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बच्चों के यौन शोषण का अड्डा बन रहे हैं क्रिश्चियन कान्वेंट स्कूल

लखनऊ। पूरे देश में ईसाई कॉन्वेंट स्कूलों में मासूम बच्चों के यौन शोषण के मामलों की संख्या में तेज़ी से इजाफा हुआ है। इस कारण इन स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों मासूमों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इससे जुड़ा मामला जनवरी में सामने आया है केरल का, जहां कोच्चि के किंग्स डेविड इंटरनेशनल स्कूल के प्रिंसिपल फादर बेसिल कुरियाकोस को पुलिस ने 10 साल के लड़के का यौन शोषण करने के आरोप में हिरासत में लिया है।

बच्चे के साथ हुई गन्दी हरकत के बारे में जब उसने मां-बाप को बताया तब 65 साल के इस वहशी पादरी की गिरफ्तारी हुई। सबसे हैरानी की बात तो ये है कि कॉन्वेंट स्कूलों में किये जा रहे बच्चों के यौन शोषण से जुड़े ज्यादातर मामलों में आरोपियों की उम्र 50 वर्ष से अधिक रही है।

सबसे खराब हालात बोर्डिंग स्कूलों में

पिछले 3 से 4 वर्षों के आंकड़ों पर गौर करने पर पता चलता है कि अन्य स्कूलों की तुलना में कॉन्वेंट स्कूलों में यौन शोषण के मामले ज्यादा रहे हैं। इनमे भी सबसे ज्यादा खराब स्थिति पायी गयी है बोर्डिंग स्कूलों में। कोच्चि के जिस कान्वेंट स्कूल का ये मामला पुलिस के पास आया है वो भी एक बोर्डिंग स्कूल ही है। पांचवीं कक्षा में पढ़ रहे इस मासूम बच्चे से मिलने उसका बड़ा भाई स्कूल आया था, तब मासूम ने पहले अपने भाई को अपने साथ हुई घिनौनी हरकत के बारे में बताया, इसके बाद बात बच्चे के माता-पिता तक पहुची और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पादरी की घिनौनी हरकत का शिकार हुआ मासूम बेहद डरा-सहमा हुआ है और वापस स्कूल जाने के लिए तैयार नहीं है।

सिर्फ नन ही नहीं, बच्चे भी बन रहे हैं शिकार

धार्मिक अध्ययन के प्रोफेसर मैथ्यू शेल्म्ज़ (Mathew N. Schmalz) ने 2002 में एक लेख में इस बात को स्वीकार किया था कि “पूरे भारत में फैले केथलिक चर्चों में नन और मासूम बच्चों के साथ हो रहे यौन शोषण के मामलों में बढ़त आयी है। हालांकि इस बारे में ज्यादा चर्चा नहीं की जाती है और ज्यादातर केस तो पुलिस और अदालत तक कभी पहुंच ही नहीं पाते।” दूरदराज के इलाकों में चल रही मिशनरी में यौन शोषण के अधिकतर मामले दबकर रह जाते हैं क्योंकि पीड़ित लोग अक्सर गरीब तबके के होते हैं और पैसे देकर उनका मुह बंद करा दिया जाता है। इससे भी एक कदम आगे बढ़कर आदिवासी इलाकों में तो इन गंदे कामों को भगवान को ‘खुश’ करने के नाम पर किया जाता है। एक अनुमान के मुताबिक इन इलाकों में होने वाले यौन अपराधों में एक प्रतिशत केस ही पुलिस में रिपोर्ट हो पाते हैं।

2014 में 9 साल की मासूम बच्ची से बलात्कार के मामले में केरल के त्रिचूर में सेंट पॉल चर्च के पादरी राजू कोक्कन को भी गिरफ्तार किया गया था। चर्च के अंदर दरिंदगी का ये अब तक का सबसे खौफनाक केस माना जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक़ ये वहशी पादरी बच्ची को चॉकलेट का लालच देता था और उसके बाद उसे अपनी हवस का शिकार बनाता था। कम से कम तीन बार तो उसने ये दरिंदगी चर्च के अंदर अपने कमरे में की थी।

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2014 में ही फरवरी से अप्रैल महीने के बीच केरल के ही तीन केथलिक पादरियों को बच्चों के बलात्कार के मामले में गिरफ्तार किया गया। इनमे से अधिकतर मामलों में ईसाई संगठन शर्मिंदा होने की जगह अपने पादरियों के बचाव में दिखाई दिए।

2016-दिसंबर  के महीने में भी केरल के एर्नाकुलम में एक नाबालिग बच्ची का बलात्कार करने के आरोप में 41 साल के पादरी एडविन फिगारेज को अदालत ने एक साथ दो-दो उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी। ये पादरी एक कलाकार भी था और इसके कई म्यूजिक एलबम भी बाजार में चल रहे हैं। बच्ची को संगीत की शिक्षा देने के नाम पर इस कलाकार पादरी ने उस मासूम के साथ कई महीनों तक दरिंदगी की। मामला पुलिस में दर्ज होने के बाद अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए ये पादरी काफी वक़्त तक फरार भी रहा था।

बिना कोई जांच-पड़ताल के बनाए जा रहे पादरी

भारत में पादरियों द्वारा बलात्कार की संख्या बढ़ने के पीछे एक अहम् वजह ये है कि यहां बिना कोई जांच-पड़ताल किये ही पादरी बनाए जा रहे हैं। यहां तक कि अन्य देशों में यौन शोषण व् दूसरे अपराध के मामले में पकड़े गए कई पादरी भी वहां से फरार होकर भारत आ गए और यहां बाइज्जत उन्हें किसी चर्च में पादरी के तौर पर नियुक्त कर दिया गया। कुछ ही वक़्त पहले ऐसा ही एक मामला सामने आया था जिसमे जोसेफ पी जयापॉल नाम के भारतीय मूल के एक पादरी पर एक अमेरिकी लड़की ने अपने बचपन में बलात्कार का आरोप लगाया था।

अमेरिकी लड़की के बलात्कार के मामले में अमेरिकी कोर्ट में उसने अपना गुनाह कबूल भी किया था, मगर सजा से बचने के लिए वो अमेरिका से भागकर भारत आ गया था। भारत में वेटिकन ने उसे तमिलनाडु के एक चर्च का पादरी भी नियुक्त कर दिया।

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