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विशालकाय टॉवर खड़े हो गए, नहीं मिले पुलिस को फ्लैट

pd logमुंबई। मुंबई पुलिस की मालकियत की ताडदेव की बेशकीमती जमीन पर दो विशालकाय टॉवर बनकर तैयार हैं। इसके बदले बिल्डरों ने पुलिस विभाग को फ्लैट देने का वादा किया था, जिस पर अमल नहीं किया जा सका। पुलिस वालों के लिए 18 मंजिला टॉवर स्वप्न बनकर रह गए हैं। पिछले साल जून में तत्कालीन पुलिस कमिशनर राकेश मारिया ने मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा को सौंप दी थी। मामला तब से आगे नहीं बढ़ा है। निर्माण करने वाली कंपनी ‘एस.डी. कॉर्पोरेशन’ है। जानमानी हस्ती, शापूरजी पालनजी इस निर्माण कंपनी के पार्टनर हैं। पालनजी को मौजूदा सरकार ने पद्मश्री से नवाजा है।

दक्षिण मुंबई के आलीशान ताडदेव इलाके में मुंबई पुलिस की 87319 वर्गमीटर की जमीन है। सीटी सर्वे 725 के इसी प्लॉट पर ताड़देव पुलिस स्टेशन है। 74 अफसरों और 524 सिपाहियों के क्वार्टर हैं। इस ‌विशाल भूखंड का अधिकांश 42600 वर्ग मीटर का क्षेत्र झुग्गी-झोपड़ियों ने भरा पड़ा है। 1989 में ‘एमपी मिल कंपाउंड’ नाम से जानी जानेवाली जमीन पर झोपड़पट्टी योजना मंजूर हुई। कुछ शर्तों के तहत पुलिस विभाग ने इसको मंजूरी दी। तय हुआ था कि 42600 वर्ग मीटर जमीन में से 33100 वर्ग मीटर पुनर्विकास के लिए इस्तेमाल की जाएगी। बाकी 9500 वर्ग मीटर मूल मालिक पुलिस विभाग के लिए रखी जाएगी।

झोपडपट्टी विकास प्राधिकरण (एसआरए) ने सितंबर 2005 में आदेश दिया कि खुली जगह के बदले बने हुए मकान पुलिस को सौंपे जाएंगे। यह कुल जमीन का 25% होगा। एसआरए के पत्र में पुलिस की जमीन का हिस्सा 9500 की जगह 9100 वर्ग मीटर दिखाया गया। इस हिसाब से पुलिस के हिस्से 3025 मीटर बिल्ट-अप एरिया ही आया। 400 वर्ग मीटर जमीन किस तरह एकाएक एसआरए के रिकॉर्ड से गायब कर दी गई, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक हिमांशु राय इसकी जांच करवाने का आग्रह किया। राय ने पुलिस कमिशनर के पत्र लिखकर बताया कि एसडी कार्पोरेशन के पास 42600 वर्ग मीटर जमीन होनी चाहिए थी। उनके पास इसके कहीं ज्यादा जमीन है। तब तक टावर खड़े हो चुके थे और पुलिस के हिस्से कोई जमीन नहीं आई थी। हिमांशु राय ने जांच करके मामले की सिविल और क्रिमिनल लाइबिलिटी फिक्स करने की मांग रखी। महाराष्ट्र के अतिरिक्त मुख्य सचिव केपी बक्शी को इसकी सूचना दी गई। पुलिस विभाग ने पुलिस वालों के लिए 18 मंजिला बिल्डिंग का प्लान बिल्डर को फरवरी 2015 में सौंपा था, इसे भी ‘महाराष्ट्र पुलिस हाउसिंग एंड वेल्फेयर कार्पोरेशन’ ने वापस ले लिया।

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आरटीआई एक्सपर्ट अनिल गलगली ने पुलिस हाउसिंग संबंधित ब्योरा प्राप्त किया है। इसमें तीन और मामले भी सामने आए हैं। फर्क यह है कि तीनों बिल्डर पुलिस का हिस्सा देने को तैयार हो गए हैं। वर्सोवा स्थित यारी रोड पर मेसर्स लॉजीस्टिक्स कंपनी ने पुलिस के नाम पर आरक्षित 11 फ्लैट देने पर सहमति जताई हैं। म्हाडा की मालिकाना जमीन पर 748 वर्ग मीटर जमीन पुलिस विभाग के लिए आरक्षित हैं। मेसर्स रिचा डेवलपर्स अब पुलिस को बिनामूल्य पुलिस स्टेशन बनाकर दे रही हैं और 60 फ्लैट सहूलियत के दाम पर बनाकर देने के लिए राजी हुई है। विक्रोली, टागोर नगर स्थित इमारत क्रमांक 54 में 8 फ्लैट पुलिस विभाग की प्रॉपर्टी थी लेकिन बिल्डर मेसर्स आदित्य इंटरप्राइजेस ने ‘पुलिस विभाग की अनुमति के बिना’ डायरेक्ट पुर्नविकास किया। बाद में बिल्डर ने म्हाडा की अनुमति लेने की जानकारी दी और कुछ बकाया रकम अदा करने के बाद मुंबई पुलिस को 8 फ्लैट देगी।

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