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सोशल इंजीनियरिंग का यह गुलदस्ता बन रहा सपा-बसपा के लिए बड़ा टेंशन

लखनऊ। जिस सोशल इंजीनियरिंग का दांव भाजपा ने यूपी विधानसभा चुनाव में चला, वही दांव अब योगी सरकार के मंत्रिमंडल में भी दिख रहा है। मंत्रिमंडल में जिस तरह से जातीय संतुलन कायम करने की कोशिश हुई है, उससे लगता है मानो यूपी की जमीन पर भाजपा ने सोशल इंजीनयरिंग का गुलदस्ता तैयार किया है। माना जा रहा है कि यह प्रयोग सभी जातियों को भाजपा से जोड़े रखने की कोशिश है। साथ ही इस आरोप को धोने की भी कोशिश है कि-भाजपा बाभन-ठाकुर या बनियों की ही पार्टी नहीं है। सामान्य, ओबीसी, अतिपिछड़े, दलित और मुस्लिम चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह देकर भाजपा ने सपा-बसपा के लिए आगे के चुनाव की डगर कठिन कर दी है।

योगी आदित्यनाथ का मंत्रिमंडल देखिए। 17 ओबीसी(यादव मंत्री सहित), छह दलित, सात ठाकुर,आठ ब्राह्मण, आठ कायस्थ-वैश्य, दो जाट और एक मुस्लिम मंत्री। गजब का गुलदस्ता है सोशल इंजीनियरिंग का, जो यूपी में तैयार किया है मोदी-शाह ने। मकसद है जातीय वोटबैंक पर टिकी सपा -बसपा की सियासत आगे के लिए और कठिन कर देना। यह भी मकसद है कि भाजपा पर बाभन-ठाकुर और वैश्यों की पार्टी का आरोप भी अब आसानी से चस्पा न हो सके। इसी के साथ भाजपा ने सबका साथ-सबका विकास का संदेश देने की भी कोशिश की है।

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