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यूपी का अगला डीजीपी कौन: जुगाडू भावेश या सीनियर रजनीकांत

लखनऊ।  यूपी में डीजीपी सुलखान सिंह को सेवाविस्तार मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही। ऐसे में नए डीजीपी की तलाश अब योगी सरकार को करनी होगी। मौजूदा डीजीपी सुलखान सिंह 30 सितंबर को रिटायर हो रहे हैं। डीजीपी बनने की रेस में तीन नाम आगे बताए जा रहे हैं। मीडिया की कई रिपोर्ट भी इन्हीं तीन नामों की चर्चा है। हालांकि योगी सरकार किसी और को भी डीजपी बनाकर चौंका सकती है। सत्ता के गलियारे में चर्चा है कि योगी सरकार कुर्सी के लिए वरिष्ठता देखेगी या फिर जोड़ जुगाड़ और जाति।

अगर सीनियारिटी की बात करें तो रजनीकांत मिश्रा की दावेदारी मजबूत हैं। 1984 बैच के आइपीएस हैं। फिलवक्त सीमा सुरक्षा बल(बीएसएफ) में एडीजी हैं। सीबीआई में काम करने का लंबा अनुभव है। जावीद अहमद के हटने के बाद भी रजनीकांत डीजीपी की रेस में थे, मगर सुलखान सिंह ज्यादा वरिष्ठ ठहरे थे। जिससे रजनीकांत उस वक्त चूक गए थे। माना जा रहा कि अगर योगी सरकार वरिष्ठता को मानक बनाएगी तो फिर रजनीकांत की डीजीपी बनने की मुराद पूरी हो सकती है। वैसे रजनीकांत ने कभी डीजीपी बनने की चाहत नहीं जताई है, मगर सूबे में पुलिस महकमे की सर्वोच्च कुर्सी पर कौन नहीं बैठना चाहता।  हर पुलिस अफसर की डीजीपी बनने की मुराद होती है।

आइपीएस भावेश कुमार सिंह योगी आदित्यनाथ के करीबी माने जाते हैं। गोरखपुर में आइजी भी रह चुके हैं। लिहाजा योगी से पुरानी जान-पहचान है। अगर योगी से जान-पहचान को भुनाने में भावेश कुमार सफल हुए तो डीजीपी की कुर्सी पर बैठ सकते हैं। हालांकि रजनीकांत से जूनियर होना भावेश के लिए थोड़ा नुकसानदायक हो सकता है। यूपी के पिछले 35 डीजीपी में सिर्फ 7 मामलों में ही वरिष्ठता को आधार माना गया. फिलहाल भावेश इंटेलीजेंस की कमान बतौर डीजी संभाल रहे हैं।

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तीसरा नाम ओम प्रकाश सिंह का है। 1983 बैच के आईपीएस अफसर ओम प्रकाश केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के करीबी माने जाते हैं। फिलहाल ओमप्रकाश केंद्रीय औद्यौगिक सुरक्षा बल के डायरेक्टर जनरल हैं।

यूपी में जाति देखकर बड़े पदों पर अफसरों को बैठाने के ढेरो उदाहरण हैं। जिस पार्टी की सरकार रही या तो वह अपने वोटबैंक में शामिल जाति के व्यक्ति को मुख्य सचिव और डीजीपी बनाती रही या फिर मुख्यमंत्री अपनी जाति को वरीयता देते रहे। मसलन, अखिलेश यादव ने सपा सरकार में पहले जगमोहन यादव को डीजीपी बनाया, फिर पार्टी के मुस्लिम वोटबैंक को साधने के लिए जावीद अहमद को। मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ठाकुर जाति से हैं। उन्होंने सुलखान सिंह को जब डीजीपी बनाया था तो विरोधियों ने इसे जाति से जोड़ा था। हालांकि सुलखान सबसे सीनियर थे, इस नाते आरोप चस्पा नहीं हो सका था। अब सीनियारिटी के मामले में रजनीकांत मिश्रा अव्वल हैं। सवाल है क्या योगी सीनियारिटी को तवज्जो देकर रजनीकांत को डीजीपी बनाएंगे। या फिर भावेश कुमार सिंह और ओमप्रकाश सिंह में किसी एक को चुनेंगे। ऐसा भी हो सकता है कि योगी किसी अन्य तेजतर्रार आइपीएस को डीजीपी बनाने का फैसला करें, जो यूपी से बदमाशों का नामोनिशान मिटाने की क्षमता रखता हो। क्योंकि मुख्यमंत्री योगी ने बदमाशों के एनकाउंटर का अभियान सूबे में शुरू करा रखा है।

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