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योगी को सीएम बनाकर मोदी ने साफ कर दी अपनी मंशा

राजेश श्रीवास्तव
भारतीय जनता पार्टी ने सूबे में 325 विधायकों के सहारे ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद शनिवार को अपने मुख्यमंत्री और दो उप मुख्यमंत्रियों का नाम ऐलान किया। जब जीत भारी होती है तो सभी क्ष्ोत्रों का संतुलन साधना और सभी वर्गों को संतुष्ट रखना मुश्किल होता है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी के रणनीतिकर्ताओं और मोदी टीम के लोगों ने इस संतुलन को साध ही लिया है। यह बात और है कि हर वर्ग और हर क्ष्ोत्र को साधने के चक्कर में मुख्यमंत्री के अलावा दो-दो डिप्टी सीएम बनाने पड़े। यह उत्तर प्रदेश के इतिहास में पहला मौका है जब दो-दो डिप्टी सीएम बने हैं। दिलचस्प तो यह भी है कि तीनों माननीयों में से एक भी विधायक नहीं है। मुख्यमंत्री पद पर जिन योगी आदित्यनाथ को बिठाया गया है। वह पूर्वांचल का प्रतिनिधित्व करते हैं और कट्टर हिंदुत्व के प्रतीक माने जाते हैं।

योगी चुनाव के दौरान भी अपने बयानों को लेकर खासी चर्चा में रहते थ्ो। योगी को मुख्यमंत्री पद सौंपकर भाजपा ने अपना मंसूबा तो साफ कर दिया कि जिस छवि को लेकर वह चुनाव में उतरी वह उसी को धार देने में कतई पीछे नहीं रहेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी चुनावी सभी में कसाब, रमजान में अगर बिजली नहीं जाती तो फिर दीवाली में क्यो जाती है, यह सब नारे देकर साफ किया था कि यह चुनाव हिंदुस्तान का है और अब मुस्लिम-मुस्लिम नहीं चलेगा। इसी कारण उन्होंने लगभग हर सभा में सपा-बसपा को निशाने पर लिया था। भाजपा ने 4०3 टिकटों में भी एक भी मुस्लिम को टिकट न देकर साफ कर दिया था कि उसकी नीति और नीयत में कोई भी अंतर नहंी है।

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तभी से मोदी समर्थक ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश से योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी थी। अब जब मुख्यमंत्री पद पर योगी की ताजपोशी हो गयी है तो यह साफ हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी अब खुलकर हिंदुत्व कार्ड ख्ोलना चाहती है। इसका एक नजारा लोकभवन में तब देखने को मिला जब मुख्यमंत्री के नाम तय करने के लिए विधायक दल की बैठक चल रही थी। तभी लोक भवन का लोकार्पण करने वाली नाम पट्टिका में लिखा आजम खान नाम का उत्साही कार्यकर्ताओं ने खा ही मिटा दिया था। यह एक बानगी भर है।
भारतीय जनता पार्टी ने योगी आदित्यनाथ के बहाने मुस्लिम समाज को संदेश देने की कोशिश की कि यूपी में रहना है तो योगी-योगी कहना है। लेकिन देखना यह होगा कि मोदी ने जिन योगी को यूपी की सत्ता सौंपी है। उन पर नियंत्रण रख पाना बेहद मुश्किल होगा। योगी के साथ जिन लोगों को डिप्टी सीएम बनाया गया है उनमें लखनऊ के महापौर और पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा और पिछड़ी बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले व वर्तमान में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य भी शामिल हैं। शर्मा को सरल व सौम्य व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता है। वह बेहद सादगी पसंद हैं। हर एक से मिलना उनका सरल स्वभाव सबका पसंदीदा है। वह ब्राह्मण बिरादरी से ताल्लुक रखते हंै। जबकि केशव मौर्य के बारे में सभी जानते हैं। वह पिछड़ी जाति के गैर यादव चेहरा हैं। उनका संसदीय कार्यकाल अभी ढाई वर्ष का ही बीता है। केशव मौर्य की अगुवाई में प्रदेश में भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल किया है। भारतीय जनता पार्टी ने फिलहाल बेहद बेहतर ढंग से संतुलन साधने की बाजीगरी दिखायी है। अब देखना यह होगा कि यह बाजीगरी पार्टी को 2०19 में कितना आगे ले जायेगी।

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