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नारद स्टिंग ऑपरेशन मामले की सीबीआई जांच पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

नई दिल्ली। नारद स्टिंग ऑपरेशन में फंसे तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के लिए बुरी खबर है। ये बुरी खबर पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी के लिए भी है। ममता बनर्जी तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी की अध्‍यक्ष हैं। सुप्रीम कोर्ट ने नारद स्टिंग ऑपरेशन मामले की सीबीआई जांच पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। इस स्टिंग ऑपरेशन में तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं को कथित तौर पर पैसा लेते हुए कैमरे पर दिखाया गया था। जिसके बाद ये मामला कोलकाता हाईकोर्ट पहुंच गया था। लेकिन, कोलकाता हाईकोर्ट ने इस स्टिंग ऑपरेशन की जांच सीबीआई से कराने के आदेश दे दिए थे। कोलकाता हाईकोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी और अन्‍य नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

कोलकाता हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के फैसले को तृणमूल कांग्रेस के नेता सौगत राय और अन्‍य नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। लेकिन, यहां से भी उन्‍हें मुंह की खानी पड़ी। सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए नारद स्टिंग ऑपरेशन केस में सीबीआई जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का समय 72 घंटे से बढ़ाकर एक महीने जरुर कर दिया है। दरसअल, कोलकाता हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सीबीअाई को कहा था कि वो 24 घंटे के अंदर नारद स्टिंग ऑपरेशन से जुड़ी सभी सामग्री और उपकरण अपने कब्जे में लेकर 72 घंटे के भीतर प्राथमिकी दर्ज करे। कोर्ट ने इसके साथ ही कुछ और टिप्‍पण्‍ाी भी की थी।

कोलकाता हाईकोर्ट ने अपनी इस टिप्‍पणी के सा‍थ सीबीआई को ये भी आदेश दिया था कि वो इस केस में प्राथमिकी दर्ज करने के साथ ही ही प्रारंभिक जांच को निष्कर्ष तक पहुंचाने के भी निर्देश दिए गए थे। कोलकाता हाईकोर्ट ने नारद स्टिंग ऑपरेशन ने कहा था कि प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद जरूरत पड़ने पर CBI को प्राथमिकी दर्ज करने और उसके बाद औपचारिक जांच शुरू करने के भी निर्देश दिए थे। इस स्टिंग ऑपरेशन को लेकर पश्चिम बंगाल में काफी राजनीति भी हुई थी। पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री इस मामले में बैकफुट पर आ गई थीं। इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस के नेता भी बैकफुट पर आ गए थे। ममता बनर्जी लगातार ये आरोप लगाती रही हैं कि ये सब राजनैतिक साजिश है।

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इसके साथ ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता पुलिस की जांच को रोककर इस मामले को सीबीआई को सौंपे जाने के कोलकाता हाईकोर्ट के आदेश को दुर्भाग्‍यपूर्ण करार दिया था। ममता बनर्जी इस स्टिंग ऑपरेशन में फंसे अपने मंत्रियों सुब्रत मुखर्जी, सोभन चटर्जी और फिराद हाकिम के पक्ष में खड़ी हो गई थीं। ममता बनर्जी ने दावा किया था कि भारतीय जनता पार्टी के आफिस में स्टिंग ऑपरेशन गढ़ा गया और उसे जारी किया गया। दरसअल साल 2016 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नारद स्टिंग के टेप कई समाचार संगठनों को जारी किए गए थे। इस स्टिंग में कई नेताओं को कथित तौर पर पैसा लेते हुए दिखाया गया था। नारद न्यूज ने कोर्ट में बताया था कि ये रिकॉर्डिंग आईफोन की मदद से की गई थी।

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