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सरकार के भरोसे नहीं छोड़ सकते कोर्ट की सुरक्षा : हाई कोर्ट

court12इलाहाबाद। लखनऊ में वकील की हत्या के विरोध में बुधवार को हुए बवाल पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता में गठित सात जजों की वृहदपीठ ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए गुरुवार को कहा कि कानून व्यवस्था और अदालतों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वालों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

अदालतों की सुरक्षा सिर्फ सरकार के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती। इसमें हस्तक्षेप कर मॉनीटरिंग की जाएगी। अगली सुनवाई 18 फरवरी को होगीकोर्ट ने सरकार को न्यायालयों की सुरक्षा मजबूत करने का आदेश दिया है। साथ ही प्रमुख सचिव गृह देबाशीष पंडा से एक हफ्ते में घटना की प्राथमिक रिपोर्ट मांगी है और हिंसा में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने प्रमुख सचिव से पूछा है कि अदालत परिसर में किसके आदेश से पुलिस दाखिल हुई, आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। वृहदपीठ ने बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश, सेंट्रल बार एसोसिएशन और अवध बार एसोसिएशन के सचिवों को नोटिस जारी किया है।

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यह आदेश चीफ जस्टिस डॉ. डी.वाई.चन्द्रचूड, जस्टिस राकेश तिवारी, जस्टिस वी.के. शुक्ला, जस्टिस अरुण टंडन, जस्टिस तरुण अग्रवाल, जस्टिस दिलीप गुप्ता और जस्टिस एस.एस. चौहान ने दिया।

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