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बांग्लादेश के मोर्चे पर भारत ने दिया चीन को झटका

Modi-Haseenaढाका। नरेंद्र मोदी के कमान संभालने के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में ऊंचाई देखने को मिल रही है। भारत के सरकारी फर्म ने बांग्लादेश में पावर प्लांट लगाने के लिए 1.6 बिलियन डॉलर के कॉन्ट्रैक्ट को अंतिम रूप दे दिया है। इस कॉन्ट्रैक्ट को भारत का चीन पर भारी पड़ने के रूप में देखा जा रहा है। इस इलाके की दो बड़ी ताकतें भारत और चीन के बीच व्यापारिक संघर्ष छोटे देशों में चल रहे हैं।

श्रीलंका में चीनी डिवेलपमेंट प्रॉजेक्ट की कामयाबी के बाद बांग्लादेश में भारत की पहुंच उसे राहत पहुंचाने की तरह है। भारत को इस इलाके में चीन के बढ़ते दबदबे का अहसास पूरी तरह से है। जो देश अतीत में कभी भारत के बेहद करीब रहे थे वहां चीन की मौजूदगी लगातार बढ़ती गई। भारत मानता है कि बांग्लादेश भारतीय उपमहाद्वीप का हिस्सा है और इस उपमहाद्वीप में चीन का दबदबा लगातार बढ़ रहा है। चीन का फैलाव पाकिस्तान में ग्वादर पोर्ट से लेकर अफ्रीकी तट जिबूती तक हो रहा है। चीन यहां नेवी बेस बना रहा है।

वर्षों की बातचीत के बाद भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) दक्षिणी बांग्लादेश के खुलना में 1,320 मेगावॉट थर्मल पावर स्टेशन स्थापित करने के लिए 28 फरवरी को समझौते पर हस्ताक्षर करने जा रहा है। इस बात की पुष्टि नई दिल्ली और ढाका के अधिकारियों ने की है।

चीन हार्बिन इलेक्ट्रिक इंटरनैशनल कंपनी लिमिटेड का ईरान, तुर्की और इंडोनेशिया समेत कई देशों में पावर प्रॉजेक्ट है। बांग्लादेश के अधिकारियों ने कहा कि चीन को टेक्निकल आधार पर यहां पावर प्रॉजेक्ट लगाने का मौका नहीं मिला। उन्होंने यह बात पहचान नहीं जाहिर करने की शर्त पर कही। हालांकि बाांग्लादेश-इंडिया फ्रैंडशिप पावर कंपनी लिमिटेड के प्रवक्ता अनवारुल अजिम ने कहा कि भेल ने सबसे कम की बोली लगाई थी।

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भारतीय सरकार को विदेशों में प्रॉजेक्ट के लिए कर्ज मुहैया कराने वाला एग्जिम बैंक ने भेल को इस प्रॉजेक्ट के लिए खुलकर मदद की। वह इस प्रॉजेक्ट की कुल लागत में कम ब्याज पर 70 पर्सेंट फंड मुहैया कराएगा। यह बात एक भारतीय अधिकारी ने बताई लेकिन उन्होंने अपनी पहचान जाहिर नहीं करने की बात कही। एग्जिम बैंक यह कर्ज एक पर्सेंट लाइबर पर देगा। लाइबर इंटरनैशनल कर्ज देने का ब्याज मानक है। शुक्रवार को लाइबर एक साल में एक डॉलर के कर्ज पर 1.13 पर्सेंट था।

एग्जिम बैंक के डेप्युटी डायरेक्टर डेविड रसकिना ने कहा, ‘एग्जिम इस प्रॉजेक्ट को लेकर बेहद सकारात्मक है। हम इसे लेकर आशान्वित हैं। हम चाहते हैं कि यह प्रॉजेक्ट मुकाम तक पहुंचे।’

भारतीय पावर फर्म का विदेश में यह सबसे बड़ा प्रॉजेक्ट होगा। इससे पहले भारत रवांडा में एक पावर प्लांट बना चुका है और श्रीलंका में बनाने की तैयारी में है। बांग्लादेश में प्रॉजेक्ट को हासिल करने में लगी चीनी कंपनी ने अभी तक इस पर कुछ कहा नहीं है। लेकिन हार्बिन के आफ्टर-सेल सर्विस डिपार्टमेंट ने कहा, ‘कंपनी इस तरह के कई टेंडर्स में लगी हुई है। यह बहुत सामान्य सी बात है।’

दूसरा झटका
हाल के वर्षों में इंडिया और चीन के बीच इस इलाके में इंफ्रास्ट्रक्टर प्रॉजेक्ट को लेकर होड़ बढ़ी है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने छोटे पड़ोसियों के साथ संबंधों में ऊर्जा भरने की कोशिश कर रहे हैं। चीन का बांग्लादेश में प्रॉजेक्ट हासिल नहीं करना दूसरा झटका है। इससे पहले जापान ने पिछले साल बांग्लादेश के पोर्ट सेक्टर से चीन को बेदखल किया था। जापान ने बांग्लादेश में समुद्र तट पर बंदरगाह बनाने के लिए 80 पर्सेंट वित्तिय मदद की। इस प्रॉजेक्ट को लेकर भी चीन बांग्लादेश से बाचतीत कर रहा था। भारत के प्रस्तावित पावर प्लांट की बांग्लादेश में 660MW की दो यूनिट होगी। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक 160 मिलियन की आबादी वाले बांग्लादेश की 60 पर्सेंट आबादी को इससे बिजली मिलेगी।

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