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प्रशांत किशोर की सबसे बड़ी बेइज्जती…हार के बाद कांग्रेस ने किया सरेआम जलील !

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कराारी हार के बाद से कांग्रेस के लिए मुसीबतें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। हार का सदमा अभी तक बर्दाश्त नहीं हो पाया है कि अब पार्टी में हार के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट रहा है। राज्य स्तर पुर कांग्रेस के नेताओं में हार के बाद भारी गुस्सा है। खास तौर पर जिन लोगों को पार्टी के लिए रणनीति बनाने का जिम्मा दिया गया था उन को लेकर कार्यकर्ता गुस्से में हैं। इन में पहला नाम है प्रशांत किशोर का। पीके के नाम से मशहूर चुनावी रणनीतिकार को कांग्रेस ने यूपी और पंजाब में रणनीति बनाने का जिम्मा सौंपा था। दरअसल पीके की छवि चुनाव जिताऊ रणनीतिकार की बन चुकी थी। लेकिन यूपी चुनाव ने उनके करियर पर भी दाग लगा दिया है।

2014 के लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी के लिए काम करने वाले प्रशांत किशोर ने लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी का साथ छोड़ दिया। उसके बाद वो बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के खेमे में आए। बिहार में लालू और नीतीश के गठबंधन के पीछे पीके का ही दिमाग था। बिहार में जीत के बाद पीके सियासत में आम से खास हो गए। इसी को देखते हुए कांग्रेस ने उन्हे यूपी और पंजाब में पार्टी की चुनावी रणनीति बनाने का जिम्मा दिया था। पंजाब में तो पीके कामयाब रहे लेकिन यूपी ने उनकी सारी शोहरत को मिट्टी में मिला दिया। अब कांग्रेस के कार्यकर्ता पीके खिलाफ अपना गुस्सा निकाल रहे हैं। यूपी में करारी हार के बाद कांग्रेस दफ्तर के बाहर लगा एक पोस्टर इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस पोस्टर को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव राजेश सिंह की तरफ से लगाया गया है।

पोस्टर में लिखा है कि स्वयंभू चाणक्य प्रशांत किशोर को खोज कर उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ता सम्मेलन में लाने वाले किसी भी नेता या कार्यकर्ता को पांच लाख रूपये का ईनाम दिया जाएगा। बता दें कि यूपी में पीके की रणनीति के तहत की कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया था। कांग्रेस 105 सीटों पर लड़ी थी। लेकिन उसे केवल 7 सीटों पर जीत हासिल हुई। इसके बाद से कांग्रेस के कार्यकर्ता पीके को खोज रहे हैं। राजेश सिंह के मुताबिक पीके ने कांग्रेस के कार्यकर्ता सम्मेलन में कहा था कि मैं पार्टी को 220 सीटों पर जीत दिलाएंगे। इस से कम आए तो मुझे पागल घोषित कर देना। इनका कहना है कि पीके ने अति आत्मविश्वास के साथ ये सारी बातें कहीं थी। वो केवल हवा में बाते करते रहे और जमीनी हकीकत से दूर रहे।

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राजेश सिंह का कहना है कि प्रशांत किशोर बीजेपी से सुपारी लेकर कांग्रेस के साथ आए थे। उनके कारण ही पार्टी को ऐतिहासिक हार का सामना करना पड़ा है। इनका कहना है कि पीके का व्यवहार पार्टी के बड़े नेताओं के साथ अच्छा नहीं था। वो बैठकों में स्थानीय नेता3ओं को बोलने नहीं देते थे। वो पार्टी को हराने के लिए आए थे और अपनी पेमेंट लेकर किनारे हो गए। राजेश सिंह ने कहा कि इस से अच्छा प्रदर्शन तो कांग्रेस ने 2012 में किया था। जब कांग्रेस के खाते में 27 सीटें आई थी। इस पोस्टर के कारण कांग्रेस विरोधियों के निशाने पर आ गई है। हालांकि कांग्रेस के नेता सत्यदेव त्रिपाठी ने कहा है कि ये तरीका गलत है। हम कार्यकर्ताओं का सम्मान करते हैं लेकिन गुस्सा जाहिर करने का ये तरीका सही नहीं है। फिलहाल कांग्रेस के कार्यकर्ता पीके से सख्त नाराज हैं।

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