ही छात्रों ने दोनों मेजरों को मारना शुरू कर दिया।

इनमें से एक ने सेल्फ डिफेंस में अपनी पिस्तौल निकाली और छात्रों को पीछे रहने को कहा। इतने में ही छात्रों ने पीछे से मारना शुरू कर दिया। इस दौरान मंच से इन लोगों के खिलाफ नारेबाजी की जा रही थी। दोनों को इतना मारा गया कि वह अधमरे हो गए। इन्हें मरा समझ कर छात्रों ने वहीं पर छोड़ दिया। यूनिवर्सिटी की तरफ से मामले की जानकारी पुलिस की दी गई और पुलिस ने इन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। बताया जाता है कि इस मारपीट की घटना को एक टीवी चैनल के पत्रकार ने अपने कैमरे में कैद किया था।

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इन छात्रों ने जबरन कैमरे का टेप छीन लिया और उन्हें कैंपस से भगा दिया। बाद में इन घायलों का क्या हुआ इस बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन बताया जाता है कि उनमें से एक की मौत हो गई थी। मामले को दो मई 2000 को लोकसभा में भी उठाया गया, लेकिन इसके बाद भी आरोपियों पर कार्रवाई नहीं की गई। इस मामले में रिटायर्ड मेजर जनरल बीसी खंडूरी ने लोकसभा में कहा, मुशायरे में पाकिस्तानी शायरों ने भारत विरोधी बातें कही थी। जिसे घायल मेजर सहन नहीं कर पाए और उन्होंने इसका विरोध किया।

खंडूरी ने कहा, ये घटना जेएनयू कैंपस में रात एक बजे हुई थी और अगले दिन सुबह आठ बजे पाकिस्तानी चैनलों पर इस बारे में खबर चल रही थी। इससे साबित होता है कि ये सब प्लानिंग से किया गया था। मामले में जेएनयू के कुछ शिक्षकों ने भी सवाल खड़े किए थे। बताया जाता है कि इस मुशायरे में एक लाख का खर्च आया था। ये पैसे कहां से आए इसका खुलासा नहीं किया गया। मामले में जेएनयू प्रशासन की तरफ से कहा गया था कि दोनों मेजर शराब के नशे में थे और वह बदतमीजी कर रहे थे। सवाल उठता है कि क्या ऐसे में उन्हें पुलिस के हवाले नहीं करना चाहिए था। तत्कालीन लोकसभा सदस्य सोमैया ने भी इस मामले में कार्रवाई की मांग की थी।

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