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यश से तो अखिलेश को मिला केवल अपयश

आरटीआई से हुआ खुलासा, अखिलेश सरकार ने 142 अपात्रों को किया यश भारती से उपकृत

अंधा बांटे रेवड़ी आपा-आपा देय की तर्ज पर बांटे यश भारती पुरस्कार

राजेश श्रीवास्तव

लखनऊ । यश भारती पर अखिलेश सरकार के संबंध में हुए आरटीआई के खुलासे ने यश भारती जैसे पुरस्कारों पर सवाल ही नहीं खड़े किये बल्कि इनकी विश्वसनीयत पर ही प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। हालांकि यह आज का नया विषय नहीं है। आज सिर्फ इतना भर हुआ है कि अखिलेश सरकार ने 142 अपने लोगों को रेवड़ी बांटी है, इसकी पुष्टि हुई है। हास्यास्पद यह है कि इस रिपोर्ट के आने के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कोई सफाई देते नहीं दिख रहे हैं बल्कि यह कह रहे हैं कि यूपी की वर्तमान भाजपा सरकार को इन पुरस्कारों की पेंशन राशि बढ़ा देनी चाहिए। इस पुरस्कार को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तब ही विवादों में खड़ा कर दिया था जब उन्होंने पुरस्कार देने के दौरान कार्यक्रम का संचालन कर रही महिला से प्रभावित होकर उसे ही यशभारती देने का ऐलान कर दिया था।

यही क्यों जब दूसरी बार पुरस्कार बांटे जा रहे थे तब  भी दो नामों का और ऐलान मंच पर किया गया। इस तरह की मुनादी के बाद साफ मालुम हो गया था कि इन पुरस्कारों को देने के पीछे सरकार ने न किसी समिति की सिफारिश को आधार बनाया। न ही पुरस्कार देने वालों की योग्यता का। गौरतलब है कि यश भारती पुरस्कारों की परंपरा पूर्व मुख्यमंत्री और सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने शुरू की थी । बीती अखिलेश सरकार में केवल उन्हीं लोगों को पुरस्कार रूपी रेवड़ी बांटी गयी जो सरकार के करीबी थे या फिर मददगार। अंधा बांटे रेवड़ी आपा-आपा देय की कहावत पर ही अमल करती दिखी अखिलेश सरकार। ऐसे-ऐसे लोगों को रेवड़ी बांटी जो न पुरस्कार योग्य थ्ो और न ही पेंशन योग्य। वह तो भला हो शताब्दी के नायक अमिताभ बच्चन का कि उन्होंने पेंशन लेने से इंकार कर दिया।

पूर्व की अखिलेश सरकार ने जिन लोगों को पुरस्कार दिया उनमें से अधिकांश लोग आर्थिक रूप से इतने अधिक सक्षम हैं कि उन्हें पेंशन की जरूरत ही नहीं है। बल्कि कुछ तो ऐसे हैं जो लाखों रुपये का व्यवसाय भी कर रहे हैं। रोक दी गई है पेंशन की राशि उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग की ज्वाइंट डायरेक्टर अनुराधा गोयल ने ताया कि 2०17-18 में इन लोगों को पेंशन देने के लिए 4.66 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे, लेकिन अभी तक इसमें से एक भी पैसा खर्च नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि विभाग के डायरेक्टर ने इस लिस्ट की समीक्षा करने की बात कही है। वहीं इस पूरे मसले पर संस्कृति मंत्री लक्ष्मी नारायण का कहना है कि यश भारती पुरस्कारों पर सरकार में विचार चल रहा है, लेकिन अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है।

