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प्रभु की ट्रेन में ‘सोना मना है’!

pd logमुंबई। पिछले कुछ दिनों से ट्रेनों में चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। चोरों द्वारा खासतौर पर एसी कोच के यात्रियों को टारगेट किया जा रहा है। इन घटनाओं के लिए वेस्टर्न रेलवे पर सूरत से बडौदरा सेक्शन तक सबसे ज्यादा संवेदनशील क्षेत्र है।

गुरुवार देर रात इंदौर से मुंबई तक चलने वाली अवंतिका एक्सप्रेस के तीन ए.सी. कोच में चोरी की घटनाएं हुईं हैं। इससे पहले 9 फरवरी को देहरादून एक्सप्रेस के शयनयान और ए.सी. कोच में चोरी की लगभग आधा दर्जन घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं। कई मामलों में चोरी को अंजाम देने वाले टिकट बुक कराकर यात्रा कर रहे हैं और सामान पर हाथ साफ कर बीच रास्ते में उतर जाते हैं। ऐसी एक घटना 9 फरवरी को अहमदाबाद से पुणे के बीच चलने वाली ट्रेन में रिपोर्ट हुई है। इन घटनाओं ने रेलवे की चिंता बढ़ा दी है।

 अवंतिका एक्सप्रेस के बी-1 कोच के पीड़ित यात्री ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि रात 1 बजे से सुबह 5 बजे के बीच वो सो रहे थे। उनका सामान सबसे अंदर वाली यानी खिड़की के पास वाली सीट के नीचे रखा था। वे जब सुबह उठे, तो उनका सामान गायब मिला। इस दौरान पता चला कि ट्रेन के बी-5 और ए-1 कोच के दो यात्रियों के सामान भी कोई चुराकर ले गया। पीड़ितों के अनुसार सीट के नीचे बंधे हुए सामान को भी चोर चेन काटकर ले गए।

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9 फरवरी को अहमदाबाद से पुणे की बीच चलने वाली ट्रेन के ए.सी. कोच में चोरी की घटना हुई थी। पुलिस इस घटना को अंजाम देने वाली महिला को तलाश रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार यह ट्रेन जब विरार स्टेशन के पास सिग्नल पर रुकी, ए.सी. कोच में चोरी करने वाली महिला अपने सामान के साथ ट्रेन में सो रहे अन्य यात्रियों का सामान भी लेकर उतर गई।

ट्रेन की सुरक्षा के लिए रेलवे सुरक्षा बल को तैनात तो किया गया है लेकिन उनकी हालत बिना गोली की बंदूक जैसी है। रेलवे परिसर में हो रही चोरियों में आरोपी को पकड़कर जीआरपी के हवाले करना पड़ता है। कई बार एफआईआर को टालने के लिए भी पीड़ित और आरोपी के बीच सुलह करा दी जाती है। चोरी का मोबाइल मिलने पर पीड़ित को बताया जाता है कि कोर्ट प्रक्रिया से गुजरने के बजाय बिना शिकायत दर्ज कराए मोबाइल ले जाना बेहतर रहेगा। आरपीएफ को आईपीसी के मामलों में जांच की कोई पावर नहीं है।

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