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यूपी में राहुल की कांग्रेस अनुप्रिया पटेल की अपना दल से भी हुई पीछे……………

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के चुनाव में कांग्रेस की जैसी दुर्गति हुई है वैसी पहले कभी नहीं हुई, कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी के लिए जो कि जल्दी ही अध्यक्ष भी बनने वाले हैं, उनके लिए विधानसभा चुनाव के नतीजे बहुत बड़ा झटका है। कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में चुनाव जीतने के लिए सारी जुगत लगा दी लेकिन उसके हाथ लगी अब तक की सबसे खराब हार। कांग्रेस पार्टी एक राष्ट्रीय पार्टी है और केंद्र के स्तर पर सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी भी, लेकिन उत्तर प्रदेश में ये बेहद छोटी पार्टियों से भी पीछे रह गई है और कुछ बहुत ही छोटी और नई पार्टियां उसकी बराबरी में पहुंचती दिखाई दे रही हैं।

उत्तर प्रदेश के जैसे नतीजे आए हैं उनमें कांग्रेस सिर्फ 7 सीटों पर सिमट रही है, वहीं उसकी तुलना में बहुत छोटी और नई पार्टी अपना दल को 9 सीटे आई हैं। अपना दल दिवंगत सोनेलाल पटेल की स्थापित की हुई पार्टी है, जिसकी नेता अनुप्रिया पटेल मोदी सरकार में मंत्री हैं। अपना दल का भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन है और पार्टी ने इस बार के विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया है। संभव है उसके कोटे से कुछ मंत्री भी बनेंगे और इस तरह से उसका प्रभाव और भी बढ़ेगा। नतीजे के हिसाब से देखा जाए इस तरह से अनुप्रिया पटेल ने राजनीति के मैदान में कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी को पटखनी दे दी है। इसे यूपी में कांग्रेस पार्टी के साथ-साथ राहुल गांधी की भी करारी हार माना जा सकता है।

अपना दल की तरह से ही उत्‍तर प्रदेश में एक नई-नवेली पार्टी है सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, इसका भी भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन था और इस पार्टी ने भी 4 सीटें हासिल कर ली हैं, कांग्रेस की तुलना में ये आधे से ऊपर ही है, यानी करीबी ज्यादा है। अपना दल और सुहेल देव भारतीय समाज पार्टी मुख्य रूप से ऐसी पार्टियां हैं जो एक जाति विशेष के वोटों को लेकर आगे बढ़ी हैं। जब अपना दल और सुहेल देव भारतीय समाज पार्टी जैसी पार्टियां भी कांग्रेस से आगे निकल रही हों और बराबरी पर पहुंच रही हों तो आप कांग्रेस की गिरती हुई बदतर स्थिति का अंदाजा लगा सकते हैं। जाहिर ये स्थिति और हालात भविष्‍य में कांग्रेस पार्टी के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। पार्टी को राहुल गांधी के बारे में भी विचार करना होगा।

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उत्तर प्रदेश को जीतने के लिए कांग्रेस ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। कांग्रेस ने इस बार के चुनाव में यूपी की राजनीति में लौटने की हर संभव राजनीतिक कोशिशें कीं। कभी हवा का रुख भांपकर एकेला चलो रे…का राग अलापा तो कभी गठबंधन की जरूरत बताकर अलग-अलग पार्टियों से गठबंधन की कोशिशें कीं। आखिर में समाजवादी पार्टी से गठबंधन किया, लेकिन ये प्रयोग पूरी तरह से नाकाम साबित हुआ, खासतौर पर कांग्रेस को अपने पैरों पर खड़े करने को लेकर। कांग्रेस यूपी में सत्ता से 27 साल से बाहर है, उसने समाजवादी पार्टी से गठबंधन से पहले नारा भी दिया था कि ’27 साल, यूपी बेहाल’, लेकिन अब उसका इंतजार और भी बढ़ता दिखाई दे रहा है और शायद अनिश्चित काल तक खिंचता दिखाई दे रहा है।

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