इस पूरे खुलासे पर सपा के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि भाजपा सपा सरकार के सभी अच्छे कामों को रोक देना चाहती है, यश भारती पुरस्कार समाज में अलग-अलग हिस्सों में अहम योगदान देने वालों को दिया गया था, हर एक नाम का चयन उच्च स्तरी कमेटी के द्बारा चुना गया गया था। खुलासा : 21 लोगों ने खुद के लिए सम्मान मांगा अखिलेश सरकार ने ऐसे-ऐसे लोगों को यह पुरस्कार बांटा था जिनका साहित्य या समाज में कोई खास योगदान नहीं है और इनकी सिफारिश भी संदेह के घेरे में है। अखिलेश सरकार के दौरान एक टीवी एंकर जिसने सैफई में महोत्सव के दौरान कार्यक्रम का संचालन किया था, उसे यश भारती पुरस्कार दिया गया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री कार्यालय में एक अधिकारी ने अपने ही नाम की संस्तुति इस पुरस्कार के लिए कर डाली, एक शोधकर्ता के नाम को जिसका दावा है कि उसने मेघालय में दो महीने के फील्ड वर्क के लिए इस पुरस्कार की संस्तुति की। यहां गौर करने वाली बात यह है कि इन तमाम लोगों के नाम की संस्तुति अखिलेश यादव के अंकल और एक स्थानीय एडिटर ने की थी।

वर्ष 2०12-17 के बीच बांटे गए यश भारती पुरस्कारों को किस तरह से रेवड़ी की तरह बांटा गया है, इसका खुलासा एक आरटीआई के जरिए हुआ है। इस सम्मान की शुरुआत लोगों के भीतर समाज के प्रति जागरुकता को बढ़ाने के लिए की गई थी, जिसके तहत विजेता को एकमुश्त 11 लाख रुपए दिए जाते हैं साथ ही हर महीने 5० हजार रुपए की पेंशन भी दी जाती है। इस पुरस्कार की शुरुआत मुलायम सिह यादव ने 1994 में की थी, लेकिन बाद में इस पुरस्कार को भाजपा और बसपा की सरकारों ने बंद कर दिया था।

एक अखबार ने 2०12-17 के दौरान दिए गए 2०० यश भारती पुरस्कार विजेताओ के नाम की जानकारी आरटीआई के जरिए मांगी थी, जिसमें से 142 लोगों के बारे में जानकारी मुहैया कराई गई है। इस जानकारी से इस बात का खुलासा होता है कि ज्यादातर लोगों को यूं ही यह पुरस्कार लोगों की संस्तुति के आधार पर दे दिए गए थे, इस पुरस्कार को हासिल करने वाले ज्यादातर लोग समाजवादी पार्टी के हैं और अधिकतर लोगों के नामों की संस्तुति मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से की गई है, हालांकि इस पुरस्कारों बांटने का जिम्मा संस्कृति मंत्रालय के पास था।

आरटीआई में इस बात का खुलासा हुआ है कि 21 ऐसे लोगों यह सम्मान दिया गया जिन्होंने खुद मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर इस सम्मान की मांग की थी। छह लोगों के यहा सम्मान समाजवादी पार्टी के नेताओं के कहने पर दिया गया, जिसमें से दो नाम खुद अखिलेश यादव के अंकल शिवपाल यादव ने बढ़ाया था, वहीं एक नाम को आजम खान ने आगे बढ़ाया था, जिसे यह सम्मान दिया गया था। दो लोगों को यह सम्मान राजा भैया के कहने पर दिया गया था। तीन लोगों को यह सम्मान एक अखबार की स्थानीय संपादक के कहने पर दिया गया। उक्त संपादक ने मुख्यमंत्री को एक मेल के जरिए इन लोगों को यह सम्मान देने की सिफारिश की थी।

गौरतलब है कि योगी सरकार पहले ही जिन लोगों को यश भारती सम्मान दिया गया है उसकी जांच कर रही है, साथ ही सरकार लाइफटाइम पेंशन दिए जाने को रोकने पर भी विचार कर रही है। यहां गौर करने वाली बात यह है कि आईएएस अधिकारी की 19 साल की बेटी को भी यह सम्मान दिया गया है। आपकी सरकार है आप भी दे दो : अखिलेश यश भारती अवार्ड पर यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए कहा कि ‘कुछ लोग कह रहे हैं कि समाजवादी लोगों ने अपने खास लोगों को यश भारती अवार्ड दे दिया।’ अखिलेश ने जवाब देते हुउ कहा कि ‘हम तो कहते हैं आपकी सरकार है आप भी अपने लोगों को दे दो हम कौन सा आपको रोक रहे हैं।’