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स्मार्ट सिटी पर मोदी को कोसने वाले अखि‍लेश अपनी ही योजना भूले

Akhilesh3लखनऊ। केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी में यूपी का कोई शहर नहीं होने पर बीजेपी सरकार को कोसने वाले सीएम अखि‍लेश यादव अपनी ही योजना को भूल गए। जब मोदी ने स्वच्छता अभियान का नारा दिया तो अखि‍लेश ने ‘क्लीन यूपी ग्रीन यूपी’ का नारा दिया था। साथ ही सफाई को बढ़ावा देने के लिए साफ सुथरे वार्डों को पुरस्कार देने की भी घोषणा की थी। इसके लिए सरकार की तरफ से गाइडलाइन भी जारी की गई थी, लेकिन अब ये योजना कहां है कुछ पता नहीं। अधिकारी भी कह रहे है कि इस योजना का क्या हुआ पता नहीं। वहीं, कर्मचारियों का कहना है कि सरकार ने जब इस योजना की घोषणा की, हम लोगों ने काम भी किया, लेकिन जब इनाम की बारी आई तो सरकार योजना ही भूल गई।
दरअसल, जिस समय मोदी का सफाई अभियान चल रहा था। उसी समय यूपी सरकार ने यूपी को क्लीन और ग्रीन यूपी बनाने के लिए ऐसे वार्डों को पुरुस्कार देने की घोषणा की। इस योजना के तहत पहले नंबर पर आने वाले वार्ड को 50 लाख रुपए दूसरे स्थान पर रहने वाले वार्ड को 30 लाख रुपए और तीसरे स्थान पर रहने वाले वार्ड को 20 लाख रुपए से सम्‍मानित किया जाना है। इसको सबसे पहले मॉडल के तौर पर लखनऊ आगरा और मथुरा में लागू किया जाना था।
इसके लिए शासनादेश जारी कर दिया गया था। जो वार्ड इन छह महीनों में बनाए गए पैरामीटर में खरे उतरते है उन्हें न सिर्फ पुरुस्कृत किया जाएगा, बल्कि उन्हें सरकार की तरफ से घोषित की गई धनराशि भी दी जाएगी। जो गाइडलाइन तय की गई थी उसके मुताबिक वार्डों में सफाई और मॉनि‍टरिंग भी होने लगी थी। ये सब छह महीने तक होना था। इसके बाद दो अक्टूबर को गांधी जंयती के मौके पर वार्डों की घोषणा होनी थी, लेकिन न तो घोषणा हुई और न ही पुरुस्कार मिला। वहीं, सफाई की मॉनि‍टरिंग भी बंद हो गई।
लखनऊ नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी पीके सिंह का कहना है कि इस योजना का क्या हुआ कुछ पता नहीं है। मॉनि‍टरिंग भी बंद हो चुकी है। वहीं, पुरुस्कार भी नहीं मिला और न ही इस बात की घोषणा हुई की किस वार्ड में कैसी सफाई हुई। यूपी सफाई मजदूर संघ के प्रातीय संयोजक दुर्गेश बाल्मीकि का कहना है कि सरकार ने जब घोषणा की तो सफाई कर्मचारियों में अपने अपने वार्डों को ज्यादा से ज्यादा साफ रखने की होड़ मच गई और उन्होंने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। उन्हें पुरुस्कार नहीं दिया गया, जिससे वो मायूस हैं। सरकार को अपने किए हुए पर अमल करना चाहिए। ये योजना अच्छी थी और इससे सफाई को बढ़ावा मिलता।
किसी भी वार्ड की सफाई-व्यवस्था में मानक के तौर पर वहां की सफाई व्यवस्था किस तरह की है। वहां पर ड्रेनेज सिस्टम कैसा है। नालियों की सफाई व्यवस्था कैसी है। सड़कों पर रोजाना झाडू़ लग रही है की नहीं। रोज कूड़ा उठाया जाता है कि नहीं। कूड़े को कूड़ा स्थल पर डाला जाता है या कही पर भी डंप कर दिया जाता है। जितने सफाई कर्मचारियों की तैनाती है वो सभी रोजाना काम पर आते है कि या फिर अऩुपस्थित रहते हैं। जो लोग उस वार्ड में रहते है वो वहां की सफाई व्यवस्था से संतुष्ट हैं कि नहीं। सीवरेज सिस्टम कैसा है। लोग अगर सफाई से जुड़ी समस्याएं अधिकारियों को बताते है तो उनका कितनी जल्दी निस्तारण होता है। इसके साथ वहां के लोगों की राय भी ली जाएगी कि वो अपने वार्ड को कितना साफ सुथरा मानते है और कितना वहां की सफाई व्यवस्था से संतुष्ट है।
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