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बड़ी कठिन है डगर पनघट की……उ.प्र. चुनाव में नेताओं को तो हरा दिया,अब इन भ्रष्ट अफ़सरों व इंजीनियर्स के गैंग…..’The Thugs of U.P.’ …

सूर्य प्रताप सिंह 
एक बेशर्म व महाभ्रष्ट IAS अधिकारी जो अपने को चार्टर्ड अकाउंटेंट कहता है और हज़ारों करोड़ कमा चुका है और पूर्व दो सरकारों को कई हज़ार करोड़ कमवा भी चुका है परंतु वार्षिक प्रॉपर्टी रिटर्न में अपने assests शून्य दिखता रहा है….. फ़ॉरेन ट्रैंज़ैक्शन/ हवाला का उस्ताद है। हाल ही में ‘मौत से सामना’ होने पर भी उसे सदबुद्धि नहीं आई…..अपने ‘दलाल’ पत्रकारों व कुछ भ्रष्ट राजनीतिज्ञों के बल से इस सरकार में भी ‘छड़ी’ के सहारे अपने पैर गढ़ाने की कोशिश में है ….
लखनऊ-आगरा इक्स्प्रेस्वे में हुए भ्रष्टाचार की जाँच में अपने पूर्व आका के साथ जेल जाना निश्चित है ….मैंने CAG बोर्ड में उक्त मामला व अन्य कई भू आवंटन व भू उपयोग परिवर्तन के नॉएडा/UPSIDC/विकास प्राधिकरणों व बिजली विभाग के इशूज रखे हैं। कई PILs भी तैयार जा रही हैं ….
उत्तर प्रदेश में केवल १०-१२ IAS अधिकारियों की काली करतूतों ने उत्तर प्रदेश में पूरी सर्विस के मुँह पर कालिख पोतकर रख दी है …. कोई ताज़िन्दगी येनकेन प्रकारेण नॉएडा/ग्रेटर नॉएडा में ही रहना चाहता है (उसने मायावती व अखिलेश यादव/रामगोपाल को ख़ूब खिलाया और ख़ुद ‘ऐड़ा-बनके-पेड़ा’ खाया)…..कोई आवास विभाग/प्राधिकरण में ही…तो कोई बिजली विभाग में …. तो कोई सोने(Gold) की दुकान खोल माध्यमिक शिक्षा विभाग में नक़ल माफ़िया के साथ ही रहना चाहता है….कोई PWD/सिंचाई जैसे विभागों में ही रहना चाहता है….कोई मंडी परिषद को अपना घोंसला बनाना चाहता है….कोई लम्बी seniority तो तोड़ मुख्यसचिव बनाना चाहता है….. ऐसा इस बड़ी service में कभी नहीं हुआ….NRHM जैस घोटाले से भी सबक़ नहीं लिया इन पापीयों ने …..दुस्साहस व बेशर्मी की हद है…आप मेरे उक्त संकेतों से इन सबकी पहचान कर सकते हो …difficult नहीं है….फ़ोटो देखलो…प्रदेश में शराब माफ़िया, रियल इस्टेट/बिल्डर्स माफ़िया,खनन माफ़िया, नक़ल माफ़िया, बिना टेंडर के ठेके देने व पाने वाला माफ़िया व सत्ता के मुँह लगे निम्न इंजीनियर्स ….बिना इन कलुषित तत्वों/अधिकारियों के survive नहीं कर सकता था…..
बिजली विभाग, UPSIDC, UPRRN, RES, PWD, NOIDA के कुख्यात इंजीनियर्स को कौन नहीं जनता…GDA/LDA के बदनाम IAS अधिकारीओ का सबको पता है…..
पिछली दो सरकारों में उत्तर प्रदेश के अधिकांश institutions की ऐसी-की-तैसी कर के रख दी …यहाँ तक कि लोकायुक्त के पद की भी नहीं छोड़ा गया….
मज़े की बात है कि नौकरशाहों लोगों के लिए political interference नाम की कोई चीज़ ही नहीं क्यों कि जब कलुषित राजनीतिक गठजोड़ (political collusion) है तो interference कहा से आ जाएगा… जब इस अफ़सरों को नेता जी की ‘हाँ-में-हाँ’ ही मिलानी है तो राजनीतिक हस्तक्षेप कहाँ से आएगा….
क्या आप मेरी उक्त बातों से सहमत हैं कि ऐसे लोगों की जाँच हो….. पोल खुले और इन्हें जेल में भी जाना चाहिए ….???

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